कहीं मध्यप्रदेश में आंकड़े छुपाने का खेल तो नहीं कर रही सरकार ?
वजह उपचुनाव या कुछ और ?
खबर नेशन / Khabar Nation
मध्यप्रदेश में सरकारी तंत्र कोरोना वायरस (कोविड 19) के संक्रमित मरीजों के आंकड़ों को छुपाने का जतन कर रही है । ख़ासकर सरकार भविष्य में होने वाले 24 विधानसभा उपचुनाव को लेकर सशंकित है या फिर कोई और वजह सोचने पर मजबूर कर रही है ।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे कोविड 19 संक्रमण के आंकड़ों को देखें तो समझा जा सकता है । कहीं पर एकदम से कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या एकदम से ज्यादा हैं तो कहीं एकदम से कम । ख़ासकर चम्बल संभाग में कोरोना संक्रमितों का ना निकलना सवाल खड़े कर रहा है ।
दिनांक 3 मई के आंकड़ों को लेकर हम समझने का प्रयास करते हैं । गौरतलब है कि इंदौर में मरीजों की संख्या 1568 बताई जा रही है । अगर इंदौर के आसपास के क्षेत्रों में देखें तो धार-55, बड़वानी-26, खरगौन-77, बुरहानपुर-18,खंडवा-47, देवास-26, उज्जैन-156 के हालात इस प्रकार है । इसी प्रकार मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 532 और आसपास के क्षेत्र विदिशा-13 , होशंगाबाद-36, रायसेन-57 है । सवाल खड़ा होता है कि आखिर क्या वजह है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर में अभी तक एक भी मरीज नहीं निकला ।
इसी प्रकार ग्वालियर संभाग में शिवपुरी-2, श्योपुर-4, अशोकनगर-1 के आंकड़े चौंकाने वाले हैं । जब मुरैना- जैसे छोटे जिले में मरीजों की संख्या 16 है तो ग्वालियर जैसे बड़े नगर में सिर्फ 5कैसे ।
इसी प्रकार सागर में मात्र 5 मरीज निकले हैं । जबकि सागर संभाग से सटे हुए जबलपुर जिले में मरीजों की संख्या 96 से अंतर आ रहा है ।
गौरतलब है कि इंदौर जिले के सांवेर से तुलसी सिलावट , ग्वालियर जिले की ग्वालियर से प्रधुम्न सिंह तोमर , ग्वालियर पूर्व से मुन्नालाल गोयल , डबरा से इमरती देवी, मुरैना जिले की सुमावली से ऐदल सिंह कसाना, मुरैना से रघुराज कंसाना, दिमनी से गिरराज दंडोतिया , अंबाह से कमलेश जाटव , भिण्ड जिले की मेहगांव से ओपी एस भदौरिया , गोहद से रणबीर जाटव , दतिया जिले की भाण्डेर से रक्षा संतराम सिरौनिया , शिवपुरी जिले की करैरा से जसवंत जाटव , पोहरी से सुरेश धाकड़, गुना जिले की बमोरी से महेंद्र सिंह सिसोदिया, अशोकनगर जिले की अशोकनगर सीट सेजजपाल सिंह जज्जी , मुंगावली से ब्रिजेंद्र यादव रायसेन जिले से प्रभुराम चौधरी, सागर जिले की सुरखी से गोविंद राजपूत , मंदसौर जिले की सुवासरा से हरदीप डंग , धार जिले की बदनावर से राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, अनूपपुर जिले के अनूपपुर से बिसाहू लाल सिंह , देवास जिले की हाटपिपल्या से मनोज चौधरी कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था । जिसके कारण कमलनाथ सरकार गिर गई और मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई । इसी के साथ ही मुरैना जिले की जौरा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक बनवारीलाल शर्सा एवं आगर मालवा की आगर सीट से मनोहर लाल ऊंटवाल के निधन से दो सीटें रिक्त हो गई थी । अब इन चौबीस सीटों पर उपचुनाव होना है ।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन के नाटकीय घटनाक्रम के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण अपनी दस्तक दे चुका था । कमलनाथ सरकार में स्वास्थ्य मंत्री का दायित्व संभाल रहे तुलसी सिलावट कांग्रेस सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के खास सिपहसालार के तौर पर अन्य बागी विधायकों को लेकर बंगलोर में डेरा जमाए हुए थे । कांग्रेस की सरकार भले सिंधिया की महत्वाकांक्षा और कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई के खामियाजे के चलते गई हो लेकिन कांग्रेस मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के लिए पूर्ण रूप से सिंधिया गुट को जिम्मेदार ठहरा रही है । इस दौरान कमलनाथ अपनी कांग्रेस की सरकार को बचाने और भाजपा अपनी सरकार को बनाने के चक्कर में उलझी रही । कांग्रेस सिंधिया और उनके सिपहसालारों की भूमिका को लेकर विधानसभा उपचुनाव में कोरोना संक्रमण का जिम्मेदार ठहराते हुए मुद्दा बनाने की तैयारी कर चुकी हैं । और अब भाजपा और शिवराज सिंह चौहान अपनी सरकार को बचाएं रखने की जद्दोजहद में कांग्रेस के हाथ से इस मुद्दे को छीनने की तैयारी कर रही है । राजनैतिक सूत्रों के अनुसार यही वजह है कि चम्बल और ग्वालियर संभाग की सोलह सीटों पर किसी भी प्रकार की रिस्क नहीं लेना चाह रही है । ये वे इलाके हैं जो सिंधिया के वर्चस्व वाले इलाके माने जाते हैं ।इस पूरी रिपोर्ट का सबसे मजेदार पहलू है कि मात्र पांच मरीजों के होते हुए ग्वालियर को रेड झोन में रखा गया है , आखिर क्यों ?
कोरोना संक्रमण में सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे आंकड़े अभी सिर्फ शहर और जिला मुख्यालय के ही ज्यादा नजर आ रहे हैं । आखिर क्या वजह है कि तहसील मुख्यालय पर अभी तक कोरोना संक्रमित मरीज नहीं निकले हैं । माना जा सकता है कि सरकार कहीं ना कहीं कुछ छुपाने की कोशिश और अपने राजनैतिक हित साधने की कोशिश कर रही है ।
इन इलाकों में कोरोना संक्रमित मरीजों के ना निकलने को लेकर प्रशासनिक तंत्र द्वारा जो तर्क दिए जा रहे हैं वे बड़े ही हास्यास्पद है और सरकार की लापरवाही की और इशारा कर रहे हैं । सूत्रों के अनुसार इन इलाकों में प्रर्याप्त मात्रा में सेंपलिंग और स्क्रीनिंग ही नहीं की गई है । या फिर आंकड़ों को छुपाया जा रहा है ।