ऑपरेशन सिंदूर पर नया विवाद: 400 दिन बाद सरकार ने सार्वजनिक किए 6 शहीदों के नाम, विपक्ष ने उठाए सवाल
ऑपरेशन सिंदूर पर नया विवाद: 400 दिन बाद सरकार ने सार्वजनिक किए 6 शहीदों के नाम, विपक्ष ने उठाए सवाल
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर केंद्र सरकार एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर है। ऑपरेशन के करीब 400 दिन बाद केंद्र सरकार ने पहली बार आधिकारिक तौर पर उन छह सैन्यकर्मियों के नाम सार्वजनिक किए हैं, जो इस सैन्य अभियान के दौरान शहीद हुए थे। इसके बाद विपक्ष ने सरकार से सवाल पूछते हुए आरोप लगाया है कि शहीदों की जानकारी सार्वजनिक करने में देरी की गई।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। सरकार ने इसे आतंकवाद के खिलाफ बड़ी और निर्णायक कार्रवाई बताया था।
संसद में क्या कहा था रक्षा मंत्री ने?
ऑपरेशन के बाद संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि "हमारे किसी भी बहादुर सैनिक को कोई क्षति नहीं हुई।" उस समय इस बयान को ऑपरेशन की बड़ी सफलता के रूप में देखा गया था।
सरकार ने जारी किए इन 6 शहीदों के नाम
सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए सैन्यकर्मियों में सूबेदार मेजर पवन कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, सैनिक सुनील कुमार, अग्निवीर मुरली नायक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। इनमें पांच जवान भारतीय सेना और एक जवान भारतीय वायुसेना के थे। सरकार ने यह भी बताया कि इनमें से दो जवानों को मरणोपरांत वीरता सम्मान से सम्मानित किया गया।
विपक्ष ने उठाए सवाल
शहीदों के नाम सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि यदि ऑपरेशन के दौरान छह जवान शहीद हुए थे तो उनके नाम सार्वजनिक करने में लगभग 400 दिन क्यों लगे। उनका कहना है कि शहीदों को समय रहते वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
सरकार की ओर से क्या है स्थिति?
फिलहाल सरकार ने छह शहीदों के नाम आधिकारिक तौर पर जारी किए हैं। हालांकि, शहीदों के नाम सार्वजनिक करने में हुई देरी को लेकर सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।