NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले बड़ा एक्शन: Telegram पर अस्थायी रोक, फर्जी पेपर लीक गैंग पर सरकार की सख्ती

कैरियर Jun 16, 2026

NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। NTA के मुताबिक कुछ संगठित गिरोह Telegram चैनलों के जरिए छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर रहे थे। ऐसे चैनलों पर दावा किया जाता था कि उनके पास परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से मौजूद है, जबकि जांच में कई दावे भ्रामक पाए गए।

परीक्षा एजेंसी का कहना है कि छात्रों की मेहनत और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बचाने के लिए यह कदम जरूरी था। इसी वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सीमित अवधि के लिए Telegram की पहुंच पर रोक लगाने का निर्णय लिया।

Telegram बैन और फर्जी पेपर लीक का खेल

जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ Telegram चैनल "पेपर लीक" के नाम पर छात्रों से मोटी रकम वसूल रहे थे। कई मामलों में परीक्षा खत्म होने के बाद पुराने मैसेज को एडिट करके उसमें असली प्रश्नपत्र जोड़ दिया जाता था। क्योंकि मैसेज का पुराना समय दिखाई देता था, इसलिए ऐसा लगता था कि पेपर परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था। यही तरीका सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने का बड़ा कारण बना।

NTA का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां केवल छात्रों को धोखा नहीं देतीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि NEET UG 2026 का प्रश्नपत्र पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और परीक्षा से पहले किसी भी व्यक्ति के पास इसकी पहुंच नहीं है। छात्रों को केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।

 NEET UG 2026 री-एग्जाम में शामिल होने वाले छात्रों के लिए जरूरी सलाह

21 जून को होने वाले री-एग्जाम में लाखों उम्मीदवार शामिल होंगे। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर आने वाली हर जानकारी को सही मान लेना खतरनाक हो सकता है। कई साइबर ठग परीक्षा के दबाव का फायदा उठाकर छात्रों को आसान सफलता का लालच देते हैं और उनसे पैसे ऐंठ लेते हैं। 

NTA ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी पेपर लीक, गारंटी चयन या विशेष प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने वाले दावों से सावधान रहें। परीक्षा से जुड़ी हर आधिकारिक सूचना केवल NTA की वेबसाइट और सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट्स से ही प्राप्त करें। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आगे भी जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। 

सरकार का यह फैसला केवल एक ऐप पर कार्रवाई नहीं, बल्कि उन नेटवर्क्स के खिलाफ संदेश माना जा रहा है जो छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियां ऐसे चैनलों और उनसे जुड़े लोगों पर भी नजर बनाए रखेंगी।

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