A पॉलिटिकल कॉमेडी सीन भाजपा V/S कमलनाथ V/S   कांग्रेस

कमलनाथ परिवार के भाजपा में जाने को लेकर पूरे देश और प्रदेश में चर्चाओं का कोतूहल चला लेकिन फिर क्या हुआ ......हवा निकल गई....हवा किसकी निकली इस पर हम नहीं जाएंगे। मामला गंभीर और संजीदा था और है। कमलनाथ का नाम आते ही इंदिरा परिवार को भूलना शायद लाजमी नहीं होगा कारण है क्योंकि आप तीसरे पुत्र की चर्चा कर रहे हैं । प्रवेश का मामला टल गया या खत्म हो गया पर एक सवाल जरूर खड़ा कर गया। क्या राजनीतिज्ञों , कांग्रेस और भाजपा के आला नेताओं की राजनीतिक समझ शून्य है?

....खेर हम खबर का एनालिसिस कर रहे हैं, वही करते है। 

स्थिति का व्यंग्य यह है कि व्यंग्य की स्थिति बन गई 

गौरव चतुर्वेदी / खबर नेशन / Khabar Nation 

 भारतीय राजनीति में हालिया दिनों एक पॉलिटिकल कॉमेडी सीन देखने मिला। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने को लेकर जबरदस्त माहौल बन गया था,ऐसा लगा? माहौल बना या बनाया गया, पता नही ? हाल फिलहाल टल गया लेकिन भाजपा कांग्रेस के राजनीतिज्ञों की समझ को शून्य दर्शा गया।

देश में 2014 के बाद से कांग्रेस नेताओं का पलायन जबरदस्त तरीके से बढ़ गया है कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल इस बात के आरोप लगा रहे हैं कि ईडी, आई टी, सीबीआई के सहारे विपक्ष के स्थापित नेताओं को टारगेट किया जा रहा। ये आरोप सच्चाई के तौर पर भी प्रतीत हो रहे हैं। विपक्ष छोड़कर जाने वाले सभी नेता भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं। इसके अलावा भी सरकार गिराकर सरकार बनाने का खेल भी खेला जा रहा है।

इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता कमलनाथ के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की सुगबुगाहट तेजी के साथ फैल गई। कमलनाथ को भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी अपना तीसरा बेटा मानती थी। जिसके चलते कोई भी इस बात पर भरोसा नहीं कर सकता है कि कमलनाथ कांग्रेस छोड़ सकते हैं। कमलनाथ कांग्रेस में गांधी परिवार के करीबी होने के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान रखते हैं।‌ विगत लंबे समय से कमलनाथ के परिजन अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर मामले में कानूनी शिकंजे में फंसे हुए हैं। कमलनाथ स्वयं भी सिख्ख दंगों को लेकर कानूनी पेचीदगियों का सामना कर रहे हैं। इसी के साथ ही मध्यप्रदेश भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा से कमलनाथ और उनके पुत्र सांसद नकुलनाथ का वर्चस्व खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है कि कमलनाथ अपना राजनीतिक और आर्थिक साम्राज्य बचाने भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हांलांकि आधार कांग्रेस में उनकी उपेक्षा का बताया जा रहा है।

बात पॉलिटिकल समझ की

  सबसे पहली गलती कमलनाथ की अगर उन्होंने भाजपा जाने का फैसला लिया था तो उसका क्या आधार रहा। और अगर नहीं जा रहे थे तो जो खबरें सामने आ रही थी उनका खंडन करने में देरी क्यों की ? पूरे घटनाक्रम को देखने के बाद यह कहा जा सकता है कि एक परिपक्व नेता और भाजपा के आला नेताओं के बीच हुई चर्चा को समझने में कमलनाथ असफल रहे।

  दूसरी गलती भाजपा के उन आला नेताओं की रही जिन्होंने अनावश्यक तौर पर ऐसी परिस्थितियां पैदा की जिनसे भाजपा का भी उपहास उड़ना तय रहा। शार्ट टर्म में भले ही उपहास उड़ता महसूस ना हो पर भविष्य में जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रमुख रणनीतिकार गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा का आकलन किया जाएगा तो इस बिंदु पर भी विचार किया जाएगा। क्या तीनों नेता यह नहीं जानते थे कि कमलनाथ के भाजपा प्रवेश का विरोध केंद्रीय विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया करेंगे। आखिर सिंधिया कांग्रेस में अपनी उपेक्षा का प्रमुख कारण कमलनाथ को भी मानते थे। भाजपा के तीनों नेताओ को सिंधिया को विश्वास में लेना था। भले ही कमलनाथ भाजपा में नहीं आ पाए पर बाद में मैसेज यहीं गया कि सिंधिया का विरोध रहा। ऐसी स्थिति में यह सिंधिया के समक्ष आला नेताओं का मजबूर होकर फैसला टालना रहा।

तीसरी गलती कांग्रेस के आला नेताओं की रही जो परंपरागत तरीके से गलतियों का पुतला बन चुकी है। कांग्रेस ना वर्तमान और ना ही भविष्य की संभावना को लेकर विचार करने की स्थिति में है और ना ही होगी। कांग्रेस को एक बार अपनी टूट के कारणों का अध्ययन करना होगा। वो चाहे सांगठनिक तौर पर हो या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के चलते।

इस पूरे घटनाक्रम में एक सबसे बड़ी बात यही रही कि तीनों पक्षों भाजपा -कमलनाथ - कांग्रेस ने एक ऐसे अवसर को खोया जब तीनों का मान सम्मान और अपमान व्यवस्थित हो सकता था। यह अवसर था भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन का जिसका उपयोग करने से तीनों चूक गए।

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