फटकार के बाद गड्ढों में काम चलाऊ मरम्मत
- गुणवत्ता युक्त नहीं हुई सड़क के गढ्डों की मरम्मत
देवेन्द्र वैश की खबर का इम्पेक्ट खबर नेशन Khabar Nation
होशंगाबाद। लोक निर्माण विभाग के अधिकारी एक दिन पहले जहां बजट नहीं तो काम नहीं की बातें बार-बार कह रहे थे वही अधिकारी दूसरे दिन खराब सड़कों को नापते हुए मिले। वरिष्ठ अधिकारियों की फटकार के बाद शहर की सड़कों में हुए जानलेवा गड्ढों में शुक्रवार को काम चलाओ मरम्मत की गई। पाठकों को बताते हुए हमें हर्ष है कि खबर नेशन के होशंगाबाद संवाददाता देवेन्द्र वैश ने मरम्मत काम शुरू होने के बारह घंटे पहले शहर की सड़कों के मामले पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के रवैए को उजागर किया था । समाचार " मुख्यमंत्री शिवराज के क्षेत्र में सड़कें हुई जानलेवा, कलेक्टर के आदेशों की बार-बार उड़ा रहे धज्जियां " शीर्षक से चिंता जाहिर की थी ।
शहर के कुछ स्थानों पर सड़कों में गिट्टी और मामूली डामर डालकर रिपेयरिंग की गई। आईटीआई रोड पर आजमगढ़ डिपो और मालवीय हॉस्पिटल के बीच चौराहे पर हुए बड़े गड्ढों को गिट्टी और डामर से भरने का काम दोपहर तक किया गया। लेकिन शाम तक सड़क पर गिट्टी निकलकर बाहर आ गई। आने जाने वाले लोगों को कामचलाऊ मरम्मत के कारण परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। आसपास के लोगों ने बताया कि सुधार कार्य गुणवत्ता के साथ नहीं किया गया। सुधार करने वालों ने पहले गिट्टी डाली और ऊपर से डामर डालकर ऐसे ही छोड़ दिया। काम चलाओ मरम्मत होने के कारण 3-4 घंटे में ही बारीक गिट्टियां सड़क पर निकल आईं। वाहनों के आने-जाने से उचटकर लोगों को चोटिल भी करती रही।
सचिव ने दिए थे निर्देश
गुरुवार को लोक निर्माण विभाग के सचिव पी बी बारस्कर ने होशंगाबाद आकर जर्जर सड़कों की मरम्मत न करने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने समीक्षा बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को जिले भर की सड़कों, पुल पुलियों की मरम्मत का कार्य तेजी से करने के निर्देश दिए थे। सचिव के जाते ही अधिकारी बजट ना होने का रोना लेकर बैठ गए। सुधार कब होगा इसे लेकर वे बार-बार कहते रहे कि बजट होगा तो ही सुधार होगा। अधिकारियों को तो यह भी जानकारी नहीं थी कि शहर सहित जिले में कितनी सड़कें जर्जर और खराब है। इन सड़कों की मरम्मत में कितना पैसा पिछली साल लगा था और इस बार कितना पैसा लगेगा।
ऐसे होना थी मरम्मत
सड़क सुधार विशेषज्ञ यूके शुक्ला ने बताया की किसी भी सड़क के गड्ढे मरम्मत करने से पहले सर्फेस तक सफाई होती है। गड्ढे की धूल पूरी तरह साफ की जाती है। फिर ठंडा डामर डाला जाता है। इसके बाद गिट्टी मुक्त डामर डालकर रोलर चलाया जाता है। रोलर भी 24 टन का होना चाहिए नहीं तो डामर बैठ नहीं पाता। करीब 2 से 3 घंटे तक उक्त स्थान को बैरिकेड लगाकर सुरक्षित रखना होता है। जिससे डामर जम जाए। संबंधित स्थान पर मिट्टी पानी नहीं होनी चाहिए, नहीं तो डामर गिट्टी दोबारा निकलकर खराब हो जाती है।