कैबिनेट बैठक में विकास प्राकृतिक खेती और सौर ऊर्जा पर जोर कई अहम फैसलों को मिली मंजूरी


भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।https://youtu.be/baX6rBTGgpU

बैठक में विकास, कृषि, उद्योग, सौर ऊर्जा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मंत्रिमंडल ने उन्हें बधाई देते हुए देश में गरीबी उन्मूलन, तेज विकास और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा की सराहना की।
कैबिनेट मंत्री चेतन कश्यप ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रदेशभर में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के लिए विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे।


बैठक में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष रणनीति पर चर्चा हुई। निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी जिलों में प्राकृतिक खेती विषयक कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। वहीं इंदौर में आयोजित कृषि सम्मेलन के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभ, आधुनिक कृषि तकनीकों और टिकाऊ खेती के मॉडल की जानकारी दी जाएगी।


मंत्रिमंडल को इंदौर में आयोजित भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई देशों के प्रतिनिधियों की बैठक की जानकारी भी दी गई। सरकार के अनुसार इस बैठक में निवेश और व्यापार विस्तार को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रदेश से अमेरिका सहित विभिन्न देशों को लगभग 3,800 करोड़ रुपये का निर्यात दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है।


प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘उद्योग वर्ष’ के रूप में मनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर रूफटॉप अभियान को जनआंदोलन बनाने की दिशा में कार्य तेज करने का निर्णय लिया गया। सरकार के अनुसार अब तक प्रदेश के लगभग दो लाख घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।


प्रशासनिक स्तर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए कि स्थानांतरण नीति के तहत लंबित सभी तबादलों की प्रक्रिया 15 जून तक निर्धारित समय सीमा में पूरी कर ली जाए।
बैठक में एक महत्वपूर्ण परियोजना की संशोधित लागत को भी मंजूरी दी गई। परियोजना की प्रारंभिक लागत 6,941 करोड़ रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 10,033 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस प्रकार परियोजना की लागत में लगभग 3,000 करोड़ रुपये की वृद्धि को कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई।



 

Share:


Related Articles


Leave a Comment