मशीन कभी भी मनुष्यों का स्थान नहीं ले सकती’: लोक सभा अध्यक्ष

खबरनेशन/ Khabarnation 

        31 अक्तूबर से 2 नवम्बर 2018 तक ब्यूनस आयर्स में नेशनल कॉंग्रेस ऑफ अर्जेन्टीना और अंतर संसदीय संघ द्वारा आयोजित संसदीय मंच और अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में 'फ्यूचर ऑफ वर्क' विषय पर विचार व्यक्त करते हुए, लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि मशीन कार्य को स्वचालित कर सकती है, लेकिन मानव केवल कार्य अथवा नौकरी के लिए ही नहीं बना है।  उसे  प्रेम, देखभाल और सहानुभूति की भी आवश्यकता है।  अतः मशीन कभी भी मनुष्यों का स्थान नहीं ले सकती।  ।

          उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफ़िश्यल इंटेलिजेंस (ए आई), रोबोटिक्स, ब्लॉक चेन इत्यादि जैसी स्वचालित प्रौद्योगिकी (ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी) से पड़ने वाले प्रभाव के बारे में विशेषज्ञों की राय बटी हुई है । यद्यपि कौशलरहित जनशक्ति पर नौकरियों को खोने का खतरा मंडरा रहा है परंतु नए विकसित होने वाले क्षेत्रों में नई नौकरियां भी सृजित होगी और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा । उन्होंने कहा कि कार्य करने के स्थान और समय में बदलाव करने से नए अवसर उत्पन्न होंगे और इससे महिलाएं और दिव्यांग सशक्त बनेंगे तथा समावेशी विकास में भी वृद्धि होगी ।

          यह देखते हुए कि भविष्य में लोग बहुत सक्षम मशीनों के साथ कार्य करेंगे जिसके कारण कौशल संबंधी आवश्यकताओं में बदलाव आएगा, उन्होंने यह कहा कि मानव और मशीनी प्रतिभा को एक दूसरे का विरोधी समझने के बजाय, एक दूसरे का पूरक माना जा सकता है । इस संदर्भ में, उन्होंने महसूस किया कि विशेष रूप से सरकार को निजी व्यवसाय और छोटे-मोटे आर्थिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए रोजगार की परिभाषा बदलने पर विचार करना चाहिए । इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी महसूस किया एक व्यवसायी के रूप में कोई व्यवसाय आरंभ करने और उसे बंद करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए व्यवसाय आरंभ करने और दिवालियापन संबंधी नियमों में बदलाव किया जा सकता है ।

          भारत के विषय में बात करते हुए श्रीमती महाजन ने यह कहा कि सरकार ने अवसरंचना, राजमार्गों, नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी परिवहन, सस्ते आवास आदि जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है । उन्होंने यह कहा 'स्टैंड - अप इंडिया; स्टार्ट-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया जैसी नवीन योजनाओं के माध्यम से उद्यमिता क्षेत्र को पूरा समर्थन दिये जाने से भारत में भी आजीविका हेतु नौकरियों और रोजगार के अवसरों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने लगा है ।

          उन्होंने यह कहा कि संसद सदस्यों पर इस बात की बड़ी ज़िम्मेदारी है कि वे अपनी-अपनी सरकारों से इस बात के लिए आग्रह करें कि वे उभरती हुई चुनौतियों पर गंभीरतापूर्वक ध्यान दें । उन्हें लोगों के जीवन पर प्रौद्योगिकीय उन्नति और स्वचालन के प्रभाव के अनुरूप सक्षम कानून और नीतियाँ बनानी चाहिए ।

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