शिकायत करने की सजा या अतिक्रमणकारियों को संरक्षण? सीधी में प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग करने वाले व्यक्ति की ही फसल जब्त करने का आरोप
सीधी जिले के चुरहट तहसील क्षेत्र के ग्राम भेलकी में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिकायतकर्ता रामसिया पाण्डेय ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि शासकीय जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग करने के बावजूद कार्रवाई अतिक्रमणकारियों पर नहीं हुई, बल्कि उनकी पैतृक और पट्टे की भूमि पर ही प्रशासनिक कार्रवाई कर दी गई।
5 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जे का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम भेलकी में करीब 5 एकड़ शासकीय भूमि पर लंबे समय से कथित अतिक्रमण किया गया है। इस मामले में राजस्व न्यायालय से बेदखली का आदेश भी जारी हो चुका है। दस्तावेजों के मुताबिक तत्कालीन तहसीलदार ने 18 नवंबर 2025 को कथित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली आदेश जारी करते हुए 5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया था।
इसके बाद कलेक्टर न्यायालय ने भी आदेश का पालन कर 30 अप्रैल 2026 तक पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि अब तक शासकीय भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गए।
अतिक्रमण हटाने के बजाय शिकायतकर्ता पर कार्रवाई का आरोप
रामसिया पाण्डेय का आरोप है कि कथित अतिक्रमणकारियों ने शासकीय भूमि पर फसल भी बो दी, लेकिन प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत कर अतिक्रमण हटाने की मांग की।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उन्होंने उच्च अधिकारियों तक मामला पहुंचाया तो इसके बाद उनकी ही भूमि को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी गई। आरोप है कि एसडीएम न्यायालय से उनकी वैध पैतृक एवं पट्टे की भूमि पर स्थगन आदेश जारी किया गया और इसके बाद प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में गेहूं की फसल कटवाकर जब्त कर ली गई।
आवेदन की पावती नहीं देने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 6 जुलाई 2026 को जब उन्होंने तहसीलदार चुरहट को दोबारा आवेदन देने की कोशिश की, तो उन्हें आवेदन की पावती तक नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शासकीय भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और कोई विवाद की स्थिति बनती है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
पूरे मामले में अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर प्रशासन शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में कार्रवाई कर रहा है या शिकायतकर्ता पर ही दबाव बनाया जा रहा है। फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि इस विवाद पर जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है।
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