भोपाल का चुनाव एक राष्ट्रीय बहस बन चुका है: दिग्विजयसिंह

राजनीति Apr 19, 2019

देश किस रास्ते पर जायेगा, यह निर्णय भोपाल वालों को करना है

मोदी किसी के सगे नहीं हैं, वे अपने लिये कुछ भी कर सकते हैं

दिग्विजयसिंह बुद्धिजीवी, लेखकों और कलाकारों के बीच 

खबरनेशन/Khabarnation  

भोपाल, भोपाल लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजयसिंह आज बुद्धिजीवियों, कलाकारों और लेखकों के बीच थे। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मोदी वह व्यक्ति हैं जो किसी के सगे नहीं हैं और अपने लिये कुछ भी कर सकते है। वह एक आडियालाॅजी यानीं विचारधारा से पोषित हैं। हमारी लड़ाई इसी विचारधारा से है जो कभी खत्म नहीं होगी। भोपाल का चुनाव एक राष्ट्रीय बहस के रूप में बन गया है। देश आगे किस रास्ते पर जायेगा यह निर्णय अब भोपाल के लोगों को करना है। 

सिंह ने कहा कि कार्ल मार्कस् ने कहा था कि धर्म अफीम की तरह है। गांधी जी ने इस बात को सिरे से नकार दिया था। उन्होंने कहा था कि धर्म व्यक्तिगत है और इस पर हमले से बचने के लिये मैं मरने तक लडूंगा। दिग्विजयसिंह ने कहा कि लेकिन इस देश का मिजाज कम्यूनल नहीं है। यहां के लोग धर्मान्ध या कट्टरपंथी नहीं है। वे लोग अपनी बात खुल कर नहीं कह सकते, क्योंकि उन्हें राष्ट्रद्रोही जैसी गालियां खाना पड़ेंगी। उन्होंने कहा कि जितने लोग भी आज यहां बैठे हैं, उनके विचार जानकर लगा कि कोई भी मोदी के पक्ष में नहीं है। 

दिग्विजयसिंह ने कहा कि मुझे इस बात का दुख है कि इस देश के नौजवानों के मन में इंटरनेट, सोशल मीडिया और वाट्सएप के माध्यम से इतना जहर भर दिया गया है कि उसे निकालना आसान नहीं है। इस समस्या का समाधान न कर पाने के लिये हम सभी दोषी हैं। मोदी 2007 से एप्को वल्र्ड एप से जुडे़ हैं, वे उसके क्लाइंट हैं। इसने सोशल मीडिया का उपयोग करके अनेक देशों में तानाशाह तैयार किये हैं। इनके पास इतनी धन संपत्ति हो गयी है कि उनके पास कुछ भी कर सकने की ताकत है और वे कुछ भी कर रहे हैं। मैं 2011 में फेसबुक पर आया। जब मैंने इस पर अपनी बात कहने की शुरूआत की तो मुझे भी फेस करना पड़ा। जिनसे मैं विचारधारा की लड़ाई लड़ रहा हूं, उस लड़ाई को मुझे लाॅजिकल एंड तक ले जाना है। यह बात मेरे से सहमत सभी कोे सोचना है। यदि पीछे हट गये तो देश का कोई भविष्य नहीं बचेगा।

सिंह ने कहा जो सोशल मीडिया में गाली खाने से डरे वह उसमें न जाये। मैं उनकी बात पढ़ता ही नहीं, कौन दिमाग खराब करे। मुझे जो कहना है वह तो कहूंगा। उन्होंने कहा कि फेक न्यूज एक कला है। फेक न्यूज के आधार पर मोदी जी विश्व में अपना ढिंढ़ोरा पीटते हैं। वाट्सएप युनिवर्सिटी हिंसा, फरेब, झूठ और नफरत कूट-कूट कर लोगों में भर रही हैं। खासकर नौजवान ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। मैं अपना चुनाव लोअर बजट और हाइयेस्ट टेक्नालाॅजी के माध्यम से लडूंगा। आपके मिलने जुलने वाले जो लोग भी हैं, उनके टेलीफोन नंबर, नाम, एड्रेस मुझे दे दें। मेरे पास वर्तमान में पांच लाख डाटा एकत्र हैं। लड़ाई गंभीर है। आपसे आग्रह है कि हर तरह से तैयार रहते हुए अपनी तरह से कांगे्रस के पक्ष में माहौल बनायें।

लज्जाशंकर हरदेनिया, रामप्रकाश त्रिपाठी, धु्रव शुक्ला, विजय बहादुर सिंह, राकेश दीक्षित, भूपेन्द्र गुप्ता, विनय द्विवेदी, राकेश वाती, मोहित शिवानी, महेन्द्र दुबे, आशा मिश्रा सहित अन्य आमंत्रितों ने भी अपनी बात रखी। लोगों ने कहा कि सामाजिक समरसता को खत्म करने के लिये भेापाल से भाजपा प्रत्याशी उतारा गया है। संविधान को बचाने का सवाल है। हम अशांत भोपाल नहीं चाहते। एक दल जनता पर आक्रमण कर रहा है। चुनाव तो जनता का मत लेने का सद्भावपूर्ण उपाय है। हिन्दू मुसलमान एक हजार साल से साथ हैं, उन्हें सिखाने की जरूरत नहीं। झूठ, फरेब और नफरत की फेक्ट्री को सभी जानते हैं। आज सुरक्षा का मुद्दा सबसे बड़ा है। यदि भोपाल जीतते हैं तो फिर भाजपा की सरकार देश में नहीं आयेगी। जो भोपाल की चार गलियों के नाम नहीं जानता वह भोपाल से चुनाव लड़ने आया है। सेक्यूलरिज्म पर कांगे्रस की आस्था पर कभी शक नहीं किया गया। आरएसएस चित्र की एक अवस्था है। जहरीली विचारधारा के प्रतिनिधित्व से समाज के टूटने की आशंका बनी रहती है। युवा वर्ग रोजगार केा लेकर बौखलाया हुआ है। आश्चर्य है कि जहां समतावादी समाज के पैरोकार पैदा हुए वहां मोदी कैसे प्रधानमंत्री बन गये। धर्मिकता और धर्मनिरपेक्षता में अंतर है। एक विरोधाभास भी है कि साध्वी तेज तर्रार कैसे हो सकती हैं?

इस आयोजन के सूत्रधार प्रदेश कांग्रेस के विचार-विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता थे। उन्होंने कहा कि बौद्धिक स्पंदन करने वाला समाज आज हमारे आग्रह पर कृपापूर्वक यहां उपस्थित हुआ है। यहां ऐसे कलाकार भी आये हैं जो झुग्गी झोपड़ी में रहकर अपनी सृजनात्मक यात्रा जारी रखे हुए हैं और कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। लोक कलाकार कलावती श्याम और आनंद श्याम ने आदिवासी कलाकृति दिग्विजयसिंह को भेंट की।

इस अवसर पर सुरेश पचैरी, चंद्रप्रभाष शेखर, पी.सी. शर्मा, गोविंद गोयल, रामेश्वर नीखरा, विपिन वानखेडे़ सहित कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी उपस्थित थे।

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