सहायक प्राध्यापक भर्ती में बहु दिव्यांगजनों को आरक्षण से वंचित करने का आरोप
सहायक प्राध्यापक भर्ती में बहु दिव्यांगजनों को आरक्षण से वंचित करने का आरोप
MPPSC की 2022, 2024 एवं 2025 की भर्ती में अवसर नहीं मिलने से बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों में नाराजगी
भोपाल। मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग में लोक सेवा आयोग, इंदौर द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षाओं में बहु दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों को रोजगार एवं आरक्षण के अवसर से वंचित किए जाने का मामला सामने आया है। बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों का आरोप है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सहायक प्राध्यापक के पदों के लिए कार्य की प्रकृति के आधार पर बहु दिव्यांग श्रेणी को अयोग्य माना गया, जबकि दिव्यांगता की अन्य श्रेणियों—लोकोमोटर, श्रवण बाधित एवं दृष्टि बाधित—को योग्य माना गया है।
बहु दिव्यांगता में दो या अधिक दिव्यांगताएं शामिल
बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों का कहना है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत एक व्यक्ति में दो या दो से अधिक निर्दिष्ट दिव्यांगताओं का होना बहु दिव्यांगता (Multiple Disabilities) की श्रेणी में आता है। ऐसे में यदि किसी अभ्यर्थी के पास लोकोमोटर एवं श्रवण दिव्यांगता दोनों हैं, तो उसे केवल इस आधार पर सहायक प्राध्यापक पद के लिए अवसर से वंचित करना कि वह बहु दिव्यांग श्रेणी में आता है, दिव्यांगजनों के अधिकारों के संबंध में गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
आरक्षण व्यवस्था में बहु दिव्यांग श्रेणी का उल्लेख
मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी दिनांक 21/11/ 2022 के पत्र में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 एवं मध्यप्रदेश दिव्यांगजन अधिकार नियम, 2017 के तहत दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण की विभिन्न श्रेणियों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज में दृष्टि बाधित एवं कम दृष्टिबाधित, बहरे एवं कम सुनने वाले, लोकोमोटर दिव्यांगता सहित अन्य निर्दिष्ट दिव्यांगताओं तथा ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता, विशिष्ट सीखने की अक्षमता, मानसिक बीमारी एवं बहु दिव्यांगता के लिए पृथक हिस्सा दर्शाया गया है।
दस्तावेज के अनुसार दिव्यांगजनों के लिए कुल 6 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था में चार समूहों को 1.5-1.5 प्रतिशत का हिस्सा दर्शाया गया है।
उच्च शिक्षा विभाग की भर्ती में बहु दिव्यांग श्रेणी पर सवाल
बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों का कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापक भर्ती में लोकोमोटर, श्रवण बाधित एवं दृष्टि बाधित श्रेणियों को पद के कार्य हेतु योग्य माना गया, लेकिन बहु दिव्यांग श्रेणी को अयोग्य मानकर उसके लिए उपलब्ध अवसर अन्य दिव्यांग श्रेणियों में समायोजित कर दिए गए।
इसका प्रभाव MPPSC द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2022, 2024 एवं 2025 में बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों के रोजगार के अवसरों पर पड़ा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि बहु दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित अवसर उपलब्ध थे, तो उन्हें समाप्त करने अथवा अन्य श्रेणियों में समायोजित करने के बजाय पद की वास्तविक कार्य-प्रकृति के आधार पर प्रत्येक अभ्यर्थी की कार्यक्षमता का मूल्यांकन किया जाना चाहिए था।
बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों ने सरकार से की पुनर्विचार की मांग
बहु दिव्यांगजनों ने मध्यप्रदेश शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि सहायक प्राध्यापक भर्ती में बहु दिव्यांग श्रेणी को रोजगार एवं आरक्षण से वंचित करने की व्यवस्था की पुनः समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि दिव्यांगता की श्रेणी के आधार पर स्वतः अयोग्य घोषित करने के बजाय पद की आवश्यक कार्यक्षमता और अभ्यर्थी की वास्तविक क्षमता का निष्पक्ष परीक्षण किया जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों ने शासन से मांग की है कि MPPSC की सहायक प्राध्यापक भर्ती में बहु दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण एवं रोजगार के अवसर सुनिश्चित किए जाएं तथा पूर्व में किए गए श्रेणीवार समायोजन की भी समीक्षा की जाए।
बहु दिव्यांगजनों का कहना है कि उन्हें दिव्यांगता के कारण नहीं, बल्कि अपनी योग्यता और कार्य करने की क्षमता के आधार पर रोजगार का अवसर मिलना चाहिए।
सहायक प्राध्यापक भर्ती में बहु दिव्यांगजनों को आरक्षण से वंचित करने का आरोप