महिला कांग्रेस करेगी आदिवासी हॉस्टल का ऑडिट, जनता के समक्ष रखेगी रिपोर्ट
खबर नेशन / Khabar Nation
शिवराज सरकार के राज में आदिवासी लड़कियों के हॉस्टल में न शौचालय, न पीने का पानी, सुरक्षा को भी खतरा....
भोपाल: मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती विभा पटेल ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि शिवराज सरकार अनुसूचित जन जाति वर्ग की हिमायत में बढ़ चढ़कर दावे करती है, लेकिन उसके राज में ही आदिवासी लड़कियों के हॉस्टलों की बदतर स्थिति है। ताजा उदाहरण अलीराजपुर का है। यहां रह रही आदिवासी छात्राओं को पीने के लिए दो किमी दूर से पानी लाना पड़ता है। हॉस्टल और कमरों की हालत भी नर्क जैसी है। हॉस्टल के भीतर स्नानागार नहीं होने से उन्हें खुले में एक चादर के भरोसे नहाना पड़ता है। शौचालय की हालत भी बहुत बुरी है। ये स्थिति अकेले अलीराजपुर की नहीं बल्कि अन्य जिलों में स्थित आदिवासी कन्या छात्रावासों की है।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि आदिवासियों के हक में ढोल पीटने वाली शिवराज सरकार के कार्यकाल में अधिकांश आदिवासी लड़कियों के हॉस्टलों की हालत स्वच्छ भारत निर्माण के स्लोगन की खिल्ली उड़ाती दिखाई देगी। ये कार्यक्रम भारत सरकार का है। इसके बाद भी आदिवासी हॉस्टल भवनों में नियमित रूप से न तो सफाई होती है और न ही हाईजनिक किचन है। यहां परोसे जाने वाले भोजन की क्वालिटी भी निम्न स्तरीय है। तय मीनू के तहत भोजन वितरित नहीं किया जाता है।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि कई स्थानों में शौचालय नाम मात्र के है। इनकी अवस्था काफी जीर्ण-शीर्ण हैं। कई जिलों में तय संख्या से अधिक लड़कियों को हॉस्टल में रखा गया है। हॉस्टल की लड़कियों के उपयोग के लिए खरीदे गए टीवी अफसरों के घरों में है। सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे है। चौकीदार भी नहीं है। हॉस्टल के चारों तरफ न बाउंड्रीवाल है और न ही गेट पर रोक-टोक के लिए सुरक्षा कर्मी। सुरक्षा के लिए जरुरी प्रबंध नहीं होने से आए दिन आदिवासी लड़कियो की साइकिल चोरी के समाचार भी सुनने को मिलते हैं। पर्याप्त संख्या में हॉस्टल सुरक्षा, भवन देखरेख आदि के लिए हॉस्टलों में अमला नहीं है। कुछ स्थानों पर प्रभारी वार्डन की व्यवस्था जरुर है। लेकिन ये अस्थायी है। फर्नीचर की तो बहुत बुरी हालत है। कुछ हॉस्टल भवन में लंबे समय से पुताई नहीं हुई और न ही कक्षों की मरम्मत कराई गई है। नतीजे में दीवारों में दरारें आने की शिकायतें सुनने को मिली हैं।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि कहने का आशय ये है कि सरकार आदिवासी वर्ग की न हितैषी है और न ही हितचिंतक है। समय-समय पर विभिन्न जन संगठनों की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि आदिवासियों के नाम पर बजट होने के बाद भी न तो इसका सही तरीके से उपयोग हुआ। अब महिला कांग्रेस ने तय किया है कि वे आदिवासी लड़कियों के हॉस्टल के नाम पर होने वाले खर्च का ऑडिट कराकर जनता के सामने रखेगी ताकि लोगों को सरकार के नकली आदिवासी प्रेम की जानकारी मिल सके।
लिखें और कमाएं
मध्यप्रदेश के पत्रकारों को खुला आमंत्रण । आपके बेबाक और निष्पक्ष समाचार जितने पढ़ें जाएंगे उतना ही आपको भुगतान किया जाएगा । 1,500 से 10,000 रुपए तक हर माह कमा सकते हैं । अगर आप इस आत्मनिर्भर योजना के साथ जुड़ना चाहते हैं तो संपर्क करें:
गौरव चतुर्वेदी
खबर नेशन
9009155999