भाजपा का प्रदेश सरकार के खिलाफ किसान आक्रोश आंदोलन


प्रदेश की जनता कांग्रेस के पास सौगात लेने के लिये नहीं गई थी, जब आपके पास योजना ही नहीं थी तो किसानांं के कर्जमाफी की घोषणा क्यों की-श्रीमती सुमित्रा महाजन
बस्तियों में बिजली बड़े-बडे बिल भेजना जनता के साथ धोखा है-शंकर लालवानी
संबल जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को बंद कर गरीब जनता को परेशान किया जा रहा है-गोपीकृष्ण नेमा
प्रदेश सरकार शीघ्र ही किसानों की फसलों का मुआवजा दे-अशोक सोमानी
भाजपा कार्यकर्ताओं ने बिजली के बिलों की होली जलाई
खबर नेशन / Khabar Nation
इंदौर /
भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक सोमानी, नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा ने बताया कि हर मोर्चे पर विफल प्रदेश कांग्रेस सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के द्वारा आज कलेक्टर कार्यालय पर विशाल किसान आक्रोश आंदोलन कर बिजली के बिलों की होली जलाकर प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर लोकसभा पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार जब से प्रदेश में आई है, जनता बेहाल है। झूठ व धोखे के साथ बनाई गई इस सरकार ने जनता से किये गये किसी भी वादे को अभी तक पूरा नहीं किया है। जिस तरह सरकार बनाने के लिये कांग्रेस के नेताओं ने किसानों, बेरोजगारों और प्रदेश की आम जनता को गुमराह और भ्रम फैलाकर भ्रमित किया, लेकिन आज इस छोटे से कार्यकाल मेंं ही जनता परेशान हो चुकी है। हर क्षेत्र में इस सरकार के द्वारा वोट प्राप्त करने के बाद किसी भी वादे को पूरा नहीं किया गया। इस आंदोलन के माध्यम से हम प्रदेश सरकार को बाध्य करेंगे कि उसने जनता से जो वादे किये है, उन्हें हर हाल में पूरा करें।
आपने कहा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस के पास चुनाव के समय सौगात लेने के लिये नहीं गई थी। जब कांग्रेस के पास कोई योजना नहीं थी तो फिर किसानों का दो लाख तक का कर्ज, बेरोजगारों को भत्ता देने की घोषणा कैसे कर दी। जो आपने लोक लुभावन वादे किये थे और अब पूरा करने समय आया है तो कांग्रेस के नेता आनाकानी कर रहे है। जनता अब इनके झूठ और फरेब को अच्छी तरह से समझ गई है और आने वाले दिनों में कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ किसानों का ही आंदोलन नहीं है, यह आंदोलन प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन है। किसानों के साथ आम जनता व बस्तियों में निवासरत गरीब लोगों को जिस तरह बिजली के बड़े-बडे बिल थमाये जा रहे है। जो कि अनुचित है और इसीलिये जनता आक्रोशित है। पिछले दिनों प्रदेश के किसानों पर भारी वर्षा के कारण भीषण बाढ़ का कहर टूटा इस बाढ़ ने मध्यप्रदेश के 32 जिलों के किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। किसानों की सोयाबिन, मूंग, उड़द, कपास और मक्का जैसी खरीब की फसल जो खेतों में खड़ी थी वह पूरी तरह नष्ट हो गई और घर में रखा गेहूं सरसो, चना भी बाढ़ की भेंट चढ़ गया। बाढ़ का कहर ऐसा था कि इन 32 जिलों के किसानों के मकान ढह गये और हजारों मवेशी भी बह गये। दुर्भाग्य से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को तो छोड़िए, किसी मंत्री ने भी बाढ़ पीड़ितों के बीच जाने की संवेदनशीलता नहीं दिखाई। इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी की बार-बार मांग के बावजूद बाढ़ पीड़ितों का सर्वे भी ठीक-ठाक नहीं किया गया। सर्वे में इतनी देर कर दी गई की किसान मजबूरन रबी फसल की जुताई करने लगा। परिणामतः अब उसकी नष्ट इुई खरीफ फसलों का सर्वे भी नहीं हो सकेगा।
आज प्रदेश मेंं किसानों को कृषि कार्य करना दुभर हो गया वर्तमान सरकार ने अपने देश में युरिया का भरपूर उत्पादन होने के पश्चात भी अपनी अकमर्ण्यता के कारण युरिया की कमी बताते हुए युरिया खाद की कमी बता दी है। जिससे किसानों को रबी की फसल बोने में भी समस्यां खड़ी हो गई है और किसानों पर प्रकृति के साथ-साथ वर्तमान निक्कमी सरकार की किसान विरोधी नीतियों की मार पड़ रही है तथा वह अपने आप को असहाय महसूस कर रहे है।
जिला अध्यक्ष अशोक सोमानी ने जब से मध्यप्रदेश की सरकार आई है तभी से प्रदेश के किसानों पर उपेक्षा के बादल मंडराने लगे थे। कांग्रेस ने चुनाव से पहले जो वादे किये थे वह सभी वादांं से मुकर गई है। इतना ही नहीं बाढ़ की चपेट में आकर अपनी फसलों को पूरी तरह बर्बात होते देखने के बाद किसान असहाय और ठागा सा महसूस कर रहा है। पूरे 32 जिलों में बाढ़ की विभीषिका ने फसलों को चौपट कर दिया, लेकिन सरकार ने मुआवजा देने को छोडिए ठीक से सर्वे कराना भी आवश्यक नहीं समझा।
