राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु भेजा, MP में सियासी सरगर्मी तेज
राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु भेजा, MP में सियासी सरगर्मी तेज
भोपाल। मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट का चुनाव अब बेहद रोचक और प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबले में बदल गया है। जिस सीट को अब तक कांग्रेस के खाते की सीट माना जा रहा था, उस पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु भेजने का फैसला किया है।
मंगलवार को कांग्रेस विधायक बड़ी संख्या में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के भोपाल स्थित निवास पर एकत्र हुए। यहां से सभी विधायक बस के माध्यम से एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से उन्हें विशेष विमान से बेंगलुरु रवाना किया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने विधायकों के लिए 72 सीटों वाला विशेष विमान बुक किया है। बताया जा रहा है कि विधायक मतदान तक बेंगलुरु में ही रहेंगे।
इससे पहले सोमवार देर शाम उमंग सिंघार के निवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में विधायकों को लगभग 10 दिनों तक बाहर रहने की तैयारी के साथ आने के निर्देश दिए गए। पार्टी नेतृत्व ने विधायकों से एकजुट रहने और किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने को कहा।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस को अपने सभी 62 विधायकों पर पूरा भरोसा है, लेकिन भाजपा की ओर से लगातार राजनीतिक जोड़-तोड़ की कोशिशों को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास करती रही है, इसलिए पार्टी अपने विधायकों को सुरक्षित और एकजुट रखना चाहती है।
कांग्रेस विधायक दिनेश गुर्जर ने भी दावा किया कि पार्टी पूरी तरह संगठित है और भाजपा की कोई भी रणनीति सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सभी विधायक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा के तीसरे उम्मीदवार उतारने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने राजनीतिक संदेश देने के लिए यह कदम उठाया है, जबकि उसके पास आवश्यक संख्या बल नहीं है। पटवारी ने कहा कि भाजपा ने ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार को केवल चुनावी गणित साधने के लिए मैदान में उतारा है और यह ओबीसी समाज के साथ न्याय नहीं है।
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो भाजपा के पास अपने तीसरे उम्मीदवार को विजयी बनाने के लिए आवश्यक मतों से लगभग 10 वोट कम बताए जा रहे हैं। ऐसे में चुनाव का परिणाम काफी हद तक क्रॉस वोटिंग और अतिरिक्त समर्थन पर निर्भर करेगा। यही वजह है कि कांग्रेस किसी भी प्रकार की टूट-फूट की संभावना को लेकर सतर्क दिखाई दे रही है।
अब राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति में उत्सुकता बढ़ गई है। मतदान के दिन विधायकों की एकजुटता, संभावित क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक रणनीतियां तय करेंगी कि तीसरी सीट किसके खाते में जाती है। फिलहाल यह चुनाव केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता नजर आ रहा है।
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