पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर ट्रांसपोर्टरों की चिंता, CM मोहन यादव से टैक्स घटाने की मांग
मध्यप्रदेश में बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों के बीच ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर वैट और अतिरिक्त टैक्स कम करने की मांग की है। लगातार बढ़ते खर्च से छोटे ट्रांसपोर्टर सबसे ज्यादा परेशान बताए जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश में पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम अब आम लोगों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के लिए भी बड़ी परेशानी बनते जा रहे हैं। लगातार महंगे हो रहे ईंधन का असर सीधे माल ढुलाई, बाजार और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर दिखाई देने लगा है।
दरअसल, इसी चिंता को लेकर ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर राहत देने की मांग की है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि पहले से आर्थिक मंदी की मार झेल रहे इस सेक्टर पर अब बढ़ते डीजल दामों ने अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।

सी.एल. मुकाती ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
आरटीओ एवं ट्रैफिक कमेटी के चेयरमेन सी.एल. मुकाती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेजे पत्र में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
दरअसल, मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और वैश्विक हालात की वजह से पेट्रोल-डीजल पहले ही महंगा हो चुका है। ऐसे में मध्यप्रदेश में लगने वाला ज्यादा वैट और अन्य टैक्स आम जनता और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ा रहे हैं।
ट्रांसपोर्ट कारोबार पर पड़ रहा सीधा असर
पत्र में बताया गया है कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले से ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश और प्रदेश में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक व्यावसायिक वाहन खड़े हैं। माल ढुलाई का काम भी पहले की तुलना में काफी कम हो गया है।
दरअसल, डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रक ऑपरेटरों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। छोटे और मध्यम ट्रांसपोर्टर सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई वाहन मालिकों को बैंक की EMI भरने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महंगाई बढ़ने की भी चिंता
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि अगर डीजल के दाम लगातार बढ़ते रहे तो इसका असर केवल ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। बाजार में सामान ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।
दरअसल, ट्रांसपोर्ट सेक्टर को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। अगर यही स्थिति बनी रही तो व्यापार, कृषि और उद्योगों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।