अमेरिका का राहत पैकेज जीडीपी का दस प्रतिशत भारत का मात्र एक प्रतिशत
राहुल गांधी से चर्चा करते हुए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अभिजीत बेनर्जी ने बताया
वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी की कलम से
खबर नेशन / Khabar Nation
कांग्रेस नेता राहुल गांधी अर्थशास्त्र के नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी से बातचीत कर रहे हैं। कोरोना महामारी के इकोनॉमी पर असर और उससे निपटने के उपायों पर यह चर्चा हो रही है। बनर्जी का कहना है कि कोरोना के आर्थिक असर को देखते हुए हमने अभी तक बड़ा आर्थिक पैकेज घोषित नहीं किया है। हमने जो पैकेज दिया है वह जीडीपी के 1% के बराबर है जबकि, अमेरिका 10% तक पहुंच गया। एमएसएमई सेक्टर के लिए ज्यादा राहत देने की जरूरत है।
कोरोना और उसके आर्थिक असर पर राहुल अलग-अलग फील्ड के देश-विदेश के एक्सपर्ट से डिस्कस कर रहे हैं। उन्होंने 30 अप्रैल को आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से चर्चा के साथ यह सीरीज शुरू की थी। राजन ने कहा था कि गरीबों की मदद के लिए सरकार को 65 हजार करोड़ रुपए खर्च करने चाहिए।
सरकार से ज्यादा लोगों को पता होता है कि किसे इस समय पैसों की जरूरत है। आज भी कई ऐसी योजनाएं हैं जिनसे लोग नहीं जुड़ पाए हैं। ऐसे में जरूरत है कि उन लोगों तक मदद पहुंचाई जाए। हमें इस बात को भूलना चाहिए कि इससे कुछ लोगों को फायदा पहुंच सकता है। इस समय जोखिम लेने की जरूरत है क्योंकि यही समय की मांग है।
- राहुल ने कहा कि केंद्र सरकार बेशक बड़े फैसले ले लेकिन लॉकडाउन और जमारी फैसलों को राज्य सरकार को लेने देना चाहिए। मौजूदा सरकारअलग हिसाब से चल रही है और केंद्र से ही फैसले लिए जा रहे हैं। अभिजीत ने कहा कि केंद्र को गरीबों के लिए नई योजना लाने की जरूरत है। राज्यों और जिला अधिकारियों को गरीबों को सीधा लाभ पहुंचाने की जरूरत है।
- अभिजीत ने कहा कि यदि किसी को पैसा पहुंचाना है तो उसके लिए एक वातावरण चाहिए। जिसके पास खाता है उसे पैसा मिल सकता है लेकिन जिसके पास खाता नहीं है उसके बारे में सोचना होगा। ऐसे में राज्य सरकारों को ज्यादा से ज्यादा मदद देनी होगी ताकि किसी तरह से आम लोगों तक पैसा पहुंच जाए।
- राहुल ने कहा कि आज देश में राशन कार्ड कम है लोगों के पास खाना नहीं है। जिसपर नोबेल विजेता ने कहा कि हमने पहले भी इसपर सलाह दी है। सरकार को अभी राशन कार्ड जारी करने चाहिए, जो कम से कम तीन महीने काम करें और हर किसी को मुफ्त में राशन मिल सके। हर किसी को इस समय चावल, दाल, गेहूं और चीनी की जरूरत है।
- राहुल ने कहा कि जितनी जल्दी लॉकडाउन से बाहर आया जाए उतना अच्छा है लेकिन उसके बाद भी एक योजना होनी चाहिए। वरना सारा पैसा बेकार है। जिसपर बनर्जी ने कहा कि हमें महामारी के बारे में पता होना चाहिए। लॉकडाउन बढ़ाने से कुछ नहीं होगा।
- राहुल ने कहा कि आज नकदी की दिक्कत होगी, बैंकों के सामने कई तरह की चुनौतियां होगी और नौकरी बचा पाना मुश्किल होगा। जिसके जवाब में बनर्जी ने कहा कि ये बिलकुल सच होने वाला है। ऐसे में देश में आर्थिक पैकेज की दरकार है। अमेरिका-जापान जैसे देशों ने ऐसा किया है। हमारे यहां नहीं हुआ। छोटे उद्योगों की मदद करनी चाहिए। तिमाही का ऋण भुगतान खत्म कर देना चाहिए।उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की वजह से कारोबार पूरी तरह से ठप है इसलिए आर्थिक मदद की ज्यादा जरूरत है।
- बनर्जी ने कहा कि यूपीए सरकार ने काफी अच्छी नीतियों को लागू किया था लेकिन अब लो सरकार उन्हें लागू नहीं कर रही है। यूपीए सरकार ने जिस आधार जैसी योजनाओं को लागू किया था। इस सरकार ने भी उसे सही बताया और उसपर काम किया। आज के समय में इस तरह की सुविधा काफी सही साबित हो सकती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका मतलब है कि देशव्यापी योजना लागू नहीं हो पाई।
- राहुल गांधी ने अभिजीत बनर्जी से पूछा कि जब आपने नोबेल पुरस्कार जीता था तो यह चौंकाने वाला था? जिसपर उन्होंने कहा कि उन्होंने बिलकुल ऐसा नहीं सोचा था।
अभिजीत द्वारा प्रस्तुत मुख्य बिंदु -
बाजार में मांग बढ़ाना अहम है। अगर हम निचले तबके के 60% लोगों को थोड़ा ज्यादा पैसा देंगे तो कोई नुकसान नहीं होगा
अस्थाई राशन कार्ड की व्यवस्था शुरू होनी चाहिए। मुझे लगता है कि गरीबों को देने के लिए हमारे पास पर्याप्त दाल और तेल है।
एनजीओ के जरिए लोगों को मदद पहुंचाने के लिए राज्य सरकारों को पैसा देना चाहिए। कुछ गलतियों के लिए भी तैयार रहना चाहिए। हो सकता है कुछ पैसा जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाए।
जिन लोगों को सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं मिल रहा, उन्हें शामिल करने की कोशिश करनी चाहिए।
सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च के फेलो भी रह चुके बनर्जी
भारत में जन्मे और अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी को पिछले साल अर्थशास्त्र का नोबेल मिला था। 21 साल बाद किसी भारतवंशी को अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए चुना गया। अभिजीत, उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल क्रेमर को वैश्विक गरीबी कम करने के प्रयासों के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल दिया गया। अभिजीत ब्यूरो ऑफ द रिसर्च इन इकोनॉमिक एनालिसिस ऑफ डेवलपमेंट के पूर्व प्रेसिडेंट हैं। वे सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च के फेलो और अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स-साइंसेज एंड द इकोनॉमिक्स सोसाइटी के फेलो भी रह चुके हैं।
कांग्रेस ने ‘न्याय योजना’ के लिए अभिजीत से सलाह ली थी
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने प्रमुख चुनावी वादे "न्याय योजना' के लिए अभिजीत समेत दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों से राय ली थी। तब कांग्रेस अध्यक्ष रहे राहुल गांधी ने वादा किया था कि हर गरीब के खाते में साल में 72 हजार रुपए डाले जाएंगे, यानि हर महीने 6 हजार रुपए। योजना गरीबों को मिनिमम इनकम की गारंटी देगी। बनर्जी ने हर महीने 2500-3000 रुपए प्रति महीने का सुझाव दिया था।