मोदी का नाम लेने पर हटाया गया पुण्य प्रसून वाजपेयी को

एक विचार Aug 07, 2018

खबरनेशन/Khabrnation  पुण्य प्रसून वाजपेयी जिन्होंने हाल ही में एबीपी न्युज चैनल से इस्तीफा दिया है ने बताया है कि उन को यह कहा गया था कि वो अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम ना लिये करे।

द वायर पोर्टल में एक लेख में आज वाजपेयी ने कहा कि उन को इस तरह की बात चैनल के प्रोपराइटर जो एडिटर इन चीफ भी ने 14 जुलाई को कही थी।उन्होंने कहा कि यूं तो इस निर्देश को देने के पहले खासी लंबी बातचीत खबरो को दिखाने , उसके असर और चैनल को लेकर बदलती  धारणआें के साथ हो रहे लाभ पर भी हुई।

वाजपेयी ने लिखा है कि एडिटर इन चीफ ने यह भी माना कि उन के कार्यक्रम मास्टर स्टोक के कारण चैनल की साख बढी है।उन के अनुसार अपने चार साल से कुछ ज्यादा के कार्यकाल में भाजपा सरकार ने 106 योजानाअोंं का ऐलान किया है और संयोग से हर योजना का ऐलान खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ही किया है।वाजपेयी ने कहा कि 200 लोगो की एक टीम न्युज चैनलो की मानॅनिटरिंग करती है और यह टीम सूचना और प्रसारण मंत्रालय और पीएमओ को अपनी रिपोर्ट देती है।उन्हांने लिखा है कि नौ जुलाई को इस टीम के एक ष्षख्स ने उन को फोन कर के बताया कि उन के मास्टर स्टोक कार्यक्रम से सरकार में हडकंप मचा हुआ है वाजपेयी के अनुसार उन्हांंने इस याख्स से पूछा कि क्या आप को नौकरी का खतरा नहीं है जो से सारी जानकारी आप मुझे दे रहे है।जवाब में इस शक्स ने बताया की उन की टीम के सदस्यां की भर्ती ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड करती है और छह महीने का कॉन्टैक्ट होता है। मॉनिटरिंग करने वाले को 28,635 रूपये मिलते हैं ,सीनियर मॉनिटरिंग करने वाले को 37, 350 रूपये मिलते हैं और कंटेंट पर नजर रखने वाले को 49,500 रूपये मिलते हैं। इतने वेतन की नैकरी जाये या रहे क्या फर्क पडता है।
उन्हांने कहा कि लगातार उन के कार्यक्रम मास्टर स्टोक के जरिये यह भी साफ हो रहा था कि सरकार के दावां के भीतर कितना खोखलापन है और इस के लिये बाकायदा सरकारी आंकडों के अंर्तोविध को ही आधार बनाया जाता था।
लेख के अंत में वाजपेयी ने कहा है कि जब सत्ता का खुले तौर पर खेल हो रहा है तो फिर किस एडिटर गिल्ड को लिख कर दें या किस पत्रकार संगठन से कहें संभल जाओ।सत्तानुकूल होकर मत कहो शिकायत तो करो फिर लडेंगे। जैसे एडिटर गिल्ड नहीं बल्कि सचिवालय है और संभालने वाला पत्रकार नहीं सरकारी बाबू है।
वाजपेयी के लेख की आखरी पंक्ति बहुत ही असरदार है। वो कहती है तो गुहार यही है, लडो मत पर दिखायी देते हुये सच को देखते वक्त आंखो पर पट्टी तो ना बांधो।

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