छिन्दवाड़ा में कमलनाथ के खिलाफ किसानों का बिगुल

 

अदानी पाॅवर प्लाॅट से प्रभावित किसानों की जमीनें  को वापस की जाए 

किसानों की महापंचायत डाॅ. सुनीलम के मुख्य अतिथ्य में सम्पन्न हुई
खबर नेशन / Khabar Nation

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ किसानों ने बिगुल बजा दिया है । किसान संघर्ष समिति के बैनर तले पूर्व विधायक डाॅ. सुनीलम ने अदानी पाॅवर प्लाॅट से प्रभावित किसानों की जमीनें  को वापस की जाने की मांग की है । गौरतलब है कि  अदानी ग्रुप को मुख्यमंत्री कमलनाथ का निकटवर्ती माना जाता है ।
किसान संघर्ष समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष एड. आराधना भार्गव ने बताया कि ग्राम हीवरखेड़ी (छिन्दवाड़ा) में अदानी पाॅवर प्लांट से प्रभावित किसानों की बैठक गया प्रसाद वर्मा की अध्यक्षता एवं पूर्व विधायक डाॅ. सुनीलम के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुई। हीवरखेड़ी में अदानी पाॅवर प्लाॅट से प्रभावित चैसरा, धनौरा, डागावानी पिपरिया, तथा टेकाथांवरी के किसान उपस्थित थे। अनील वर्मा ने महापंचायत को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारे परिवार की 9 एकड़ जमीन अदानी पाॅवर प्लांट में चली गई, जमीन अधिग्रहित करते समय तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने कहा था कि अधिग्रहित परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जायेगी। जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही सन् 1987-88 में की गई थी, ना तो थर्मल पाॅवर बना न नौकरी मिली। मुलताई से आए किसान संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष जगदीश दौड़के जी ने कहा कि सरकारें किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रही है, किसानों का कर्जा माफ करेंगें कहकर मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई सत्ता में बैठते ही किसानों की हित की योजनाओं को बन्द कर दिया, मक्के का रजिस्टेशन आज दिनांक तक शुरू नही हुआ, किसान कर्ज में डूबा हुआ है। मुलताई से आए सरपंच कृष्णा ठाकरे ने कहा कि वे किसानों के साथ होने वाले हर अत्याचार अन्याय के खिलाफ खड़े है, जब जब छिन्दवाड़ा के किसान उन्हें आमंत्रित करेंगें वे उनके साथ कंधे से कंधे मिलाकर संघर्ष करेंगें। बाम्हनवाड़ा से आए छिन्गा वर्मा ने कहा कि अदानी पाॅवर प्लाॅट से प्रभावित किसानों की जमीनें किसानों को वापस मिलना चाहिए, उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सरकार मछली माफिया  के हाथ की कठपुतली बना हुआ है। माॅचागोरा बाँध में किसानों की जमीनें डूबी है किन्तु मछली का ठेका सिवनी के ठेकेदार को दिया गया है। जबकि 28,000 मछुआरे छिन्दवाड़ा जिले में है, छिन्दवाड़ा जिले के मछवारों का पेट काटने का काम मध्यप्रदेश सरकार कर रही है। केवलारी से आए राधेश्याम वर्मा ने कहा कि सिवनी के ठेकेदार ने ठेके की राशि जमा नही की है अतः उसका ठेका निरस्त होना चाहिए तथा प्रभावित किसानों को मछली आखेट तथा बेचने के अधिकार मिलना चाहिए इसके लिए किसान संघर्ष समिति संघर्ष करेगी।
डाॅ. सुनीलम ने महापंचायत को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसान संघर्ष समिति ने देश में सबसे पहले फसल बीमा की आवाज उठाई, गेरूआ रोग को प्रकृतिक आपदा में शामिल करवाया तथा दामदुपट के सिद्धांत को लागू करवाया। सभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के अन्तर्गत देश में 212 संगठन एकजुट हुए है जो देश में किसानों की कर्जा मुक्ति तथा लागत से ढेड़ गुना दाम दिलाने के लिए संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013, जन संघर्ष के परिणाम स्वरूप कांग्रेस के शासनकाल में लाया गया उसे लागू कराने का काम कांग्रेस की सरकार का है।
एड. आराधना भार्गव ने कहा कि अदानी पाॅवर प्लाॅट से प्रभावित किसानों की जमीन सन् 1986-87 में, 1898 के भू-अर्जन अधिनियम के धारा 17 के अन्तर्गत अधिग्रहित की गई किन्तु आज दिनांक तक थर्मल पाॅवर नही बन पाया। नए भू-अर्जन अधिनियम के तहत आवार्ड पारित होने के 5 साल के अन्दर कोई परियोजना पूरी नही होती है तो किसान की जमीन किसानों को वापस की जाए। सुश्री आराधना भार्गव ने बताया कि अदानी पाॅवर प्लाॅट से प्रभावित किसानों का संघर्ष करने के लिए एक कमेटी बनाई गई जिसका अध्यक्ष अखिलेश वर्मा, सचिव गजेन्द्र वर्मा, तथा उपाध्यक्ष कमुद्र वर्मा एवं रघुराज वर्मा तथा नीरोत्म वर्मा, मोहित वर्मा, मुकेश वर्मा, राजाराम वर्मा, सकाराम वर्मा सदस्य बनाए गए। सभी पदाधिकारीगण ने घोषणा की वह एक माह के अन्दर अदानी पाॅवर प्लाॅट से प्रभावित किसानों को एकजुट करेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गया प्रसाद वर्मा ने कहा कि हीवरखेड़ी के लगभग 75 किसानों की 250 एकड़ जमीन अदानी पाॅवार प्लाॅट के कब्जे में गैर कानूनी तरीके से है, किसानों की जमीन बहुत उपजाऊ है किसान अपनी जमीन वापस लेना चाहते है। 4 फसलें पैदा करके गांव के नवजवानों को रोजगार के अवसर प्लाॅट से अधिक है अतः जब तक अदानी पाॅवर प्लाॅट से प्रभावित किसानों की जमीने किसानों को वापस नही मिलेगी तब तक किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में उनका आन्दोलन जारी रहेगा।  महापंचायत को चैसरा, डागावानी पिपरिया, थांवरीटेका तथा जमुनिया पठार कोयला खदान से प्रभावित किसानों ने भी सम्बोधित किया।

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