कर्ज लेकर घी पी रही भाजपा सरकार: के.के. मिश्रा
खबर नेशन / Khabar Nation
सरकारी खजाने से करोड़ों रूपये खर्च कर सरपंचों को भ्रमित कर सैर कराने बुलाया भोपाल
बौखलाये शिवराज जी आगामी चुनाव की जमावट करने अपने कामकाज छोड़, जनता को बरगलाने की नाकाम कोशिश में लग गये हैं: के.के. मिश्रा
भोपाल: प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष के.के. मिश्रा ने आज राज्य सरकार द्वारा आयोजित किये गये पंचायत सरपंचों के महासम्मेलन को महज एक राजनैतिक आयोजन करार देते हुए कहा है कि कर्ज लेकर घी पी रही भाजपा सरकार ने इस सम्मेलन के आयोजन के लिए सरकारी खजाने से करोड़ों रूपये की राशि खर्च कर 23000 सरपंचों को भ्रमित कर केवल अपनी वाहवाही लूटने के लिए उन्हें सरकारी खर्च पर सैर करने भोपाल बुलाया है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी सन्निकट पराजय को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पूरी तरह से बौखलाये हुये हैं और वे अभी से विधानसभा चुनाव की जमावट करने अपने सरकारी कामकाज छोड़, जनता को बरगलाने की नाकाम कोशिश में लग गये हैं, लेकिन अब जनता भाजपा के दूर के ढोल पीटने की राजनीति को पूरी तरह समझ चुकी है, प्रदेश की जनता अब भाजपा के झांसे में आने वाली नहीं।
श्री मिश्रा ने कहा कि राजधानी भोपाल में आज हुये सरपंचों के महासम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान सरपंचों को क्या यह बतायेंगे कि प्रदेश में किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा है? लचर कानून व्यवस्था और बेखौफ अपराधियों से प्रदेश की बहन-बेटियों की आबरू पर संकट के बादल छाये रहते हैं? बेरोजगार युवा रोजगार के लिए भटक रहा है? या फिर यह बतायेंगे कि प्रदेश में बेलगाम भ्रष्टाचार से जनता त्रस्त है? या फिर महंगाई की मार से हर घर बीमार है? रसोई गैस, बिजली बिलों और पेट्रोल-डीजल से प्रदेश की जनता में हाहाकार है? और शिवराज सरकार, उसके मंत्री और भाजपा नेता मालामाल हैं। उन्होंने शिवराजसिंह चौहान से पूछना चाहा है कि आखिरकार छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान उत्तरप्रदेश और कश्मीर की अपेक्षा मध्यप्रदेश में ही सरपंचों को इतना कम महज 1750/- रूपये मानदेय क्यों दिया जा रहा है? तत्कालीन दिग्विजय सरकार द्वारा सरपंचों को दिये अधिकारों को भाजपा सरकार ने क्यों छीना?
श्री मिश्रा ने कहा कि यदि शिवराज सिंह सरकार सरपंचों की इतनी ही हितैषी बन रही है तो सरपंचों को कम से कम 9 हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय दे? 50 लाख रू. तक के निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान करे? सरपंचों को डराने-धमकाने वाली पंचायती राज की धारा-40 समाप्त करे? हर तीन माह में जिला कलेक्टर सरपंचों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं को सुने? सरपंचों को रेत की रॉयल्टी में अधिकार देना चाहिए।
श्री मिश्रा ने कहा कि सरकार बताये पंचायतों में 6 माह से मनरेगा सामग्री राशि का भुगतान क्यों नहीं किया गया? उन्होंने कहा कि लाठी-डंडों से पुलिस की मार पड़वाने वाले और दो वर्ष पूर्व तत्कालीन सरपंचो से मिलने तक के लिए कतराने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी को आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरपंचों की याद अचानक क्यों आ गई? मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की यह स्कीम सरपंचों के माध्यम से जनता को बरगलाकर भ्रमित करने की ओर इंगित कर रही है।
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गौरव चतुर्वेदी
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