डिजिटल न्याय व्यवस्था की ओर बढ़ता भारत, अब फाइलों नहीं तकनीक से होगी अदालतों की पहचान
जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल और पेपरलेस न्याय व्यवस्था ही भविष्य है। वर्चुअल हियरिंग, ई-फाइलिंग और AI तकनीक से अब आम लोगों तक तेजी से न्याय पहुंचाने की तैयारी हो रही है।
जबलपुर में आयोजित “डिजिटल ट्रांसमिशन: एडवांसिंग पेपरलेस लीगल सिस्टम” कार्यक्रम में देश की न्याय व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश दिया गया। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित कई वरिष्ठ न्यायाधीश मौजूद रहे।
इस दौरान अदालतों को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में कहा गया कि आने वाले समय में अदालतों की पहचान मोटी फाइलों से नहीं, बल्कि स्मार्ट टेक्नोलॉजी और डिजिटल सिस्टम से होगी।
CJI सूर्यकांत बोले- अब बदल चुकी है न्यायपालिका की तस्वीर
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका अब तेजी से डिजिटल युग में प्रवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि वह समय धीरे-धीरे खत्म हो रहा है जब अदालतों में लाल कपड़ों में बंधी फाइलों के ढेर दिखाई देते थे।
अब न्याय व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन डेटा और AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य सिर्फ अदालतों को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए न्याय को आसान बनाना है। CJI ने कहा कि गांवों, छोटे शहरों और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोग भी अब तकनीक की मदद से अदालत तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
कोविड काल बना सबसे बड़ा बदलाव
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान अदालतों को मजबूरी में तकनीक अपनानी पड़ी थी, लेकिन वही बदलाव आज न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत बन गया है।
उन्होंने कहा कि वर्चुअल हियरिंग और ई-फाइलिंग की वजह से अदालतों का काम बंद नहीं हुआ। लोगों को घर बैठे सुनवाई में शामिल होने का मौका मिला। इससे समय और खर्च दोनों की बचत हुई। उन्होंने कहा कि अब तकनीक न्याय की रफ्तार बढ़ाने का सबसे मजबूत माध्यम बन चुकी है।
AI और डिजिटल सिस्टम पर तेजी से काम
CJI सूर्यकांत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की AI कमेटी लगातार ऐसे सिस्टम तैयार कर रही है जो पारदर्शी, तेज और आम लोगों के लिए आसान हों।
उन्होंने कहा कि नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी व्यवस्थाओं ने न्यायपालिका को पहले से ज्यादा पारदर्शी बनाया है। अब लोग कई मामलों की जानकारी ऑनलाइन देख सकते हैं।
उन्होंने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब वे 37 साल की उम्र में महाधिवक्ता बने थे, तब उन्होंने अरुण जेटली के सहयोग से देश का पहला पूरी तरह कंप्यूटरीकृत महाधिवक्ता कार्यालय बनाया था।
मध्यप्रदेश की सराहना
कार्यक्रम में CJI ने मध्यप्रदेश सरकार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि राज्य तेजी से पेपरलेस व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उनका कहना था कि इससे न सिर्फ अदालतों का काम तेज होगा, बल्कि कागज की बचत होने से पर्यावरण संरक्षण को भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य की अदालतें तकनीक पर आधारित होंगी, जहां काम तेजी और पारदर्शिता के साथ होगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि जब न्यायपालिका ऐतिहासिक फैसले देती है, तब लोकतंत्र और मजबूत होता है। उन्होंने अयोध्या और शाहबानो मामले का जिक्र करते हुए कहा कि देश की न्याय व्यवस्था ने समय-समय पर बड़े फैसले देकर समाज को दिशा दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश “पंच परमेश्वर” और निष्पक्ष न्याय की पुरानी परंपरा वाला प्रदेश है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज और आदि शंकराचार्य के शास्त्रार्थ का भी उल्लेख किया।
संसद भी हुई पेपरलेस
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि आज संसद भी पूरी तरह पेपरलेस हो चुकी है। उन्होंने बताया कि अब बजट भी मोबाइल पर उपलब्ध होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्यप्रदेश विधानसभा भी जल्द इसी दिशा में आगे बढ़ेगी। मेघवाल ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि पारदर्शिता और बेहतर प्रशासन का नया मॉडल है।
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने साझा किए अनुभव
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने कहा कि एक समय ऐसा था जब अदालतों में लैपटॉप ले जाने तक की अनुमति नहीं होती थी।
लेकिन आज तकनीक ने पूरी न्यायिक व्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। अब सरकारी मामलों की डिजिटल मॉनिटरिंग हो रही है और नोटिस भी ऑनलाइन भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोजाना स्टेटस रिपोर्ट डिजिटल माध्यम से अपलोड की जा रही हैं, जिससे काम में तेजी आई है।
डिजिटल न्याय व्यवस्था की ओर बढ़ता भारत, अब फाइलों नहीं तकनीक से होगी अदालतों की पहचान