प्रदेश में विकास के लिये जो भी संभव होगा राज्य सरकार करेगी

राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री का उत्तर 

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने विधानसभा में विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए नेता प्रतिपक्ष द्वारा उठाये गये सवालों का आक्रामक शैली में बिन्दुवार जबाव दिया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने सदन में बिना तथ्यों के ही अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मेरी आखिरी साँस प्रदेश के विकास और जन-कल्याण के लिये चलेगी।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि विपक्ष का यह कहना सही नहीं हैं कि प्रदेश का कर्ज बहुत अधिक बढ़ गया हैं। वर्ष 2003 में ब्याज का भुगतान संपूर्ण राजस्व प्राप्ति का 22.44 प्रतिशत था जो अब घटकर केवल 8.25 प्रतिशत रह गया हैं। इससे स्पष्ट हैं कि आय की तुलना में ऋण काफी कम बढ़ा हैं। कांग्रेस के दस वर्षों के कार्यकाल में प्रति व्यक्ति आय 6577 रूपये से बढ़कर 13722 रूपये यानि दोगुनी हुई जबकि वर्तमान सरकार के 15 वर्ष की अवधि में 6 गुना बढ़कर 72 हजार 599 हो गयी हैं। इसी तरह वर्ष 2016-17 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 6 लाख 40 हजार करोड़ रूपये हो गया हैं, जो वर्ष 2003 में केवल 98 हजार करोड़ रूपये था। कांग्रेस सरकार के दस सालों में प्रदेश की जीएसडीपी 3.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी जबकि वर्तमान सरकार के 15 वर्ष में यह वृद्धि दर 9 प्रतिशत रही। मध्यप्रदेश के विकास के लिये जो भी संभव होगा राज्य सरकार करेगी। हम सबके विकास के मंत्र को लेकर आगे बढ़ रहे हैं, इसमें प्रतिपक्ष साथ चले। सत्ता और प्रतिपक्ष लोकतंत्र के दो पहिये हैं इन्हें रचनात्मक कार्यों में साथ-साथ चलना चाहिये। मुख्यमंत्री चौहान आज यहाँ विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास के लिये कर्ज लिया हैं। जबकि पूर्व की कांग्रेस सरकार ने कर्ज लेकर उसे बिना गारंटी के बांट दिया था। कांग्रेस के समय कुल राजस्व का 22 प्रतिशत से अधिक ब्याज के रूप में चुकाया जाता था जबकि आज कुल राजस्व का केवल 8 प्रतिशत ब्याज में खर्च करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष को तथ्यों के आधार पर बात करना चाहिये। असत्य तथ्यों से प्रतिष्ठा कम होती हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बहनों और बेटियों को शुभकामनायें देते हुये कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की प्राथमिकता हैं। इसी कारण मुख्यमंत्री कन्या विवाह और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनायें बनाई गयी हैं। आज प्रदेश में 27 लाख से अधिक लाड़ली लक्ष्मी बेटियाँ हैं। जिनकी उम्र 21 वर्ष होने पर उनके खातों में 31 हजार करोड़ रूपये जमा किये जायेंगे। बेटियों को स्कूल जाने के लिये साइकिल देने की योजना देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश में बनाई गयी थी। मध्यप्रदेश पहला राज्य था जिसमें स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। शिक्षकों जैसी नौकरियों में महिलाओं को 50 प्रतिशत तथा दूसरों विभागों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया गया हैं। अब 50 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित बहनों को पेंशन दी जायेगी। मजदूर बहनों को गर्भावस्था के दौरान 4 हजार रूपये तथा बच्चे के जन्‍म के बाद 12 हजार रूपये दिये जायेंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि महिला सुरक्षा राज्य सरकार की चिंता का प्रमुख विषय हैं। राज्य सरकार ने इस दिशा में अनेक कदम उठाये हैं। महिला अपराध के संबंध में त्वरित एफआईआर लिखने और जाँच के निर्देश हैं। बालिकाओं से दुराचार करने वालों को फाँसी की सजा का कानून बनाया गया हैं। चिन्हित अपराधों में जल्दी सुनवाई की व्यवस्था की गई हैं। जिसमें 73 प्रतिशत से ज्यादा सजा का प्रतिशत हैं तथा चार अपराधियों को फांसी की सजा दी गई हैं। राज्य सरकार समाज की मानसिकता बदलने और बच्चों को जागरूक करने का प्रयास कर रही हैं क्योंकि दुराचार के मामलों में 92 प्रतिशत अपराधी परिचित या रिश्तेदार निकलते हैं।