दतिया उपचुनाव का ऐलान, 30 जुलाई को होगा मतदान; BJP-कांग्रेस ने तेज की तैयारियां
भोपाल। भारत निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही दतिया का सियासी पारा चढ़ गया है। राजनीतिक दलों ने रणनीति बनाना शुरू कर दिया है और अब सबसे ज्यादा नजर भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों पर टिकी है।
जानिए पूरा चुनाव कार्यक्रम
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 6 जुलाई को चुनाव अधिसूचना जारी होगी। 13 जुलाई तक उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 16 जुलाई तक नाम वापस लेने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा। इसके बाद 3 अगस्त को मतगणना होगी और 4 अगस्त तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।
क्यों हो रहा है उपचुनाव?
दतिया विधानसभा सीट विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद रिक्त हुई है। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी और बैंक रिकॉर्ड में जालसाजी के मामले में तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।
यह मामला वर्ष 1998 से 2011 के बीच एक सहकारी बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट से कथित रूप से अवैध ब्याज लाभ लेने के लिए बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर से जुड़ा था। अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का दोषी ठहराया।
इस वजह से गई विधानसभा सदस्यता
राजेंद्र भारती को तीन वर्ष की सजा होने के कारण उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 8(3) के तहत दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है और उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है। इसी प्रावधान के तहत दतिया विधानसभा सीट रिक्त घोषित की गई।
भाजपा की रणनीति पर टिकी नजर
उपचुनाव की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा की रणनीति को लेकर हो रही है। राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी एक बार फिर पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा जताएगी या स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए किसी नए चेहरे को मैदान में उतारेगी।
यदि भाजपा नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार बनाती है तो इसे उनकी राजनीतिक वापसी के रूप में देखा जाएगा। वहीं किसी नए चेहरे को मौका मिलने पर इसे पार्टी की नई चुनावी रणनीति माना जा सकता है।
कांग्रेस भी देख रही बड़ा मौका
दूसरी ओर कांग्रेस भी इस उपचुनाव को भाजपा के खिलाफ राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है। पार्टी की कोशिश रहेगी कि भाजपा के उम्मीदवार चयन और स्थानीय स्तर पर संभावित गुटबाजी जैसे मुद्दों को चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठाया जाए।
सिर्फ उपचुनाव नहीं, कई नेताओं की साख दांव पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया का यह उपचुनाव केवल एक रिक्त सीट भरने तक सीमित नहीं रहेगा। यह चुनाव भाजपा की आंतरिक रणनीति, पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक वापसी की संभावनाओं और कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें दोनों प्रमुख दलों द्वारा उम्मीदवारों के ऐलान पर टिकी हैं।