इंदौर भाजपा में जीतू यादव की वापसी से सियासी हलचल, अब MIC पर टिकी निगाहें

इंदौर भाजपा में जीतू यादव की वापसी को सिर्फ एक पार्षद की पार्टी में वापसी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसे संगठन के बदलते राजनीतिक आकलन और स्थानीय समीकरणों में बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। जनवरी 2025 में भाजपा ने यादव को छह साल के लिए निष्कासित किया था। उस समय यादव ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ MIC से भी इस्तीफा दे दिया था।

डेढ़ साल बाद निष्कासन खत्म, उठे कई सवाल

करीब डेढ़ साल बाद भाजपा ने जीतू यादव का निष्कासन समाप्त कर दिया है। खास बात यह है कि जिस विवाद के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाया था, उसी मामले में पुलिस जांच के निष्कर्षों को आधार बनाकर उनकी वापसी का रास्ता साफ हुआ है। इस फैसले से यह संकेत भी मिलता है कि भाजपा ने उस समय की कार्रवाई को स्थायी राजनीतिक दूरी के बजाय परिस्थितियों के आधार पर पुनर्विचार योग्य माना है।

सदस्यता वापस मिली, अब राजनीतिक भूमिका का इंतजार सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या जीतू यादव को सिर्फ पार्टी की सदस्यता वापस मिली है या उनकी राजनीतिक भूमिका भी पहले जैसी होगी। यादव इससे पहले MIC यानी महापौर परिषद में प्रभावशाली भूमिका में थे। निष्कासन के बाद उनसे यह जिम्मेदारी भी चली गई थी। अब पार्टी में वापसी के बाद सबकी नजर इस बात पर है कि क्या उन्हें दोबारा MIC में जगह दी जाएगी।

MIC में वापसी हुई तो बड़ा राजनीतिक संकेत

अगर भाजपा जीतू यादव को फिर से महापौर परिषद में शामिल करती है, तो इसे सिर्फ पद की वापसी नहीं माना जाएगा। यह संकेत होगा कि संगठन ने उनकी स्थानीय राजनीतिक उपयोगिता को एक बार फिर स्वीकार कर लिया है।

वहीं अगर पार्टी सदस्यता बहाल करने के बाद भी उन्हें संगठनात्मक या निगम की जिम्मेदारी से दूर रखती है, तो इसका मतलब होगा कि वापसी तो हुई है, लेकिन पुरानी राजनीतिक हैसियत अभी पूरी तरह बहाल नहीं हुई।

राजनीतिक संदेश दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ था

2025 में कार्रवाई के दौरान भाजपा ने मामले को पार्टी की छवि और अनुशासन से जोड़ा था। अब निष्कासन खत्म होने के बाद यह संदेश सामने आया है कि संगठन परिस्थितियों में बदलाव के साथ पुराने विवाद को पीछे छोड़ने के लिए तैयार है। इसलिए असली राजनीतिक कहानी सिर्फ निष्कासन खत्म होने की नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में जीतू यादव को मिलने वाली भूमिका की है।

अब निगाह MIC और निकाय चुनाव पर

जीतू यादव की वापसी के बाद इंदौर भाजपा के भीतर अगला बड़ा फैसला MIC को लेकर माना जा रहा है। यदि उन्हें दोबारा महापौर परिषद में जगह मिलती है, तो यह उनकी राजनीतिक वापसी का दूसरा और ज्यादा बड़ा चरण होगा। अब देखना होगा कि भाजपा उन्हें फिर से सत्ता के केंद्र में लाती है या फिलहाल सिर्फ पार्टी की सदस्यता तक उनकी वापसी सीमित रखती है।
 

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