भोजशाला विवाद का फैसला जनता के सामने, क्या यह देगा मुस्लिम पक्ष को चुनौती ?

मध्यप्रदेश के धार में स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आखिरकार वह फैसला आ गया, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने आज शुक्रवार को बड़ा निर्णय सुनाते हुए भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है। अदालत ने साफ कहा कि भोजशाला का मूल स्वरूप संस्कृत शिक्षा केंद्र और मंदिर का था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और ऐतिहासिक अध्ययन पर भरोसा जताते हुए कहा कि “पुरातत्व एक विज्ञान है और न्यायालय वैज्ञानिक निष्कर्षों को नजरअंदाज नहीं कर सकता।” अदालत ने माना कि ASI द्वारा किए गए 98 दिन के सर्वे, स्थापत्य अवशेष, शिलालेख और संरचनात्मक अध्ययन यह संकेत देते हैं कि परिसर का मूल धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप हिंदू मंदिर का रहा है।

इस फैसले से होने वाले फायदे 

कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिए कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली इस संरचना का संरक्षण उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। फैसले में यह भी कहा गया कि श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और परिसर का संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व होगा।

 प्रबंधन अधिकार ASI के पास ही बनाए रखने के निर्देश दिए

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने भोजशाला परिसर का प्रशासनिक और प्रबंधन अधिकार ASI के पास ही बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही केंद्र सरकार और ASI को संस्कृत शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े आवश्यक निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई है।

वही मुस्लिम पक्ष को लेकर भी अदालत ने कहा कि मुस्लिम समाज यदि नमाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था चाहता है तो वह धार जिले में अलग जमीन आवंटन के लिए सरकार से संपर्क कर सकता है। अब कोर्ट के इस टिप्पणी को फैसले का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि 2003 से लागू व्यवस्था के तहत भोजशाला में शुक्रवार को नमाज और अन्य निर्धारित दिनों में हिंदू पूजा की अनुमति दी जाती रही थी।

अब हाई कोर्ट का यह  फैसला सिर्फ एक धार्मिक स्थल का विवाद नहीं, बल्कि इतिहास, पुरातत्व, आस्था और संवैधानिक अधिकारों के टकराव का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। हिंदू पक्ष लंबे समय से भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र बताते हुए पूर्ण पूजा अधिकार की मांग कर रहा था। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में आने वाला स्थल बताता रहा।

रिजर्व फोर्स और RAF को अलर्ट मोड पर

आपको बता दें, फैसले के पहले ही धार और इंदौर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। ताकि किसी भी प्रकार की असंवेदनशील घटना से निपटा जा सके करीब 1200 पुलिसकर्मियों, रिजर्व फोर्स और RAF को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सोशल मीडिया पर भी विशेष निगरानी जारी है ताकि किसी तरह की अफवाह या भड़काऊ सामग्री माहौल खराब न कर सके।

इस फैसले को कई लोग अयोध्या विवाद के बाद देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक-ऐतिहासिक निर्णयों में से एक मान रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले को चुनौती देता है या सरकार अदालत के निर्देशों के अनुसार भोजशाला परिसर के नए प्रशासनिक और धार्मिक स्वरूप की प्रक्रिया शुरू करती है।

 

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