मोहन कैबिनेट की ऐतिहासिक बैठक: जगदीशपुर में 9 अहम विधेयकों को मंजूरी, ई-बस से पहुंचे मुख्यमंत्री और सभी मंत्री
मोहन कैबिनेट की ऐतिहासिक बैठक: जगदीशपुर में 9 अहम विधेयकों को मंजूरी, ई-बस से पहुंचे मुख्यमंत्री और सभी मंत्री
भोपाल/जगदीशपुर: मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने आज रविवार, 19 जुलाई 2026 को एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भोपाल के जगदीशपुर में विशेष कैबिनेट बैठक का आयोजन किया। कल (20 जुलाई) से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले हुई इस बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक ढांचे, सुरक्षा और सामाजिक सुधारों से जुड़े 9 बेहद महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही इन सभी विधेयकों को अपनी स्वीकृति दे चुके हैं, और अब इन्हें आगामी मानसून सत्र में विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।
मितव्ययिता और सादगी की मिसाल: ई-बस से पहुंचे सभी मंत्री
इस पूरी कैबिनेट बैठक के दौरान सरकार का एक बेहद अनोखा रूप देखने को मिला। मुख्यमंत्री और सभी कैबिनेट मंत्री अपने चमचमाते सरकारी वाहनों और सुरक्षा काफिलों को छोड़कर एक साथ इलेक्ट्रिक बस (ई-बस) में सवार होकर जगदीशपुर बैठक स्थल पहुंचे। सभी मंत्रियों को पहले सीएम हाउस बुलाया गया था, जहां से वे इस बस में सवार हुए।
इतना ही नहीं, बैठक में हिस्सा लेने वाले वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों के वाहनों को भी कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में ही पार्क करवा दिया गया और उन्हें भी ई-बस के जरिए बैठक स्थल तक ले जाया गया। मुख्यमंत्री की इस पहल को ईंधन और सरकारी संसाधनों की बचत से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके जरिए सरकार ने जनता के पैसे का सोच-समझकर इस्तेमाल करने, सादगी और मितव्ययिता का एक बड़ा संदेश दिया है।
कैबिनेट बैठक में मंजूर हुए प्रमुख 9 विधेयक और उनके मुख्य बिंदु:
1. समान नागरिक संहिता (UCC) और नया श्रम कानून
मानसून सत्र में पेश होने वाला यह सबसे बड़ा और चर्चित विधेयक है, जिसके लागू होने से सामाजिक और पारिवारिक जीवन में बड़े बदलाव आएंगे:
एक जैसा कानून: राज्य में अब शादी और तलाक के लिए सभी धर्मों के नागरिकों पर एक समान कानून लागू होगा।
समान अधिकार: गोद लेने और संपत्ति के अधिकार पर भी नियम एक जैसे होंगे। बेटे और बेटी दोनों को पैतृक संपत्ति में पूरी तरह से बराबर का हक मिलेगा।
लिव-इन रजिस्ट्रेशन: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए अपना पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होगा।
जनजातीय समुदाय को छूट: इस कानून के दायरे से राज्य के जनजातीय समुदायों (Tribal Communities) को बाहर रखते हुए विशेष छूट दी गई है।
2. निजी कोचिंग संस्थानों पर नकेल (पंजीयन एवं विनिमय विधेयक 2026)
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और अभिभावकों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सरकार यह कड़ा कानून ला रही है:
उम्र सीमा: अब 16 साल से कम उम्र के बच्चों का किसी भी कोचिंग संस्थान में एडमिशन नहीं हो सकेगा। छात्रों को केवल 11वीं क्लास के बाद ही कोचिंग में प्रवेश मिलेगा।
अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: हर निजी कोचिंग संस्थान का सरकारी स्तर पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
भ्रामक विज्ञापनों पर रोक: कोचिंग संस्थान अब छात्रों या अभिभावकों को लुभाने वाले भावनात्मक या झूठे दावे करने वाले विज्ञापन नहीं दे सकेंगे। ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई होगी।
फीस रिफंड का सख्त नियम: अगर कोई छात्र बीच में कोचिंग छोड़ता है, तो संस्थान को 10 दिनों के भीतर उसकी फीस लौटानी होगी। यह राशि समानुपातिक (Proportionate) आधार पर वापस होगी, यानी छात्र ने जितने दिन पढ़ाई की है, सिर्फ उतने ही दिन की फीस काटी जा सकेगी।
3. उद्योगों के लिए नया 'बिजनेस सचिवालय' (ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026)
राज्य में निवेश आकर्षित करने और व्यापार को आसान बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार किया गया है:
