समाज को कुपोषण से विमुक्तिकरण मेंं मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका

खान पान Sep 26, 2020


राष्ट्रीय पोषण माह के संबंध में मीडिया कार्यशाला का आयोजन हुआ
अर्पित उपाध्याय/ खबर नेशन /Khabar Nation
विदिशा। जिले में एक सितम्बर से तीस सितम्बर तक मनाए जा रहे राष्ट्रीय पोषण माह के संबंध में शनिवार को जिला पंचायत के सभागार कक्ष में एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यशाला में इलेक्ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे। 
महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से आयोजित उक्त कार्यशाला में विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी बृजेश शिवहरे ने राष्ट्रीय पोषण माह आयोजन के उद्वेश्यों पर गहन प्रकाश डालते हुए मीडियाकर्मियों के द्वारा आमजनों तक संदेश पहुंचाने के कार्य को अतिमहत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी अभियान या कार्यक्रम की सफलता के लिए लोगों का जागरूक होना आवश्यक है। आमजनों के मध्य जनजागरूकता लाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से प्रसारित खबरों का जनसामान्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है, संदेश कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों के मध्य सुगमता से पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय पोषण माह के दरमियान तिथिवार आयोजित होने वाली गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई भी बच्चा कुपोषित ना हो यह हम सबका नैतिक दायित्व है। कार्यशाला को क्लिंटन फाउंडेशन के राज्य परियोजना समन्वयक महेन्द्र कामतकर के द्वारा कुपोषण के संबंध में बताया गया कि समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने में मीडिया का सदैव सहयोग मिलता रहा है। आमजनों की भ्रांतियां दूर कर मीडिया उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराता रहा है। मीडिया के सहयोग के बिना कुपोषण को जड़ से समाप्त करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह के आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनसामान्य को पोषण का महत्व बताते हुए 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों, किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार लाना है। बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक, मानसिक विकास के लिए पर्याप्त मात्रा में पोषणयुक्त खाद्य पदार्थ माता एवं शिशु दोनों को दिया जाना आवश्यक है। पोषणयुक्त आहार के लिए बाहर से खाद्य पदार्थ क्रय करने की आवश्यकता नहीं होती बल्कि यह हम सभी के घरों में उपलब्ध रहता है। इसे प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में माता एवं शिशु को दिया जाना चाहिए। 
स्वास्थ्य विभाग के डीआईयू डा. दिनेश शर्मा ने कुपोषण से बचाव के लिए स्वस्थ रहना अति आवश्यक है और खाने की थाली में किन-किन पोषक तत्वो की मात्रा आवश्यक है पर गहन प्रकाश डाला। कार्यशाला में पावर प्रेजेन्टेशन के माध्यम से बताया गया कि जन्म के बाद 6 माह तक मां का दूध ही शिशु के लिये सर्वोत्तम आहार है, 6 माह के बाद शिशु को पूरक आहार दिया जा सकता है। कार्यशाला में 0 से 6 वर्ष के बच्चों में ठिग्नेपन को कम करने, बच्चों में कम वजन कुपोषण में सुधार लाने, किशोरियों तथा महिलाओं में एनीमिया के स्तर में कमी लाने तथा जीवन के प्रथम 1000 दिवस के दौरान स्वास्थ्य एवं पोषण आवश्यकता के प्रति जागरूकता लाने, गर्भावस्था जांच एवं पोषण देखभाल, प्रसव के तुरंत बाद शीघ्र स्तनपान एवं सही समय पर ऊपरी आहार के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला में विभाग के सहायक संचालक बृजेश जैन, कार्यशाला में आगंतुको के प्रति आभार विभाग के सहायक संचालक विवेक शर्मा ने व्यक्त किया।

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