मध्यप्रदेश के मुरैना से भी गहरा नाता रहा अमर सिंह का

शख्सियत Aug 02, 2020


जब माधवराव सिंधिया को कहां महाराज और लगा था माधव महाराज का बड़ा ठहाका
मतदाता सूची में था नाम दर्ज भिंड़ से लड़ सकते थे लोकसभा चुनाव
सिंधिया घराने के नजदीकी मनोज पाल सिंह के संस्मरण
खबर नेशन / Khabar Nation

राजनीति कारपोरेट और फिल्म जगत की कड़ी के तौर पर शिखर पर स्थापित रहे अमर सिंह का मध्यप्रदेश से भी बड़ा नाता रहा है । राजनीति के शुरुआती दिनों में अमर सिंह मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के वोटर भी रहे हैं । सिंधिया खेमे से जुड़े मुरैना के मनोज पाल सिंह का निवास अमर सिंह और उनकी पत्नी का स्थानीय पता हुआ करता था । मनोज पाल सिंह के यादों के संस्मरण से....।
जब अमर सिंह मध्यप्रदेश में पहली बार मुरैना आए तो उनके साथ रहने की जबाबदारी उस समय के एन एस यू आइ के शहर अध्यक्ष मनोज पाल सिंह को सिंधिया ने सौंप दी । अमर सिंह को एक सामान्य आदमी के तौर पर मनोज पाल दिन भर उनकी मिजाजपुर्सी करते रहे । दिन भर साथ रहने और अमर सिंह द्वारा आपस में बातचीत के दौरान बार बार सिंधिया सिंधिया बोलना मनोज को अखरने लगा तो उन्होंने सलाह दे डाली कि यहां पर जनता और कार्यकर्ताओं के सामने सिंधिया सिंधिया मत करना वरना लोग बुरा मान जाते हैं । शाम को एक सभा के दौरान जब माधवराव सिंधिया अमर सिंह को देखकर आत्मीयता और उत्साह के साथ गले लगे तो अमर सिंह के मुख से महाराज शब्द निकल गया । माधव महाराज सबके सामने ठहाका लगाकर हंस पड़े । तब माधव महाराज के पास इस तरह से बहुत ही कम लोग मिला करते थे और वजह थी अपने राजा के प्रति सम्मान । अमर सिंह को मनोज की साफगोई भा गई और उन्होंने सिंधिया को यह बात बता दी । दूसरे दिन सिंधिया ने अमर सिंह और मनोज पाल का स्थायी रिश्ता गांठ दिया । मनोज बताते हैं कि अमर सिंह का नाम उस वक्त भिंड लोकसभा के लिए प्रत्याशी बतौर तय भी हो गया था , लेकिन अमर सिंह मुलायम सिंह यादव के साथ जुड़ गए । 

मनोज पाल सिंह की फेसबुक वॉल से..... साभार
अमर सिंह जी ने   :- बड़े महाराज श्री मंत माधव सिंधिया जी के साथ सक्रिय  राजनैतिक जीवन की शुरुआत की थी मेरा जुडाव बड़े महाराज की वजह से अमर सिंह जी से 1989 में मुरैना लोकसभा चुनाव में हुआ था अमर सिंह जी बेबाक-अंदाज के लिए पहचाने जाते थे मेने उसके साथ रह कर देखा था वो हर व्यक्ति की मदद करते थे 
जब बड़े महाराज साहब के  विकास कांग्रेस से चुनाव जीतने के बाद उन्होंने ने बड़े महाराज साहब से उत्तर प्रदेश से राजनीति करने की मंशा जाहिर की थी उसके बाद वो समाजवादी पार्टी से जुड़े ओर राजनीति के हर मुकाम को छुआ उनका असमय जाना मेरे लिए व्यक्तिगत छति है 
   मेने मुलायम सिंह जी ओर उनकी दोस्ती को भी बहुत नजदीक से देखा था वास्तव में दो जिस्म एक जान थे 
मुलायम सिंह यादव ने एक बार कहा था कि हम 'दो जिस्‍म एक जान' हैं. दूसरा जिस्म यानी अमर सिंह. एक वक्‍त था जब अमर सिंह मुलायम के बाद सबसे ताकतवर आदमी थे. पार्टी और सरकार में उनकी तूती बोलती थी. गुलजार साहब का वो गाना उन पर बिल्‍कुल ठीक बैठता था कि 'जहां तेरे कदमों के कंवल खिला करते थे... हंसी तेरी सुन-सुन के फसल पका करती थी.' वाकई उस वक्‍त समाजवाद की फसलें उनकी हंसी सुन-सुन के ही पकती थीं.

अमर सिंह मुलायम के लिए सियासी से लेकर घरेलू काम तक करते थे.  अखिलेश यादव को एडमिशन कराने ऑस्‍ट्रेलिया लेकर जाने वाले अमर सिंह ही थे. उनकी शादी का दिल्‍ली और लखनऊ में रिसेप्‍शन भी उन्‍होंने ही कराया था. अखिलेश के रिसेप्‍शन में अमिताभ बच्‍चन 'दीवार' फिल्‍म के डायलॉग सुनाकर लोगों का मनोरंजन कर रहे थे. कहते हैं कि वो भी अमर सिंह के बुलावे पर ही आए थे.यही नहीं अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्य राय का विवाह भी अमर सिंह के चलते ही सम्भव हो पाया था .