सिंगल विंडो सिस्टम: एमपीआईडीसी (Madhya Pradesh Industrial Development Corporation) के तहत एक नया 'बिजनेस सचिवालय' बनाया जाएगा। नई इंडस्ट्री लगाने की तमाम मंजूरियां अब इसी एक सचिवालय से मिलेंगी।
लापरवाही पर कार्रवाई: सभी सरकारी विभाग अपने अधिकारियों को इस सचिवालय में भेजेंगे। अगर कोई विभाग ऐसा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी और उसके अधिकारियों की सीधे यहीं पोस्टिंग कर दी जाएगी।
हलफनामे पर तत्काल मंजूरी: निवेशक अब खुद हलफनामा (Affidavit) देकर सीधे इंडस्ट्री शुरू कर सकेंगे, जिसके आधार पर उन्हें 'लेटर ऑफ एस्टेब्लिशमेंट' जारी हो जाएगा। अलग से पॉलिसी सर्टिफिकेट लेने का झंझट खत्म होगा, जिससे महीनों का काम दिनों में हो सकेगा।
4. ऊंची इमारतों में फायर एनओसी अनिवार्य (अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक 2026)
शहरी क्षेत्रों में आगजनी के हादसों को रोकने के लिए सरकार ने सुरक्षा नियम कड़े कर दिए हैं:
फायर एनओसी: अब 15 मीटर से ऊंची हर बहुमंजिला इमारत के लिए फायर एनओसी (No Objection Certificate) लेना जरूरी होगा।
दायरे में आने वाले संस्थान: 500 से ज्यादा छात्रों वाले स्कूल, मॉल, 15 बेड से बड़े अस्पताल और 50 से ज्यादा कमरों वाले होटल इस कानून के दायरे में आएंगे।
नया टैक्स व जुर्माना: नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना लगेगा। साथ ही, नगर निकाय अब प्रॉपर्टी टैक्स के साथ एक नया टैक्स जोड़ सकेंगे, जिसे 'फायर सेफ्टी टैक्स' कहा जाएगा।
5. उच्च शिक्षा और निजी विश्वविद्यालयों के नियमों में ढील
जमीन की शर्त खत्म: अब तक राज्य में निजी यूनिवर्सिटी (Private University) खोलने के लिए कम से कम 25 एकड़ जमीन होना अनिवार्य था। नए विधेयक में इस शर्त को हटा दिया गया है, अब सिर्फ 'पर्याप्त जमीन' होना ही काफी माना जाएगा। इससे शहरों में मल्टीस्टोरी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज भी खोली जा सकेंगी।
विश्वविद्यालयों का विभाजन: आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के तहत जबलपुर की एक यूनिवर्सिटी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इसके अलावा धनवंतरी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक भी एजेंडे में शामिल है।
6. ग्रामीण संपत्तियों की रजिस्ट्री पर बड़ी छूट
मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक: इसके तहत 'स्वामित्व योजना' में ग्रामीण आबादी को मिलने वाले अधिकार पत्रों (पट्टों/जमीन के मालिकाना हक) की रजिस्ट्री को पूरी तरह मुफ्त करने का फैसला लिया गया है। पहले इस पर 1 प्रतिशत जनपद उपकर लगता था।
मप्र उपकर (संशोधन) विधेयक: विकास कार्यों के लिए फंड जुटाने हेतु लगने वाले उपकर में भी छूट दी गई है। स्वामित्व योजना के अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री पर संपत्ति मूल्य के 0.5 प्रतिशत उपकर से राहत दी जाएगी।
7. मप्र राजमार्ग (संशोधन) विधेयक 2026
प्रदेश के स्टेट हाईवे (State Highways) पर होने वाले अवैध कट और अतिक्रमण को रोकने के लिए नियमों को बेहद सख्त किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों को कम करना और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाना है।
यह खबर आम जनता के लिए क्यों है बेहद जरूरी?
मोहन कैबिनेट के ये सभी फैसले सीधे तौर पर आम नागरिकों, विद्यार्थियों और कारोबारियों के जीवन को प्रभावित करने वाले हैं। जहां एक तरफ शिक्षा जगत के जानकार जमीन संबंधी नियमों में ढील को सकारात्मक बता रहे हैं (जिससे युवाओं को अपने ही शहर में पढ़ाई के बेहतर मौके मिलेंगे), वहीं कोचिंग और फायर सेफ्टी से जुड़े कड़े नियम जनता की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करेंगे। समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे कानून से सामाजिक समरसता और पारिवारिक अधिकारों में नया युग शुरू होगा। हालांकि, विपक्ष इन विधेयकों, खासकर UCC और कोचिंग नियमों को लेकर मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में तीखे सवाल उठा सकता है, जिससे सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं।