उपेक्षा के आरोप से बचने के लिए आनन फानन में बनाई आज़ाद जी की फर्जी गुफा के विरोध में ओरछा में मौन धरना
कमलनाथ सरकार ने जिम्मेदारी से बचने के लिए बनवाई अमर शहीद आज़ाद जी की नकली गुफा , शहीदों के स्मारकों का भूगोल बदलना असहनीय , 1940 के शिलालेख को भी झुठला रहा है प्रशासन , यदि वास्तविक गुफा तक विकास और फर्जी बनाई गुफा को पूर्ववत नहीं किया तो 6 मॉर्च से मौन धरना: सुमित ओरछा
पूरे देश से आएंगे देश भक्त युवा सरकार के षड्यंत्र का विरोध करने : सुमित ओरछा
ओरछा स्तिथ आजादपुर वार्ड स्तिथ अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद जी के अज्ञातवास स्थल जहाँ चंद्रशेखर आज़ाद जी लगभग 2 वर्ष तक रहे ,वहाँ आज़ाद जी के तीन प्रमुख निशानियां हैं जो देश भर के युवाओं के लिए क्रांति तीर्थ के समान है पहली उनकी कुटिया जहां उनका बिस्तर और मिट्टी का तकिया आज भी देखने को मिलता है , दूसरी उन्होंने जो कुँआ अपने हाँथ से खोदा था और तीसरा लगभग एक किमी जंगल मे पीछे वो गुफा जो अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद जी के शस्त्र अभ्यास और छिपने की जगह रही थी ।
ओरछा को जब यूनेस्को द्वारा भारत सरकार के प्रस्ताव पर वर्ल्ड हेरिटेज सिटी की अस्थाई सूची में जगह मिली और ओरछा विकास की योजना बनी तब आज़ाद स्मारक पर धरना देकर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया गया था और प्रशासन ने आश्वस्त किया था कि आज़ाद जी की गुफा , कुटिया और कुँआ का समुचित विकास किया जाएगा इसके बाद ही धरना समाप्त किया गया था ।
लेकिन जब सभी जगह विकास कार्य होने के दौरान प्रशासन ने आज़ाद स्मारक की मूल स्थानों की अनदेखी की और बाद में निर्मित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भवन की रंगाई पुताई को ही अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लिया तब प्रशासन को पुनः विषय याद दिलाया और समाचार पत्रों में विषय प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद सरकार ने विषय की लीपापोती करने के लिए उपर्युक्त स्थानों का विकास न कर एक नकली जगह पर कुटिया के बगल में गुफा तैयार की और उसका उद्घाटन 27 फरवरी को अभिनेता मुकेश खन्ना से करवा दिया । यह एक षड्यंत्र है मुख्य गुफा के स्थान पर अन्यत्र पोतनी की खान को आज़ाद जी की गुफा बताना एक क्रांति तीर्थ का अपमान और भविष्य में उसके महत्व को समाप्त करने का षड्यंत्र है जिससे भविष्य में आने बाली पीढ़ी उस असली स्थान को भूल जाएगी एवं पोतनी खुदी जगह को ही असली गुफा मानेगी , इसलिए यह बहुत बड़ी त्रुटि है और उसका सुधार परमावश्यक है ।
#6 मॉर्च से होगा मौन धरना..
इसलिए तीन मांगों को लेकर प्रशासन को माँग की है कि ..
1. आज़ाद जी की कुटिया ,गुफा , और कुँआ का समुचित रंगरोगन किया जाए वहाँ बोर्ड लगाए जाएं...
2. नकली गुफा को अविलंब पूर्ववत कर दिया जाए
3. आज़ाद गुफा एवं कुटिया के विकास के सम्पूर्ण विकास का तय समय के अंदर विकास करवाने का लिखित आश्वासन दिया जावे...
4. नमस्ते ओरछा के दौरान आज़ाद जी की असली गुफा जिसपर 1940 का शिलालेख लगा है उसे आगंतुक अतिथियों को दिखाया जाए।।
*स्वर्गीय इंदिरा जी के बाद उस स्थान की सुध 2009 में ही ली गयी थी : सुमित ओरछा
मेरी राजनैतिक संबंद्धता के कारण सरकार से जुड़े नेता कह रहे हैं कि 15 वर्ष कहाँ थे?? तो उनसे भी कहना चाहता हूँ कि यह स्मारक जीर्ण शीर्ण एवं उपेक्षा का शिकार था यह शराबखोरी और अनैतिक कार्यों का अड्डा बन चुका था ,इस स्थान पर मरम्मत ,पुताई , लाइट फिटिंग ,सड़क ,पेवर्स एवं बृक्षारोपण कार्य इसी दौरान कराए गए एवं कुटिया के विकास की योजना भी बनी और आज़ाद जी का बलिदान दिवस कार्यक्रम में भी संस्कृति विभाग हमेशा अपनी भूमिका का निर्वहन करता रहा था ,जिसे सरकार बदलते ही बन्द कर दिया गया । गुफा तक गयी अधूरी सड़क का कारण बीच मे आने बाली नदी पर पुलिया निर्माण का होना है जो प्रक्रियाधीन थी , जिसे व्यवस्था परिवर्तन के साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया गया । 2006 से 11 तक भी नगर परिषद में कांग्रेस रही तब भी एक पैसे का विकास कार्य उस स्थान पर नहीं हुआ , स्व. लक्ष्मी नारायण नायक जी वर्षों तक काँग्रेस नेताओं को पत्र लिख कर उपरोक्त स्थान के विकास की माँग करते रहे ...परंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया।