इंदौर में पहली बार उतरी रेल से रेत

 

अब सरकार की जबाबदारी ईमानदार व्यापारियों को संरक्षण दे

इंदौर के भवन निर्माण में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण रेत मिलने की संभावना बढ़ी

ख़बर नेशन / Khabar Nation

मध्यप्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर में पहली बार रेलमार्ग से रेत लाई गई । होशंगाबाद की नर्मदा नदी के सबसे मंहगी रेत खदान खरीदने वाले आर के कंस्ट्रक्शन एंड ट्रांसपोर्ट कम्पनी लिमिटेड का रेक मांगलिया रेल्वे स्टेशन पर उतारा गया ।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में रेत का कारोबार सर्वाधिक विवादास्पद बना हुआ है । मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद रेत ठेकेदारों द्वारा लगाई गई नीलामी की बोली देखकर बरसों से जमे रेत कारोबारियो को बाहर होना पड़ा । रेत के नये व्यापारी अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में आए और उन्होंने एकाधिकार जमाएं ठेकेदारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया । एकाधिकार जमाएं ठेकेदारों ने नये रेत कारोबारियो के रास्ते में काफी परेशानी खड़ी करने की कोशिश की । कई बार रेट तोड़कर भी नये व्यापारियों को नुक्सान पहुंचाने की कोशिश की गई । होता यूं है कि रेत माफिया 10 मीटर की रायल्टी चुकाकर दुगना माल भरते थे । कभी गुण्डागर्दी तो कभी अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप डलवाकर भी परेशानियां खड़ी की गई । 
जब इंदौर में होने जा रहे इस नवप्रयोग को लेकर आर के कंस्ट्रक्शन एंड ट्रांसपोर्ट कम्पनी लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सी पी सिंह से इंदौर को मिलने वाले लाभ को लेकर बात की तो उन्होंने बताया कि इंदौर के उपभोक्ता को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण रेत मिलने के साथ साथ उचित मात्रा की रेत भी मिल पाएगी। उन्होंने बताया कि इससे सरकार को भी भरपूर रायल्टी मिलेगी ।इसी के साथ ही सड़क पर भी रेत वाहनों का भार कम होगा। श्री सिंह ने बताया कि पहली बार 2300 मीट्रिक क्यूबिक रेत उतारी गई है । जो सीधे वास्तविक उपभोक्ता तक पहुंचाई जा रही है । उन्होंने कहा कि हम शीघ्र ही डम्प यार्ड भी शुरू कर रहे हैं , जिसकी अनुमति शीघ्र ही प्राप्त हो जाएगी। भविष्य में महाराष्ट्र और सागर तक भी इसी तरीके से रेत पहुंचाने की योजना है ।

मध्यप्रदेश के खनिज विभाग में सचिव पद से सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नरेंद्र सिंह परमार ने इस प्रयोग को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि पूर्व में भी रेत माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई हैं । व्यापारियों के साथ साथ सरकार को भी अपने सहयोगात्मक कदम और तेज करना होंगे । इससे सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा और उपभोक्ता को रेत माफिया ठग नहीं पाएंगे ।

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