मंत्रालय , चुनाव आयोग और प्रशासनिक मशीनरी परेशान
फर्जी शिकायतों से अधिकारियों के राजनैतिक कनेक्शन जोड़ते हुए हटवाने की कवायद
खबर नेशन । Khabar Nation
मध्यप्रदेश के 28 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव मध्यप्रदेश के मंत्रालय, चुनाव आयोग और प्रशासनिक मशीनरी को परेशान किए हुए हैं । वजह है शिकायतों का अंबार ।
शिकायतकर्ताओं को हमेशा चुनाव का इंतजार रहता है । इस दौरान चुनाव आयोग को की जाने वाली शिकायतें मुस्तैदी के साथ निपटाई जाती हैं । वजह है कौन अफसर या कर्मचारी चुनाव आयोग के कोपभाजन का शिकार बने । शिकायतकर्ता चुनाव आयोग में शिकायत करते ही टेबल टू टेबल जानकारी संग्रहित करने में जुट जाता है । प्रशासनिक वजह से अगर किसी टेबल पर चुनाव आयोग द्वारा भेजी गई शिकायत की गति धीमी पड़ी तो शिकायतकर्ता तत्काल संबंधित टेबल के शासकीय अफसर और कर्मचारी के खिलाफ एक नई शिकायत चुनाव आयोग को ठोक देता है ।
आयोग को पहुंचने वाली शिकायतों में अनेकों ऐसी शिकायत होती है जिनका चुनाव से या चुनाव आयोग से कोई संबंध नहीं होता है । बस किसी अधिकारी और कर्मचारी का कोई सहयोगी दुश्मन इस मौके का फायदा उठाकर अपने विरोधी की सीट कब्जानें के प्रयास में जुट जाता है ।
इन दिनों भी मध्यप्रदेश में चुनाव आयोग के दफ्तर की शिकायत शाखा में शिकायतों का अंबार लगना शुरू हो गया है । उपचुनाव मध्यप्रदेश के 18 ज़िलों में 28 सीटों पर होने जा रहे हैं । शिकायतें जिन जिलों में चुनाव नहीं हैं वहां पर पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों की भी की जा रही हैं । जिन जिलों में विधानसभा उपचुनाव होना हैं वे हैं मुरैना, भिण्ड,ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, दतिया, राजगढ़, अशोकनगर, सागर, छतरपुर, रायसेन, इंदौर, देवास,धार, मंदसौर ,आगर, अनुपपुर। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार संपूर्ण प्रदेश से शिकायतें आ रही हैं। शिकायतों में फर्जी राजनैतिक कनेक्शन , भ्रष्टाचार के झूठे मामले , राजनैतिक दल और प्रत्याशियों को चंदा देने की शिकायतों की तादाद ज्यादा है । चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार हमेशा ऐसी शिकायतों का अंत कुछ नहीं होता है लेकिन इस सब के चलते प्रशासनिक तंत्र परेशान रहता है।
चुनाव आयोग से संबंधित मामलों की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यप्रदेश में इन शिकायतों की आड़ में अधिकारियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को डराया जाता है व झूठी शिकायतों के एवज में अवैधानिक आर्थिक वसूली की जाती है । जिसमें ब्लैकमेलर टाइप के आर टी आई एक्टविस्ट और फर्जी पत्रकारों की संख्या ज्यादा है ।