दमोह मंडी में बारिश से भीगा सैकड़ों क्विंटल अनाज, किसानों ने उठाए इंतजामों पर सवाल

मध्य प्रदेश के दमोह में कृषि उपज मंडी में हुई अचानक बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मंडी में अपनी उपज बेचने पहुंचे किसानों का सैकड़ों क्विंटल अनाज पानी में भीग गया। किसानों का कहना है कि यदि मंडी में पर्याप्त व्यवस्था होती तो उनकी फसल को नुकसान नहीं होता। घटना के बाद मंडी प्रबंधन की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मौसम में बदलाव के बीच किसानों को अपनी मेहनत की फसल बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

दमोह कृषि उपज मंडी में इन दिनों फसल की अच्छी आवक हो रही है। बड़ी संख्या में किसान गेहूं और अन्य उपज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। मंडी परिसर में बने टीन शेड पहले से ही भरे हुए थे, जिसके कारण कई किसानों को अपना अनाज खुले स्थान पर रखना पड़ा। गुरुवार शाम मौसम अचानक बदला और तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश का पानी सीधे खुले में रखी उपज तक पहुंच गया। कुछ ही देर में बड़ी मात्रा में अनाज भीग गया, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। कई किसान बारिश के दौरान अपने स्तर पर अनाज ढकने की कोशिश करते रहे, लेकिन तेज हवा और बारिश के कारण स्थिति संभालना मुश्किल हो गया।

मंडी में बढ़ती आवक और भंडारण व्यवस्था की चुनौती

कृषि उपज मंडियों में फसल सीजन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित भंडारण और पर्याप्त शेड की होती है। दमोह मंडी में भी इस समय बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से मौसम विभाग लगातार बदलते मौसम की संभावना जता रहा था। इसके बावजूद मंडी परिसर में अतिरिक्त तिरपाल, अस्थायी शेड या अन्य सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त मात्रा में नजर नहीं आए।

विशेषज्ञों का मानना है कि अनाज के भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। यदि लंबे समय तक नमी बनी रहती है तो अनाज में फफूंद लगने और गुणवत्ता घटने का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर किसानों को मिलने वाली कीमत पर पड़ता है। कई बार भीगा हुआ अनाज समर्थन मूल्य या बाजार मूल्य पर बेचने में भी कठिनाई पैदा करता है। ऐसे में मंडी प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल खरीद व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किसानों की उपज को सुरक्षित रखने की भी होती है। यही वजह है कि इस घटना के बाद किसान बेहतर भंडारण सुविधाओं और समय रहते सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं।

 बदलते मौसम के बीच किसानों के लिए क्यों जरूरी हैं बेहतर इंतजाम

मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में इस समय मौसम तेजी से बदल रहा है। प्री-मानसून गतिविधियों के चलते कई जिलों में तेज हवा, बारिश और आंधी की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे मौसम में मंडियों में खुले में रखी फसल सबसे ज्यादा जोखिम में रहती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मंडियों में आधुनिक वेयरहाउस, पर्याप्त शेड और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था होना जरूरी है ताकि अचानक मौसम खराब होने पर किसानों की उपज को सुरक्षित रखा जा सके।

दमोह की घटना एक बार फिर इस जरूरत को सामने लाती है कि मंडियों में केवल खरीद प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि फसल संरक्षण पर भी बराबर ध्यान दिया जाए। किसानों की पूरी साल की मेहनत कुछ मिनट की बारिश में प्रभावित हो सकती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और मंडी प्रबंधन को मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए पहले से तैयारी करनी चाहिए। किसानों को भी सलाह दी जाती है कि मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और जहां संभव हो, अपनी उपज को तिरपाल या अन्य सुरक्षा साधनों से ढककर रखें। फिलहाल दमोह मंडी में हुए नुकसान के बाद किसान प्रशासन से उचित कार्रवाई और बेहतर व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं।

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