पुत्रमोह में कैलाश विजयवर्गीय न खो दें राजनैतिक जमीं

 

विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण में चले जा रहे हैं राजनैतिक दांवपेंच

खबर नेशन / Khabar Nation

भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता माने जाने वाले राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र मोह के चलते राजनैतिक जमीं खिसकने के आसार बन गए हैं । गौरतलब है कि अपने बेटे आकाश विजयवर्गीय को सुरक्षित विधानसभा चुनाव क्षैत्र से उतारने के चक्कर में कैलाश और समर्थकों के बीच दूरियां पनप रही है । कुछ दूरियां जहां स्वभाविक किस्म से तो कुछ विरोधियों द्वारा पनपाई जा रही हैं

विजयवर्गीय अपने पुत्र आकाश को इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो से लड़वाना चाहते हैं । हाल फिलहाल विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 से रमेश मेंदोला विधायक हैं । रमेश मेंदोला और विजयवर्गीय के रिश्तों की प्रगाढ़ता से राजनैतिक प्रेक्षक रिश्तों का आकलन करने में असफल रहे हैं । मेंदोला विजयवर्गीय कभी दोस्त तो कभी राजनैतिक जुगलबंदी के अचरज भरे नजारे पेश करते नजर आए हैं लेकिन नेता समर्थक वाला भाव नदारद ही रहा है।
राजनैतिक हलकों में माना जा रहा है कि विजयवर्गीय चाहते हैं कि मेंदोला इंदौर तीन , राऊ या महू से लड़ लें । मेंदोला दो नम्बर से भारी बहुमत से जीते थे 
। मेंदोला को मालवा अंचल में किसी भी राजनीतिक संकट से निपटने में सिद्धहस्त माना जाता है । इसके बावजूद मेंदोला की दिली इच्छा दो नम्बर विधानसभा क्षेत्र से ही चुनाव लड़ने की है । 
यह भी कहा जा रहा है कि विजयवर्गीय इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने के मूड में नहीं है । इसकी वजह वे अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के पक्ष में है । इसलिए वे चाहते हैं कि उनकी जगह आकाश को। इंदौर दो से लड़ा दिया जाए और मेंदोला को शिफ्ट कर दिया जाए । कैलाश के राजनैतिक विरोधी पूरी ताकत के साथ इस प्रयास में लगे हैं कि आकाश को दो नम्बर से टिकट न दिया जाए । इसी बीच इंदौर दो से कैलाश विजयवर्गीय द्वारा इंदौर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हरिनारायण यादव का नाम दो नम्बर से आगे बढ़ाने का संकेत दिया गया । जो कैलाश खेमे में खलबली मचा गया। हालांकि यह कितना सच है या झूठ खुद कैलाश विजयवर्गीय का खेमा नहीं समझ पा रहा है । इसी के साथ ही इंदौर तीन से भी वर्तमान विधायक उषा ठाकुर का विरोध हो रहा है । राऊ के पूर्व विधायक जीतू जिराती भी कैलाश विजयवर्गीय के समर्थक हैं जो राऊ और कालापीपल से दावेदारी कर रहे हैं । अगर कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में अपने चार या पांच समर्थकों को टिकट नहीं दिला पाए तो यह उनकी राजनैतिक कमजोरी माना जाएगा।
 जिसके चलते कैलाश और समर्थकों के बीच दूरियां पनप रही है ।
 हालांकि अंतिम समय में कैलाश विजयवर्गीय किसी भी तरह का राजनैतिक फैसला कराने में पूरी ताक़त झोंक देते हैं। देखना दिलचस्प रहेगा कि कैलाश पुत्र मोह के साथ साथ क्या राजनैतिक जमीं और मजबूत करने में सफल होंगे या फिर जमीं कमजोर कर लेंगे।

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