नीट पेपर लीक का सबसे बड़ा खुलासा! 5 लाख में बिक रहा था भविष्य, आखिर क्यों रद्द करनी पड़ी परीक्षा?

कैरियर May 12, 2026

3 मई 2026 की दोपहर लाखों छात्र परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले तो उनके चेहरे पर उम्मीद थी। किसी ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था तो किसी ने परिवार की उम्मीदों को पूरा करने की ठानी थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद जब नीट 2026 परीक्षा रद्द होने की खबर आई, तो करोड़ों लोगों का भरोसा हिल गया। छात्रों के मन में सिर्फ एक सवाल था अगर पेपर पहले ही बिक चुका था, तो मेहनत का क्या मतलब?

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट UG 2026 अब सिर्फ एक एग्जाम नहीं रही, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गई है। जांच में सामने आए खुलासों ने हर किसी को हैरान कर दिया। कहीं 5 लाख रुपए में पेपर बेचने की बात सामने आई, तो कहीं टेलीग्राम ग्रुप्स पर परीक्षा से पहले सवाल वायरल होने लगे। सरकार और NTA पर दबाव इतना बढ़ा कि आखिरकार परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

NEET UG 2026: NTA Asks Aspirants to Update Aadhaar, UDID and Category  Certificates Before Registration

 NEET 2026 परीक्षा रद्द होने से क्यों मचा देशभर में हंगामा?

नीट UG परीक्षा देश की सबसे बड़ी मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं। इस बार करीब 25 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी।

लेकिन परीक्षा खत्म होने के कुछ घंटों बाद ही सोशल मीडिया पर पेपर लीक की चर्चा शुरू हो गई। कई छात्रों ने दावा किया कि जो सवाल परीक्षा में आए, वही पहले से कुछ टेलीग्राम ग्रुप्स में मौजूद थे। शुरुआत में लोगों ने इसे अफवाह माना, लेकिन जांच बढ़ी तो मामला गंभीर होता चला गया।

जांच एजेंसियों को कई ऐसे डिजिटल सबूत मिले, जिन्होंने पेपर लीक की बात को मजबूत कर दिया। इसके बाद छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा बढ़ने लगा। कई शहरों में प्रदर्शन हुए और परीक्षा रद्द करने की मांग तेज हो गई।

 5 लाख से 10 लाख रुपए में बिक रहा था नीट पेपर!

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि नीट 2026 पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। सूत्रों के अनुसार राजस्थान के कोटा और बिहार के पटना से जुड़े कुछ लोगों ने परीक्षा से पहले ही पेपर बेचने का काम शुरू कर दिया था।

बताया जा रहा है कि छात्रों से 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक वसूले गए। कई छात्रों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया गया। कुछ जगहों पर एडवांस रकम लेकर डील तय की गई थी।

पटना में हुई छापेमारी के दौरान जली हुई उत्तर पुस्तिकाएं और कुछ संदिग्ध दस्तावेज मिले। इससे जांच एजेंसियों को शक हुआ कि पेपर परीक्षा से पहले बाहर पहुंच चुका था। यही वजह रही कि नीट 2026 पेपर लीक मामला देश का सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला बन गया।

 टेलीग्राम ग्रुप्स पर वायरल हुए सवाल, साइबर सेल भी रह गई हैरान

इस बार पेपर लीक का तरीका पहले से अलग और ज्यादा खतरनाक था। पहले जहां फोटो कॉपी या व्हाट्सएप फॉरवर्ड की बातें सामने आती थीं, वहीं इस बार पूरा नेटवर्क डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक्टिव था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक परीक्षा से कुछ घंटे पहले कई टेलीग्राम ग्रुप्स पर प्रश्नपत्र जैसे स्क्रीनशॉट वायरल होने लगे थे। कुछ छात्रों ने इन स्क्रीनशॉट्स को सेव भी किया था।

जब साइबर सेल ने डिजिटल फुटप्रिंट की जांच शुरू की, तो कई कड़ियां प्रिंटिंग प्रेस और ट्रांसपोर्ट चैनलों तक पहुंचीं। इससे यह साफ हो गया कि पेपर सुरक्षा में कहीं बड़ी चूक हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब पेपर लीक गैंग हाई-टेक तरीके अपना रहे हैं। एन्क्रिप्टेड ऐप्स, फेक आईडी और प्राइवेट चैनलों के जरिए जानकारी फैलाना आसान हो गया है।

NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

नीट 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे ज्यादा सवाल NTA की व्यवस्था पर उठ रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षा में बार-बार गड़बड़ी होना बेहद गंभीर बात है।

इस बार कई परीक्षा केंद्रों से बायोमेट्रिक गड़बड़ी की शिकायतें आई थीं। कुछ जगहों पर छात्रों ने आरोप लगाया कि डमी कैंडिडेट्स परीक्षा में बैठे थे। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। कई छात्रों का कहना था कि सुरक्षा जांच सिर्फ नाम के लिए हो रही थी।

सोशल मीडिया पर छात्रों ने खुलकर नाराजगी जताई। ट्विटर और इंस्टाग्राम पर #NEETCancel और #NEETPaperLeak लगातार ट्रेंड करते रहे। छात्रों का कहना था कि अगर पेपर पहले ही बिक गया था, तो ईमानदारी से परीक्षा देने वालों का क्या दोष?

 कैसे काम करता था सॉल्वर गैंग?

जांच एजेंसियों को पता चला कि यह सिर्फ साधारण पेपर लीक नहीं था, बल्कि एक पूरा संगठित नेटवर्क था। इसमें कई राज्यों के लोग शामिल थे। सॉल्वर गैंग प्रोफेशनल तरीके से काम कर रहा था। असली छात्रों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने के लिए नकली दस्तावेज तैयार किए जाते थे। कुछ मामलों में ब्लूटूथ डिवाइस और छोटे कैमरों का इस्तेमाल किया गया। परीक्षा हॉल के अंदर से सवाल बाहर भेजे जाते थे और फिर जवाब वापस पहुंचाए जाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोगों ने छात्रों को भरोसा दिलाया था कि उन्हें “सेट पेपर” मिलेगा। इसके बदले मोटी रकम ली गई थी।

 

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