CBSE ऑन स्क्रीन मार्किंग विवाद पर बोले धर्मेंद्र प्रधान, कहा- ‘बच्चों को राहत देना हमारी जिम्मेदारी’

कैरियर May 29, 2026

देश की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह बनी है CBSE की नई ऑन स्क्रीन मार्किंग तकनीक, जिसे कॉपियों की जांच के लिए लागू किया गया था। कई छात्रों और शिक्षकों ने दावा किया कि पोर्टल पर तकनीकी समस्याएं सामने आईं, जिसकी वजह से रिजल्ट और री-चेकिंग प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बनी। सोशल मीडिया पर भी छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर की और कई सवाल उठाए। इसी बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सामने आकर इस पूरे मामले पर जवाब दिया।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंता को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने साफ कहा कि “मैं खुद को जवाबदेह मानता हूं और बच्चों को राहत देना हमारी जिम्मेदारी है।” मंत्री के मुताबिक नई तकनीक लागू करना जरूरी था ताकि कॉपी जांचने की प्रक्रिया को ज्यादा तेज और पारदर्शी बनाया जा सके। हालांकि शुरुआत में कुछ तकनीकी परेशानियां जरूर सामने आईं, लेकिन अब उन्हें दूर करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि IIT की टीम और PSU बैंक की मदद से नया पोर्टल तैयार किया जा रहा है।

CBSE ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में क्या आई दिक्कतें?

इस साल CBSE ने पहली बार बड़े स्तर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया। इस तकनीक के तहत कॉपियों को डिजिटल तरीके से जांचा जाना था, ताकि रिजल्ट जल्दी तैयार हो सके और मानवीय गलतियों को कम किया जा सके। लेकिन कई छात्रों और शिक्षकों ने शिकायत की कि पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा था और नंबरों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी। कुछ छात्रों ने री-चेकिंग और उत्तर पुस्तिका देखने की प्रक्रिया में भी तकनीकी अड़चनों की बात कही।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि कुल 17 लाख छात्रों में से करीब 4 लाख छात्रों ने री-चेकिंग या शिकायत के लिए आवेदन किया। उन्होंने कहा कि हर साल कुछ संख्या में छात्र री-चेकिंग के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन इस बार नई तकनीक की वजह से ज्यादा चर्चा हुई। सरकार अब ऐसा नया पोर्टल तैयार कर रही है, जहां छात्र सीधे अपने सवाल और शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इससे छात्रों को बार-बार स्कूल या बोर्ड दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन शुरुआत में मजबूत तकनीकी सपोर्ट जरूरी होता है। अगर पोर्टल और सर्वर सही तरीके से काम न करें, तो छात्रों का भरोसा टूट सकता है। यही वजह है कि सरकार अब सिस्टम को और मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है।

NEET पेपर लीक रोकने के लिए सरकार का बड़ा प्लान

CBSE विवाद के साथ-साथ NEET परीक्षा को लेकर भी सरकार अलर्ट मोड में दिखाई दे रही है। पिछले कुछ समय में पेपर लीक और परीक्षा सुरक्षा को लेकर कई बड़े सवाल उठे थे। अब शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने के लिए नई रणनीति तैयार की है। धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए एयरफोर्स और कई सरकारी एजेंसियों की मदद ली जाएगी।

सरकार का फोकस इस बार परीक्षा सेंटर से लेकर पेपर ट्रांसपोर्ट तक हर स्तर पर निगरानी बढ़ाने पर है। बताया जा रहा है कि हाई सिक्योरिटी सिस्टम और डिजिटल ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को समय रहते पकड़ा जा सके। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि छात्रों का भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी है और इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना होगा।

वहीं छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखना चाहिए। पिछले कुछ सालों में लगातार सामने आए विवादों ने छात्रों का मानसिक दबाव बढ़ाया है। ऐसे में सरकार के नए कदम कितने असरदार साबित होंगे, यह आने वाले परीक्षा सत्र में साफ हो जाएगा। फिलहाल शिक्षा मंत्री का बयान इस बात का संकेत जरूर देता है कि सरकार अब शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ती नाराजगी को गंभीरता से ले रही है।

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