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अब 24 घंटे बिजली मिलती हैं जबकि पहले बिजली पूरे समय नहीं मिलती थी। शिशु मृत्यु दर कांग्रेस सरकार के दस वर्षों में 85 से घटकर 82 प्रति हजार हुई इस तरह केवल तीन अंकों की कमी आई जबकि वर्तमान सरकार के शासन काल में 82 प्रति हजार से घटकर 47 प्रति हजार पर आ गई हैं। इसी तरह मातृ मृत्यु दर कांग्रेस सरकार के दस वर्षों में 441 से घटकर 379 हुई। जबकि वर्तमान सरकार के समय 379 से घटकर 221 हो गयी। इसमें सबसे तेजी से गिरावट मध्यप्रदेश हुई हैं। प्रदेश में कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया हैं। राज्य सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता सिंचाई क्षमता बढ़ाने को दी हैं। जिससे सिंचाई का क्षेत्र साढ़े सात हेक्टेयर से बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर हो गया हैं। अब इसे वर्ष 2025 तक 80 लाख हेक्टेयर किया जायेगा। वर्तमान में 16 लाख 74 हजार हेक्टेयर की क्षमता की सिंचाई परियोजनाओं का काम चल रहा हैं, 9 लाख 69 हजार हेक्टेयर क्षमता की सिंचाई परियोजना स्वीकृत हो गयी हैं तथा 11 लाख 12 हजार हेक्टेयर की क्षमता की सिंचाई परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिये एक लाख 10 हजार 500 करोड़ रूपये का निवेश किया जायेगा। पोषण आहार के लिये एक हजार रूपये प्रति माह देने का निर्णय बैगा और सहरिया जाति के हितग्राहियों के लिये किया गया हैं। खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिये उत्पादन लागत घटाने, किसानों को उपज का उचित मूल्य, प्राकृतिक आपदा में राहत और कृषि के विविधिकरण के प्रयास किये जा रहे हैं। सिंचाई क्षमता के विस्तार से उत्पादन बढ़ाया हैं। कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराकर कृषि की लागत घटायी हैं।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा हैं कि प्याज खरीदने का फैसला किसानों के हित में सोच समझकर लिया फैसला था। इससे किसानों खातों में 650 करोड़ रूपये दिये गये। अब मंदसौर और नीमच में डोडा चूरा की समस्या आई हैं जिसमें केन्द्र ने प्रतिबंध लगाकर किसानों को डोडा चूरा जलाने का आदेश दिये हैं। राज्य सरकार किसानों का नुकसान नहीं होने देगी। किसानों से डोडा चूरा खरीदकर राज्य सरकार जलायेगी। पिछले वर्ष किये गये गेहूँ उपार्जन पर दो सौ रूपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। इस वर्ष गेहूँ का समर्थन मूल्य 1735 रूपये प्रति क्विंटल हैं इसमें 265 रूपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि अलग से दी जायेगी। भावांतर भुगतान योजना किसानों को उनकी उपज का सही मूल्‍य दिलाने के लिये लागू की गई हैं। कांग्रेस सरकार के समय में लघु सीमांत किसान को दो हजार प्रति हेक्टेयर नुकसान की राहत देते थे वर्तमान में इसे बढ़ाकर 30 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया हैं यह राशि फसल बीमा के अतिरिक्त हैं। किसानों को हुये नुकसान की भरपाई की जायेगी। भावांतर भुगतान योजना में यदि किसान फसल तत्काल नहीं बेचना चाहे तो भंडारगृह में रखने का किराया राज्य सरकार देगी। किसानों को यदि तत्काल रूपयों की आवश्यकता हो तो उपज का 25 प्रतिशत मूल्य बैंक देगा, यह राशि किसान फसल बेचने के बाद वापस चुकायेगा तथा इस पर लगने वाला ब्याज राज्य सरकार देगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय जीरो बजट स्कूल खोलकर पूरी शिक्षा व्यवस्था चौपट कर दी थी। साथ ही पाँच सौ रूपये प्रति माह पर गुरूजी रखकर शिक्षा के कैडर को समाप्त कर दिया था। हमने शिक्षाकर्मियों को शिक्षक बनाने का निर्णय लिया हैं अब शिक्षकों को एक ही कैडर होगा। 