प्रहलाद अग्रवाल को किसान संघर्ष समिति की तरफ से विनम्र श्रद्धान्जली

प्रहलाद अग्रवाल जी की विद्व्वता की मैं कायल हूँ, जब मैं उनसे पहली बार मिली और उन्हें ये पता चला कि मैं वकील हँू, तो उन्होंने मुझे कई ऐसे फैसले दिखाए जो उनके पक्ष में थे। जिन्हें दिखाकर वे मेरे साथ चर्चा करते थे, जिन मुकदमों को वे जीते या हारे  सब की प्रति वे अपने पास रखते थे। प्रकरण जीतने या हारने पर वे विचार विमर्श करते थे। वे वकील तो नही थे पर कानून का ज्ञान उन्हें वकीलों से कम नही था। और कानून का ज्ञान होने के कारण वे प्रशासनिक अधिकारियों का सामना करने में सक्षम थे। 12 जनवरी 1998 मे द्विग्विजय सिंग की सरकार द्वारा मुलताई में निहत्थे गोली चालन करवाया जिसमें  24 किसान शहीद हुए, 150 किसान घायल हुए तब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जे.पी.सिंग द्वारा उन पर दबाव बनाया गया कि उनकी नर्मदा लाॅज में एक कमरे में नक्सली साहित्य तथा देशी कट्टे जप्ती के कागज पर हस्ताक्षर करें और वह कमरा डाॅ. सुनीलम् के नाम पर आबंटित करने का उल्लेख रजिस्टर पर करें। इसके लिये प्रहलाद अग्रवाल जी तैयार नही हुए और उन्हें किसी प्रकार का भय भी नही था क्योंकि उन्हें कानून का ज्ञान था। और वे सच्चे राष्ट्रभक्त थे। झूठ बोलना उनके सिद्धांतो के एकदम विपरीत था। प्रशासन के सामने वे झुके नही इसकी सजा उन्होंने भोगी और मुझे इस बात का दुख है कि जिस आदमी ने जीवन में एक चीटी भी नही मारी हो वह इस दुनिया मे झूठे प्रकरण के आधार पर धीरसिंग के हत्या का दोषी करार दिया गया। इस देश की न्याय पालिका किस तरीके से काम करती है यह मलाल लिये हुए प्रहलाद अग्रवाल जी इस दुनिया से अलविदा हो गये। मुझे पूरा विश्वास है कि उच्च न्यायालय से उन्हें बाईज्जत बरी किया जायेगा तब वे इस फैसले को सुनने के लिये दुनिया में नही होगें।
इस देश की न्याय पालिका स्वतंत्र तरीके से अपना कार्य करने में अपने आप को असाहय महसूस कर रही है। न्याय पालिका की स्वतंत्रता के लिये किसान संघर्ष समिति अपना अन्दोलन चलाये यही प्रहलाद अग्रवाल जी के लिये सच्ची श्राद्धान्जली होगी।

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