हाई कोर्ट आदेश की मनमानी व्याख्या से वरिष्ठ I A S अफसरों को गुमराह करने का प्रयास

 

 

गलत व्याख्या कर अटकया जा रहा है हाईकोर्ट की डबल बैंच का निर्णय 

 

गौरव चतुर्वेदी / खबर नेशन / Khabar Nation 

 

मनमाफि़क फ़ैसला ना आने के कारण मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले की ही गलत और मनमानी व्याख्या कर राज्य के बड़े आईएएस अफसरों को गुमराह किया जा रहा है । मामला इंदौर वरिष्ठ जिला पंजीयक के पद पर पदस्थ अधिकारियों की वरिष्ठता निर्धारण का है। जिसके चलते मध्य प्रदेश को सर्वाधिक राजस्व देने वाले जिले में असमंजस की स्थिति बनी हुई है । 

गौरतलब है कि इंदौर पंजीयन कार्यालय में वरिष्ठ जिला पंजीयक के पद की वरिष्ठता निर्धारण को लेकर मध्य प्रदेश का पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग पिछले सात आठ महीने से हलाकान है और कदम-कदम पर विभाग को गुमराह किया जा रहा है । इंदौर में जिला पंजीयक के चार पद हैं । जिनमें वरिष्ठतम जिला पंजीयक को वरिष्ठ जिला पंजीयक पद का प्रभार  दिया  जाता है । पूर्व में दीपक शर्मा वरिष्ठ जिला पंजीयक के पद पर पदस्थ थे । कुछ महीने बाद राज्य शासन के द्वारा डॉ अमरेश नायडू का तबादला इंदौर कर दिया गया । नायडू शासन द्वारा जारी ग्रेडेशन लिस्ट में वरिष्ठता क्रम में दीपक शर्मा से वरिष्ठ हैं।  लिहाजा कुछ समय पूर्व पंजीयन महानिरीक्षक , पंजीयन एवं मुद्रांक ने डॉ अमरेश नायडू को वरिष्ठ जिला पंजीयक,इंदौर के पद का प्रभार दिए जाने का आदेश जारी कर दिया।  इस आदेश के खिलाफ दीपक शर्मा हाईकोर्ट चले गए।  याचिका में दीपक शर्मा ने तत्कालीन प्रमुख सचिव वाणिज्य कर दीपाली रस्तोगी , महानिरीक्षक पंजीयन एवं मुद्रांक एम सेल्वेंद्रम और तत्कालीन इंदौर कलेक्टर टी इलैया  राजा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा डालें । जिस समाचार को खबर नेशन ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।  समाचार प्रकाशित होने के बाद दीपक शर्मा ने इन आरोपों पर गोलमोल जवाब दिए,लेकिन उक्त आरोप याचिका  में यथावत रखे।  हाईकोर्ट में दीपक शर्मा के विरुद्ध फैसला आया । माननीय उच्च न्यायालय ने महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक को वरिष्ठता का निर्धारण 7 दिन के भीतर आदेश जारी किए जाने हेतु निर्देशित किया।इसके बाद पंजीयन महानिरीक्षक एम सेल्वेंद्रम ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए डॉ अमरेश नायडू को पुनः वरिष्ठ जिला पंजीयक का प्रभार दिए जाने का आदेश जारी कर दिया।

दीपक शर्मा हाई कोर्ट के इस फैसले एवं पंजीयन महानिरीक्षक के उक्त आदेश के खिलाफ डबल बेंच में अपील कर बैठे। डबल बेंच ने पंजीयन एवं मुद्रांक महानिरीक्षक एम सेल्वेंद्रम को सक्षम न मानते हुए वरिष्ठता निर्धारण करने के लिए प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर को उक्त आदेश जारी करने के लिए सक्षम माना ।

माननीय न्यायालय की डबल बेंच का फैसला आए लगभग 25 दिन बीत गए हैं पर शासन वरिष्ठता का निर्धारण नहीं कर पा रहा है । सूत्रों के अनुसार इसकी वजह यह है कि वरिष्ठ अफसर फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहते हैं ताकि अनावश्यक ही पुनः कोर्ट कार्रवाई में उलझना ना पड़े। शासन की इस देरी का फ़ायदा उठाते हुए, दीपक शर्मा ने हाई कोर्ट डबल बेंच के आदेश की मनमानी व्याख्या कर विभाग में पूरी तौर से भ्रम का वातावरण फैला रखा है और स्वयंभू तरीके से अपने आप को वरिष्ठ जिला पंजीयक घोषित करते हुए अन्य ज़िला पंजीयको के मध्य कार्य विभाजन आदेश भी ख़ुद कर दिया तथा अपने आप को कार्यालय प्रमुख,आहरण एवं सवितरण अधिकारी तथा लोक सूचना अधिकारी ख़ुद को घोषित कर अन्य ज़िला पंजीयको को मामूली कार्य देकर शासन को अँगूठा दिखाया तथा माननीय उच्च न्यायालय की अवमानना भी की है।

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