लघुकथा- पिता को पत्र

खबर नेशन / Khabar Nation
लेखिका सरिता बघेला 'अनामिका" द्वारा रचित

आदरणीय पिताजी नमस्कार,

पिताजी, आज पुरानी संदूक में, मैं जब कुछ ढूंढ रही थी। तब बचपन में आपके द्वारा दी गई पायजेब (पायल) जो मुझे आपने हाथों से पहनाई थी। उसमें लगे काफी सारे घूंगरू जो निरंतर मेरे चलने पर आवाज़ किया करते थे और मैं खुश होकर बार-बार पैर पटकती, तरह-तरह की मुद्राओं में नृत्य किया करती थी। मेरी हर अदा पर आप मोहित हो जाते थे हजारों बार बलाय लेते नहीं थकते थे। मेरी हर छोटी बड़ी खुशी आपके लिए बहुत महत्व रखती थी। पिता जी, आपको याद है ना! जब मेरी एक पायजेब कहीं गुम गई थी। मैंने रो-रो के घर भर दिया था। मां और आपने पूरे घर में खोज करके मेरी पायजेब मुझे पहनाकर ही सांस ली थी। मेरे एक-एक आंसू पर आप मुझे कह रहे थे। "बेटा मिल जाएगी परेशान ना हो, मैं दूसरी ला दूंगा।" आज यादों की संदूक खुल गई। फिर वही बचपन याद आ गया। पिताजी आज ईमेल और व्हाट्सएप के जमाने में भी आपको मैंने अपने स्नेह से भरा यह पत्र लिखा है।

मैं जानती हूं यह पढ़कर आपको भी वह सब याद आ गया होगा। बच्चों की प्रत्येक स्मृति माता-पिता तो कभी भूल ही नहीं पाते।

आज यह मेरे पैरों में बांध नहीं सकती पर यादों के बंधन में आज भी बंधी हूंl इसकी मधुर धुन की छुन-छुन सुनाई देती है।

 

                    आपकी प्यारी बेटी

                        अरुणिमा

 

लिखें और कमाएं
मध्यप्रदेश के पत्रकारों को खुला आमंत्रण आपके बेबाक और निष्पक्ष समाचार जितने पढ़ें जाएंगे उतना ही आपको भुगतान किया जाएगा । 1,500 से 10,000 रुपए तक हर माह कमा सकते हैं अगर आप इस आत्मनिर्भर योजना के साथ जुड़ना चाहते हैं तो संपर्क करें:
गौरव चतुर्वेदी
खबर नेशन
9009155999

 

Share:


Related Articles


Leave a Comment