भाजपा के कोर एजेंडे से दूर टीम नितिन नवीन? महिला आरक्षण के दावे के बीच संगठन में 18.46% हिस्सेदारी पर सवाल
65 राष्ट्रीय पदाधिकारियों में 12 महिलाएं, संगठन में महिला भागीदारी को लेकर उठे सवाल
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने को लेकर लगातार जोर देती रही है। संसद में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लेकर भाजपा इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कदम बताती है। लेकिन पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की घोषित राष्ट्रीय टीम में 65 राष्ट्रीय पदाधिकारियों में 12 महिलाओं को जगह मिलने की बात सामने आई है। यह कुल हिस्सेदारी करीब 18.46 प्रतिशत होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की पैरवी करने वाली पार्टी अपने संगठन में महिलाओं को कितनी हिस्सेदारी दे रही है।
टीम नितिन नवीन में मध्यप्रदेश के नेताओं को जिम्मेदारी
नितिन नवीन की राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश के कई नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। लालसिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, गजेंद्र पटेल को राष्ट्रीय महामंत्री, वीडी शर्मा को राष्ट्रीय प्रकोष्ठ संकुल संयोजक, कविता पाटीदार को राष्ट्रीय मंत्री, बंशीलाल गुर्जर को किसान मोर्चा की जिम्मेदारी और आशीष अग्रवाल को मीडिया से जुड़ी जिम्मेदारी मिली है।
वहीं राष्ट्रीय टीम में वसुंधरा राजे सिंधिया, स्मृति ईरानी और कविता पाटीदार समेत 12 महिलाओं को स्थान मिलने की बात कही जा रही है।
33 प्रतिशत आरक्षण बनाम संगठन में 18.46 प्रतिशत
महिला आरक्षण को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से लगातार राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाता रहा है। संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
लेकिन पार्टी की राष्ट्रीय टीम में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 18.46 प्रतिशत होने के आंकड़े ने संगठन के भीतर महिला प्रतिनिधित्व को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि जब पार्टी राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात करती है, तो उसके अपने संगठन में यह हिस्सेदारी 33 प्रतिशत तक क्यों नहीं पहुंच पाई?
सवाल सिर्फ संख्या का नहीं, संगठनात्मक ताकत का भी
महिला प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहा सवाल केवल संख्या तक सीमित नहीं है। मुद्दा यह भी है कि राष्ट्रीय संगठन में शामिल महिलाओं को पार्टी के निर्णय लेने वाले शीर्ष ढांचे में कितनी प्रभावशाली भूमिका मिलती है।
क्या महिलाओं को संगठन में वही राजनीतिक और निर्णयकारी महत्व मिल रहा है, जिसकी बात भाजपा अपने राजनीतिक अभियानों में करती है? यह सवाल टीम नितिन नवीन के गठन के बाद एक बार फिर चर्चा में है।
महिला सशक्तिकरण भाजपा के संगठन में कितना प्रभावी?
भाजपा के लिए महिला सशक्तिकरण लंबे समय से राजनीतिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में महिलाओं की हिस्सेदारी को लेकर सामने आए आंकड़े पार्टी के दावों और संगठनात्मक वास्तविकता के बीच तुलना का आधार बन रहे हैं।
अब राजनीतिक बहस इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या भाजपा का संगठन उसके महिला सशक्तिकरण के घोषित एजेंडे का वास्तविक आईना है या फिर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का मुद्दा मुख्य रूप से चुनावी और राजनीतिक संदेश तक सीमित है।
फिलहाल टीम नितिन नवीन में 65 राष्ट्रीय पदाधिकारियों में 12 महिलाओं की मौजूदगी के आंकड़े के आधार पर महिला प्रतिनिधित्व करीब 18.46 प्रतिशत बताया जा रहा है। यही आंकड़ा भाजपा के 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के राजनीतिक संदेश के साथ तुलना का विषय बन गया है।