कमलनाथ सरकार का कुपोषण से मुक्ति का शंखनाद ....


कुपोषण के अभिशाप से मुक्त होगा मप्र: अभय दुबे

भोपाल-मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी, मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने जारी अपने बयान में कहा कि मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री कमलनाथ जी निरंतर गर्त में गिरे हुए सामाजिक सूचकांक को ऊपर लाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। मध्यप्रदेश को विरासत में मिली गंभीर कुपोषण की परिस्थिति के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई कांगे्रस की सरकार ने प्रारंभ की है। 01 से 30 तक सितम्बर माह को पोषण माह घोषित किया गया है। जिसमें विभिन्न डेवलपमेंट एजेंसियों को पोषण माह में भूमिका एवं उत्तरदायित्व निर्धारण कर समस्त जिलों को प्रेषित की गई हैं। 
विगत भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश के नौनिहालों को कुपोषण के अंधकार में धकेल दिया था, प्रदेश के 48 लाख बच्चे कुपोषण के शिकार थे। मध्यप्रदेश के 6 से 59 माह के 68.9 प्रतिशत बच्चे खून की कमी का शिकार हैं। पांच साल तक की आयु के 42 प्रतिशत बच्चों की अपेक्षाकृत ऊंचाई नहीं है। इसी प्रकार पांच वर्ष तक के 25 प्रतिशत बच्चों का वजन और ऊंचाई दोनों ही कम है। मध्यप्रदेश की शिशु मृत्यु दर 47 होकर देश में सबसे ज्यादा है। पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर 55 है और मातृ मृत्यु अनुपात 173 है।  
इतनी गंभीर चुनौतियां विरासत में कांगे्रस सरकार को मिली हैं। पूरी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कमलनाथ जी की सरकार काम कर ही है। वर्तमान में 63 लाख 70 हजार 924 बच्चे जो छह माह से छह वर्ष तक के हैं, जिन्हें 97 हजार 134 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार वितरित किया जा रहा है। 
जहां एक ओर कमलनाथ सरकार ने मिलावटखोरी और ड्रग माफिया के खिलाफ एक बड़ा अभियान चला रखा है, वहीं दूसरी ओर समावेशी विकास के लिए पोषण आहार कार्यक्रम के माध्यम से मध्यप्रदेश को कुपोषण मुक्त करने का संकल्प लिया है। 
ज्ञातव्य है कि कमलनाथ सरकार को पोषण अभियान के तहत देश में सर्वश्रेष्ठ काम करने का खिताब कंेद्र की मोदी सरकार के नीति आयोग ने हाॅल ही में दिया है। नीति आयोग द्वारा जारी की गई हाॅल ही की रिपोर्ट में जनवरी से जुलाई 2019 के मध्य देश के 101 पिछले जिलों में खंडवा जिले को स्वास्थ्य सूचकांक में सर्वश्रेष्ठ सुधार करने का खिताब दिया गया है। इस जिले के प्रभारी स्वयं मप्र के मुख्य सचिव श्री सुधीर रंजन मोहंती थे। मप्र को नीति आयोग ने कुल तीन पुरस्कार दिये हैं। कांगे्रस सरकार संकल्पित है कि मप्र को पूरी तरह कुपोषण मुक्त करेगी।                

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