तो क्या शिवराज पांच साल विधायक-मंत्रियों को ब्लैकमेल करते रहे ?

 

 या फिर टिकिट वितरण में शिवराज की राय दरकिनार की गई

खबर नेशन / Khabar Nation

मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2018 के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है । पहली सूची में 177 नाम शामिल हैं । इस सूची में शामिल मौजूदा विधायकों में से लगभग 34 विधायक को मौका नहीं दिया गया है । जिनमें तीन मंत्री शामिल हैं । नवकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री हर्ष सिंह के स्वास्थ्य के चलते उनके पुत्र विक्रम सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है । वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने पहले ही पार्टी से उनकी जगह उनके बेटे मुदित शेजवार को प्रत्याशी बनाने का आग्रह किया था । तीसरे मंत्री के तौर पर नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह का नाम नहीं है जो किसी अन्य सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहती हैं। जहां से अभी प्रत्याशी घोषित नहीं हुआ है ।
चार नये प्रत्याशी ऐसे हैं जिनमें से दो कांग्रेस से सशर्त टिकट के आश्वासन पर भाजपा में आए हैं । दो निर्दलीय विधायक हैं जिन्हें भी भाजपा ने प्रत्याशी बनाने का आश्वासन दिया था ।
इस आधार पर देखा जाए तो सत्तर फीसदी चेहरों को फिर से मौका दिया गया है । इसी प्रकार 2013 और उपचुनावों में हारे हुए अनेक प्रत्याशियों को फिर से मौका दिया गया है । वास्तविक आकलन किया जाए तो इस सूची के मात्र बीस फीसदी चेहरे ही बदले गए हैं ।
गौरतलब है कि पिछले चार साल से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और संगठन के आला नेता विधायकों के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी के ढिंढोरा पीटते हुए टिकिट काटने की धमकी कई अवसरों पर देते रहे हैं। सरकार को गुप्तचर विभाग ने भी विधायकों की मौजूदा स्थिति खराब बताते हुए रिपोर्ट सौंपी थी । राजनैतिक हलकों में माना जा रहा था कि मौजूदा लगभग आधे विधायक इस बार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के  कई बड़े नेता मीडिया से अनोपचारिक तौर पर इस बात को कह गए कि अगर सरकार बनाना है तो 70-80 चेहरे बदलना पड़ेगें ।
अगर सूची को देखा जाए तो पार्टी के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं । इसी के साथ ही पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं को भी यह आश्वासन दिया जाता रहा कि भाजपा के राष्ट्रीय संगठन के सर्वे के आधार पर विधानसभा चुनाव में टिकिट वितरण किया जाएगा। 
सवाल यह है कि अगर विधायकों के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी थी तो भाजपा ने कैसे ऐसे टिकिट बांट दिए?

 क्या अमित शाह के सर्वे में मौजूदा चेहरे फिट पाए गए ?
क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इंटेलिजेंस रिपोर्ट को राष्ट्रीय संगठन ने दरकिनार कर दिया ?
कहीं ऐसा तो नहीं मुख्यमंत्री शिवराज ने अपनी छवि को बनाए रखने के लिए एंटी-इंकम्बेंसी का ठीकरा विधायकों के सिर फोड़ दिया हो ? यह भी हो सकता है कि सरकार के खिलाफ उठने वाली विधायकों   की आवाज को दबाने उन्हें एंटी-इकंम्बेंसी की आड़ में ब्लैकमेल किया गया हो

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