सरदार सरोवर समझौते पर सवाल: सबसे ज्यादा डूब झेलने वाला मध्यप्रदेश ही गुजरात को देगा 550 करोड़?

नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध को देश की सबसे बड़ी बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं में गिना जाता है। इस परियोजना से गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को सिंचाई, पेयजल और बिजली का लाभ मिला। हालांकि सबसे अधिक डूब क्षेत्र और विस्थापन का असर मध्यप्रदेश ने झेला। 

अब करीब 30 साल से लंबित वित्तीय विवाद पर चारों राज्यों के बीच समझौता हो गया है। लेकिन इस समझौते के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि मध्यप्रदेश को अपना 7,669 करोड़ रुपये का दावा छोड़कर गुजरात को 550 करोड़ रुपये क्यों देने पड़ेंगे?

क्या है सरदार सरोवर परियोजना?

सरदार सरोवर बांध गुजरात के नवागाम में नर्मदा नदी पर बनाया गया है। यह परियोजना 1979 में नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (Narmada Water Disputes Tribunal) के फैसले के आधार पर शुरू हुई थी। इसमें गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान चारों राज्य साझेदार हैं।

न्यायाधिकरण ने बांध की लागत, पानी और बिजली के बंटवारे के साथ-साथ राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारियां भी तय की थीं। गुजरात को सिंचाई और पेयजल का सबसे बड़ा लाभ मिला, जबकि मध्यप्रदेश को बिजली का बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है।

सबसे ज्यादा नुकसान मध्यप्रदेश को क्यों हुआ?

सरदार सरोवर परियोजना का सबसे बड़ा डूब क्षेत्र मध्यप्रदेश में आया। कुल डूब क्षेत्र का लगभग 55.5 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में रहा। परियोजना से प्रदेश के 192 गांव प्रभावित हुए और हजारों परिवारों का पुनर्वास करना पड़ा।

इसके अलावा बड़ी मात्रा में कृषि भूमि, वन क्षेत्र और सरकारी राजस्व भूमि भी जलमग्न हो गई। निजी जमीन और मकानों का मुआवजा तो दिया गया, लेकिन सरकारी भूमि, वन भूमि और अन्य परिसंपत्तियों के मूल्यांकन को लेकर विवाद वर्षों तक बना रहा।

7,669 करोड़ रुपये का दावा कैसे बना?

मध्यप्रदेश का कहना था कि परियोजना के कारण डूबी सरकारी भूमि, वन क्षेत्र और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों का मूल्य जोड़ने पर उसे करीब 7,669 करोड़ रुपये मिलना चाहिए।

वहीं गुजरात का तर्क था कि परियोजना की लागत बढ़ने और अन्य वित्तीय दायित्वों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसी मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच वर्षों तक विवाद चलता रहा।

क्या हुआ नए समझौते में?

7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में वन टाइम सेटलमेंट (One Time Settlement) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद को अंतिम रूप से समाप्त करना बताया गया है।

समझौते के तहत कौन कितना भुगतान करेगा?

समझौते के अनुसार मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान, तीनों राज्यों को गुजरात को 550-550 करोड़ रुपये देने होंगे। यानी गुजरात को कुल 1,650 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। इसके साथ ही सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े पुराने वित्तीय दावों और देनदारियों का निपटारा माना जाएगा।

समझौते पर क्यों उठ रहे सवाल?

समझौते के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस राज्य ने सबसे अधिक डूब क्षेत्र, विस्थापन और पर्यावरणीय नुकसान झेला, उसी मध्यप्रदेश को अपना हजारों करोड़ रुपये का दावा छोड़कर गुजरात को भुगतान क्यों करना पड़ रहा है।

वहीं इस समझौते के समर्थकों का कहना है कि यह चार राज्यों के बीच दशकों से चले आ रहे विवाद का व्यावहारिक समाधान है, जिससे भविष्य के कानूनी और वित्तीय विवाद समाप्त होंगे।

अब आगे क्या?

सरदार सरोवर परियोजना से जुड़ा वित्तीय विवाद भले ही इस समझौते के बाद समाप्त माना जा रहा हो, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक बहस अभी जारी है। एक पक्ष इसे सहकारी संघवाद और सहमति से निकला समाधान बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे मध्यप्रदेश के हितों के साथ समझौता मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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