अमर सिंह, मुलायम सिंह के लिए बहुत तरह के काम करते रहे . देसी समाजवादियों के बीच वो ग्‍लैमर लेकर आए. समाजवादी पार्टी और पार्टी के कार्यक्रमों में बॉलीवुड सितारों को लेकर आने वाले वही थे. बॉलीवुड का कोई ऐसा बड़ा स्‍टार नहीं होगा जिसे वो मुलायम के गांव में होने वाले सैफई उत्‍सव में ना ले गए हों. एक वक्‍त था जब वो अमिताभ बच्‍चन के साथ साये की तरह रहते थे. अमिताभ बच्‍चन से उन्‍होंने मुलायम सरकार के विज्ञापन करवाए जिसमें एक विज्ञापन बहुत मशहूर हुआ कि 'यूपी में है दम क्‍योंकि अपराध है यहां कम.'

यही नहीं, अमर सिंह बड़े कॉरपोरेट घरानों और मुलायम सिंह के बीच पुल का काम करते थे. राष्‍ट्रीय स्‍तर पर किसी भी पार्टी के किसी भी बड़े नेता से मुलायम के लिए वही डील करते थे. वो इतना कुछ मुलायम के लिए करते थे कि मुलायम को लगता था कि अमर सिंह की हस्‍ती उनसे ज्‍यादा बड़ी है. एक बार कुछ न्‍यूज चैनल के पत्रकारों से नाराज मुलायम ने कहा था कि, 'तुम लोग क्‍या समझते हो... मैं अभी दिल्‍ली जा रहा हूं, अगर अमर सिंह कह देंगे तो एक दर्जन टीवी वाले मुझसे बात करने एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे.' 

यह अमर सिंह की प्रवंधन कला ही थी कि जो उन्होंने मनमोहन सिंह की डूब रही UPA1 सरकार बचा ली. संकटमोचन अमर सिंह एक साथ कांग्रेस को संकट से उबारते रहे वही अम्बानी बंधुओं के बीच छिडी जंग में पंच की भूमिका में प्रधान मंत्री को लाने का कौशल भी उन्होंने ही दिखाया.बड़े से बड़ा आईएएस हो या कोई भी बड़ा बिजनस प्रमुख सब अमर सिंह के यंहा हाजिरी बजाते थे. अमर सिंह की हैसियत को कई लोग कोसते थे लेकिन उन्हें सियासत में इस एथिक्स को समझाना चाहिये कि राजनीती में कोई किसी का दोस्त और किसीका दुश्मन नही होता . यही अमर सिंह का मूल मंत्र था. यानि सत्ता के खेल में पूंजी की भूमिका को नजरंदाज नही किया जा सकता . 

ऐसा नही है कि सत्ता के खेल में कारपोरेट कि भूमिका पहले नही रही है , लेकिन अमर सिंह ने इसे एक संस्था का रूप दिया है. लोकतंत्र में अमर सिंह के बारे में यह यह पूछा जा सकता है कि जिसने आज तक कोई चुनाव नहीं लड़ा वो आम लोगों के नेतृत्व कि बात कैसे कर सकता है . लेकिन आज कोई भी पार्टी इन पी आर लीडर के बगैर चल नहीं सकती . बी जे पी के अरुण जेटली कभी चुनाव नहीं लड़ा , लेकिन सरकार मध्य प्रदेश में आए या गुजरात में आए या कर्नाटका मे श्रेय अरुण जेटली को दिया जाता रहा . राजीव शुक्ला साप्ताहिक स्तम्भ लिखकर या टीवी चैनल चला कांग्रेस के जनाधार बढ़ाने का दावा करते थे.  ठीक इसी तर्ज पर प्रेमचंद गुप्ता लालू प्रसाद यादव को कारपोरेट संस्कृति में ढालते रहे. लेकिन इन सबके ऊपर अमर सिंह ही रहे.

अम्बानी से लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक को जिसने उपकृत किया हो , वो निश्चित रूप से इस देश का सबसे बड़ा पी आर लीडर कहा जाना चाहिए. अमर सिंह निश्चित रूप से इस देश के सबसे विवादास्पद और सबसे बड़े पी आर राजनीतिज्ञ रहे.

उन्ही समाजवादी पार्टी (एसपी) के पूर्व नेता अमर सिंह  64 साल की उम्र में अब से कुछ देर पूर्व निधन हो गया है. किडनी की बीमारी के चलते सिंगापुर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. इसी साल फरवरी में उन्होंने अमिताभ बच्चन से माफी भी मांगी थी. उस वक्त वे अस्पताल में ही थे.

अमर सिंह जी की पुनीत आत्मा को शत शत नमन. विनम्र श्रद्धांजलि.

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