12वी की परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक लाने पर राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को लैपटॉप दिया जाता हैं इसमें आधे से अधिक विद्यार्थी शासकीय स्कूलों के होते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता के लिये राज्य सरकार पूरी गंभीरता से प्रयास कर रही हैं। प्रदेश में वर्ष 1964 के बाद से कोई नया शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं खुला था, वर्तमान सरकार के समय सागर में मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ। अब सात नये मेडिकल कॉलेजों में अगले सत्र से अध्ययन प्रारंभ हो रहा हैं। राज्य सरकार ने नि:शुल्क दवाई वितरण का कार्य शुरू किया हैं। मजदूरों का इलाज निजी चिकित्सालय में कराने पर भी राज्य सरकार व्यय करेगी। राज्य सरकार गरीब कल्याण एजेंडा को प्राथमिकता से क्रियान्वित कर रही हैं। प्रदेश के साढ़े पाँच करोड़ गरीबों को एक रूपये प्रति किलो गेहूँ और चावल उपलब्ध कराया जा रहा हैं। प्रदेश में कोई गरीब बिना आवास के नहीं रहेगा। गरीब मजदूरों के बच्चों को पहली से पीएचडी तक नि:शुल्क शिक्षा दी जायेगी। उज्जवला योजना में गरीब महिलाओं को धुएँ से मुक्ति मिली हैं। तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित करने वाले आदिवासियों को जूते-चप्पल और पीने के पानी की कुप्पी उपलब्ध करायी जायेगी। गरीबों से बिजली के बिल 200 रूपये प्रतिशत माह फ्लैट रेट से लिये जायेंगे। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गरीबों के लिये 17 लाख आवास बनकर तैयार हैं तथा इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 15 लाख और बनाये जायेंगे। हर गरीब पक्के मकान का मालिक हो यह राज्य सरकार का संकल्प हैं।

राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वे में चुने गये देश के सौ शहरों में से 22 मध्यप्रदेश के हैं। केन्द्र सरकार द्वारा लगातार चार वर्ष से बेस्ट टूरिज्म अवॉर्ड प्रदेश को दिया जा रहा हैं। राज्य सरकार का फोकस रोजगार पर हैं। इंदौर में टीसीएस और इंफोयसिस के कैंपस शुरू हो गये हैं। भोपाल जबलपुर और ग्वालियर में आईटी पार्क बनकर तैयार हैं। पंजाब की सभी बड़ी टेक्सटाइल कंपनियाँ प्रदेश में आ रही हैं। पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 2 लाख करोड़ रूपये का निवेश आ रहा हैं। बड़े उद्योगों में दो लाख तथा छोटे उद्योगों में 15 लाख युवाओं को रोजगार मिला हैं। पिछले वर्ष 6 लाख युवाओं ने स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लिया हैं। इस वर्ष साढ़े सात लाख युवाओं को स्वरोजगार मिलेगा। प्रदेश में नौकरियों में प्रदेश के युवाओं को प्राथमिकता दी जायेगी। शीघ्र ही प्रदेश में शासकीय विभागों में 90 हजार नौकरियाँ निकलने वाली हैं। इसके अलावा साढ़े सात लाख युवाओं को कौशल उन्नययन कर रोजगार से लगाया जायेगा। नर्मदा सेवा यात्रा के माध्यम से नदी एवं पर्यावरण संरक्षण के लिये जागरूकता पैदा की गई हैं। यात्रा के दौरान 6 लाख 63 हजार पेड़ लगाये गये हैं। जिसमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा जीवित हैं। नर्मदा के किनारे के सभी शहरों में दो सालों में सीवेज प्लांट तैयार हो जायेंगे तथा नर्मदा में सीवेज नहीं जायेगा। शीघ्र ही बांद्राभान में नदी महोत्सव आयोजित किया जायेगा। वर्ष 2024 तक मध्यप्रदेश के हिस्से के पूरे नर्मदा जल का उपयोग किया जायेगा यह राज्य सरकार का संकल्प हैं। राज्य सरकार शहरी क्षेत्र में विकास के लिये 90 हजार करोड़ रूपये खर्च कर रही हैं। गांव में नल जल योजनाओं के माध्मय से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा। सभी 378 शहरों में नल-जल योजनाओं का काम चल रहा हैं। प्रदेश में कानून व्यवस्था के क्षेत्र में डकैत, नक्सलवाद और सिमी के आतंकवाद को ध्वस्त किया गया हैं। प्रदेश में कर्मचारियों का वेतन पिछले वर्षों में कई गुना बढ़ा हैं। कर्मचारी शासन के अभिन्न अंग हैं उनकी न्यायोचित सभी मांगों को पूरा किया जायेगा। राज्य सरकार सबके साथ सबके विकास के मंत्र को लेकर बढ़ रही हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)

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