दिग्विजय के चुप रहने की असल वजह कहीं ये तो नहीं...?

 

खबर नेशन / Khabar Nation

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी मध्यप्रदेश में चुनावी दौरे पर हैं । मंच पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह नजर तो आ रहे हैं, लेकिन चुप हैं। राजनैतिक विश्लेषक,  दिग्विजय समर्थक, काँग्रेस का कार्यकर्ता,आम जनता अपने अपने कयास लगा रही है। दिग्विजय को बंटाधार का तमगा देने वाली भारतीय जनता पार्टी मनमसोस कर चिंतन में है कि आखिर दिग्विजय को घेरे कैसे? दिग्विजय भाजपा के शुभंकर है। जितना नुकसान भाजपा को अपने पन्द्रह साल के शासनकाल की नाकामियों से नहीं होना है। उससे ज्यादा लाभ दिग्विजय सिंह के सामने आने पर उनके कार्यकाल की नाकामियों को उठाकर कमाया जा सकता है। 
कोई कह रहा है काँग्रेस में दिग्विजय को किनारे कर दिया गया है , कोई कह रहा है कि यह काँग्रेस की रणनीति का हिस्सा है। इसके बावजूद दिग्विजय मध्यप्रदेश की हर विधानसभा क्षेत्र में जा रहे है। मध्यप्रदेश काँग्रेस समन्वय समिति के अध्यक्ष की हैसियत से नाराज काँग्रेस कार्यकर्ताओं के मन के मैल को मिटाने का काम कर रहे हैं। अपने समर्थकों को कह चुके हैं कि मैं किसी की विधानसभा चुनाव की टिकट की तरफदारी नहीं करुंगा पर काँग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं और हर सीट पर मजबूती से अपनी राय भी रख रहे हैं। इसके बाद भी राहुल के दौरे में चुप , मंच पर राहुल गाँधी के आने के पहले या मौजूद रहने के दौरान कोई भाषण नहीं । आखिर वजह क्या है?
जब इसके कारण तलाशने की कोशिश की तो उनके साथ काम कर चुके राजनैतिक समर्थकों की बजाय सरकारी अफसरों का तर्क गौर करने लायक नजर आया ।
            हो सकता है इस तर्क के चलते शायद दिग्विजय मौन धारण किए हों। उक्त अधिकारी ने एक अनौपचारिक चर्चा में दिग्विजय सिंह के साथ कार्य करते हुए तीन उदाहरण बताएं। 
जब मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री और स्वर्गीय दलबीर सिंह कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष हुआ करते थे,तब अखिल भारतीय काँग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरे पर अनुपपुर आईं थीं। उस दौरान मंच से सिर्फ सोनिया गांधी और दलबीर सिंह के भाषण हुए थे। कार्यक्रम के बाद जब उक्त अधिकारी ने दिग्विजय सिंह से भाषण न देने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष कभी कभी प्रदेश के दौरे पर आती है ऐसे मैं मेरे द्वारा भाषण देना गरिमापूर्ण नहीं माना जाएगा।
दूसरी बार जब मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ का विभाजन होने के उपरांत दोनों प्रदेशों के काँग्रेस कार्यकर्ताओं का संयुक्त सम्मेलन जबलपुर में हुआ , तो वहां छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने तो सम्मेलन को संबोधित किया लेकिन दिग्विजय ने यहाँ भी संबोधन से दूरी बनाए रखी।
तीसरी बार खजुराहो में पर्यटन को लेकर कॉन्फ्रेंस का आयोजन में सोनिया गांधी ने शिरकत की तो प्रर्दशनी में सोनिया को संपूर्ण विवरण तात्कालीन पर्यटन मंत्री अजय सिंह "राहुल ने दी । उस वक्त जब दिग्विजय सिंह को उक्त अधिकारी ने यह कहा कि इस अवसर पर आपको पूरा विवरण बताना चाहिए । दिग्विजय ने फिर वही बात दोहरा दी ।

समाचार जारी किए जाने के बाद दिल्ली में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर चल रही सी.ई.सी बैठक में दिग्विजय और ज्योतिरादित्य सिंधिया के राहुल गांधी के सामने ही लड़ने के समाचार हैं । हालांकि सिंधिया और दिग्विजय दोनों ने ट्विटर पर ऐसी घटना होने का खंडन करते हुए इसे भाजपा का दुष्प्रचार बताया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर सूची को अंतिम रूप देने की कवायद भी शुरू की है।जो किसी गड़बड़ी की और संकेत कर रही है।

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