कर्जमाफी से धोके से जुझ रहे किसानों के लिये बाढ़ का कहर दुखों के पहाड़ जैसा साबित हुआ, लेकिन अंसवेदनशील सरकार के कानों पर जू तक नहीं रेंगी। उल्टे किसानों को अनाप शनाफ बिजली के बिल थमा दिये गये है। ये बिल उसी कांग्रेस की सरकार ने थमाये है जिसने चुनाव के पहले बिजली के बिल हाफ करने का वादा किया था। पूरा मध्यप्रदेश जानता है कि भारतीय जनता पार्टी के शासन में किसानों का कल्याण प्राथमिकता के आधार पर किया जाता था। आज भी केन्द्र की सरकार किसानों के कल्याण के लिये अनेक योजनाएं लेकर आई है, जिनका क्रियान्वयन मध्यप्रदेश में राजनैतिक विद्वेष के के कारण नहीं हो पा रहा है। इसलिये भारतीय जनता पार्टी ने तय किया है कि हम किसानों की समस्यांओं को लेकर इस सरकार को चेन से नहीं बैठने देंगे। किसान आक्रोश आंदोलन के दौरान बिजली के बिलों की होली भी जलाई गई। इसी के साथ किसान अपने साथ खराब सोयाबिन लेकर आये थे वो भी जलाई गई। कार्यक्रम गरीब बस्तियों की महिलाएं हजारों और लाखों रूपये के आये हुए बिजली बिल लेकर आई थी।
 नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा ने कहा कि किसान आक्रोश आंदोलन किसानां की 2 लाख तक की ऋण माफी, किसानों की नष्ट हुई फसलों का मुआवजा और बड़े हुए बिजली के बिलों को लेकर किया गया है। प्रदेश सरकार के द्वारा संबल योजना जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं को बंदकर गरीबों व आमजन को किसी भी तरह की राहत नहीं देना, यह सरकार का कैसा कदम है। आपने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सोई हुई पार्टी नहीं है, हमारी पार्टी जनता के हर दुख दर्द में साथ खड़ी है। हमने हमेशा जनता के हित में संघर्ष किया हैं, सतत लड़ना, संघर्ष करना और सरकार की विफलता पर उसे कटघरे में खड़ा करना हमारा काम है। यह जनता का आक्रोश है यदि प्रदेश सरकार जनता के हित में कार्य नहीं करेगी, तो हम ऐसे ही आंदोलन जनता के हित में करते रहेंगे।
किसान आक्रोश आंदोलन को वरिष्ठ नेता बाबूसिंह रघुवंशी महापौर श्रीमती मालिनी गौड, विधायक महेन्द्र हार्डिया, आकाश विजयवर्गीय, मनोज पटेल, डॉ. राजेश सोनकर, मधु वर्मा, रवि रावलिया, उमानारायण पटेल, कविता पाटीदार, गोपालसिंह चौधरी, डॉ. रीता उपमन्यु, कंचनसिंह चौहान व वरिष्ठ नेतागणों ने भी संबोधित किया।
 किसान आक्रोश आंदोलन में प्रमुख रूप से मुकेशसिंह राजावत, गणेश गोयल, घनश्याम शेर, कमल बाघेला, अभिषेक बबलू शर्मा, जे पी मूलचंदानी, जयंत भिसे, जयदीप जैन, नानूराम कुमावत, सुमित मिश्रा, हरप्रीतसिंह बक्षी, गोलू शुक्ला, अजयसिंह नरूका, गुलाब ठाकुर, मुकेश मंगल, वीणा शर्मा, शैलजा मिश्रा, कमल वर्मा, बहादूरसिंह डाबी, महेन्द्र ठाकुर, सुभाष महोदय, शैलेष गिरजे, अनंत पंवार, विष्णुप्रसाद शुक्ला, देवकीनंदन तिवारी प्रदीप नायर, गौरव रणिदेव,, मुकेश जरिया, मुकेश चौहान, दयाराम चौधरी, मुकेश सूरा, लक्ष्मीबाई, मुकेश पंवार, घनश्याम शेर, रामकिशोर शुक्ला, श्रवण चावड़ा, रामस्वरूप गेहलोद, भारतसिंह आंजना, अभिलेश ठक्कर, घनश्याम नारोलिया, दिनेश पटेल, कैलाश भांगडिया, गणेश मिश्रा, भगवान परमार, सुरेश जाट, लखन पटेल, सदाशिव पारिया, श्री सुनील तिवारी, श्री मनोज पाटीदार, धन्नालाल निनामा, सत्यनारायण पटेल, आशाराम सिसोदिया, भरत आंजना, कैलाश भांगडिया, जालमसिंह सोलंकी, सुरेशसिंह धनखेडी, मुकेश पटेल, अंतरसिंह दयाल और चन्द्रशेखर चौधरी, पदमा भोजे, मनस्वी पाटीदार, श्रवणसिंह चावड़ा, प्रकाश राठौर, राजेश शुक्ला, श्रद्धा दुबे, सुनिल वर्मा, मनोहर मेहता, विजय मालानी, दिनेश सोनगरा, महेश कुकरेजा, निर्मल वर्मा, सुरजीतसिंह वालिया, निरंजनसिंह चौहान, दिलीप शर्मा, सुधीर देडगे, संजय कटारिया, मनोज मिश्रा, गोविन्द पंवार, राजेश चौहान, कंचन गिदवानी, रोहित चौधरी, पं.महेश जोशी, आदर्श सचान, दीपक जैन टीनू, राजेश वर्मा, राहुल वाधवानी सहित बड़ी संख्या में किसान व भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।
किसान आक्रोश अांदोलन का संचालन महामंत्री चिन्टू वर्मा ने किया एवं आभार महामंत्री गुमानसिंह पंवार ने माना।

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