दतिया उपचुनाव 2026: उम्मीदवार से ज्यादा चर्चा में डॉ. नरोत्तम मिश्रा, क्या उनकी सियासी पकड़ दिलाएगी भाजपा को जीत?
30 जुलाई को दतिया में मतदान होगा। भाजपा ने इस बार डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया, लेकिन पूरे चुनाव प्रचार में उनकी सक्रियता सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी रही। अब सबकी नजर 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर है।
दतिया में चुनावी मुकाबला निर्णायक मोड़ पर
दतिया विधानसभा उपचुनाव अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 30 जुलाई को मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे और 3 अगस्त को चुनाव परिणाम घोषित होंगे। इस बार मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि कई राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा भी माना जा रहा है।
टिकट नहीं मिला, फिर भी प्रचार के केंद्र में रहे डॉ. नरोत्तम मिश्रा
भाजपा ने इस बार पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया। पार्टी के इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति में काफी चर्चा बटोरी। टिकट कटने के बाद समर्थकों की नाराजगी भी सामने आई, लेकिन बाद में डॉ. मिश्रा ने संगठन के निर्णय को स्वीकार करते हुए भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरी सक्रियता दिखाई।
उन्होंने लगातार जनसभाएं, रोड शो और डोर-टू-डोर प्रचार किया। इससे यह संदेश गया कि भले ही वे चुनाव नहीं लड़ रहे हों, लेकिन उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा और प्रभाव इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
भाजपा के दिग्गजों ने संभाला मोर्चा
चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी दतिया में लगातार सक्रिय रहकर चुनावी कमान संभाली। उनके अलावा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रचार किया। इससे साफ है कि भाजपा इस सीट को प्रतिष्ठा का चुनाव मानकर पूरी ताकत झोंक रही है।
कांग्रेस भी पूरी ताकत से मैदान में
दूसरी ओर कांग्रेस भी चुनाव को गंभीरता से लड़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर कुछ समीकरण, जिनमें दामोदर यादव का प्रभाव भी शामिल है, मुकाबले को रोचक बना सकते हैं। हालांकि इसका वास्तविक असर मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
सबसे बड़ा सवाल क्या है?
इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता केवल पार्टी और चुनाव चिन्ह के आधार पर मतदान करेंगे या फिर स्थानीय नेतृत्व, राजनीतिक प्रभाव और वर्षों से बने जनसंपर्क को भी महत्व देंगे। डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनाव मैदान में नहीं हैं, लेकिन पूरे चुनाव के दौरान उनकी चर्चा लगातार बनी रही है।
अब नजर 3 अगस्त पर
30 जुलाई को दतिया की जनता ईवीएम का बटन दबाएगी, लेकिन नतीजे सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं करेंगे। वे यह भी संकेत देंगे कि संगठन का निर्णय, स्थानीय नेतृत्व और जनाधार इन तीनों में किसका प्रभाव मतदाताओं पर सबसे अधिक रहा। अब सभी की नजर 3 अगस्त को आने वाले परिणामों पर टिकी है।
दतिया उपचुनाव 2026: उम्मीदवार से ज्यादा चर्चा में डॉ. नरोत्तम मिश्रा, क्या उनकी सियासी पकड़ दिलाएगी भाजपा को जीत?