हनी ट्रैप मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में हो
सीबीआई जांच और व्यापम मामले की तरह प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग
खबर नेशन / Khabar Nation
मध्य प्रदेश के सर्वाधिक चर्चित हनी ट्रैप मामले की जांच हाई कोर्ट की निगरानी में किए जाने की मांग की गई है। इसी के साथ ही हनीट्रैप की एक आरोपी मोनिका यादव के साथ बलात्कार किए जाने का प्रकरण भी दर्ज किए जाने की मांग की गई है । गौरतलब है कि इंदौर में नगर पालिक निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर पांच युवतियों श्वेता जैन ,श्वेता जैन, मोनिका यादव , बरखा भटनागर के खिलाफ 3 करोड़ की वसूली किए जाने का प्रकरण पलासिया पुलिस ने दर्ज किया था और गिरफ्तार किया था । इस मामले में अश्लील वीडियो क्लिपिंग दिखाकर वसूली की कोशिश की गई थी । जिसे हनी ट्रैप के रूप में देखा जा रहा है ।इसके पूर्व भी मध्य प्रदेश के एक अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी पीसी मीणा अश्लील वीडियो क्लिपिंग जारी किए जाने के मामले में उन्हें पद से हटा दिया गया था । इस पूरे मामले को लेकर इंदौर के वरिष्ठ अभिभाषक मनोहर दलाल के मार्गदर्शन में अभिभाषक ओमप्रकाश श्रोत्रिय ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है । जिसमें इस मामले की सीबीआई द्वारा जांच किए जाने की मांग की गई है। याचिका दिग्विजय सिंह भंडारी द्वारा मध्य प्रदेश शासन के विरुद्ध लगाया है । गौरतलब है कि पलासिया पुलिस ने प्रकरण क्रमांक 405/ 2019 दिनांक 17 2019 दर्ज किया है। आरोपियों से लैपटॉप मोबाइल नगदी 1400000 और एक क्रेटा कार जबकि है । इस शिकायत में मुख्य शिकायतकर्ता इंदौर नगर पालिक निगम इंजीनियर हरभजन सिंह द्वारा मोनिका यादव के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करने की स्वीकृति भी दी गई है । जिसको लेकर शिकायतकर्ता का कहना है कि मोनिका यादव की उम्र 18 साल है। जिसमें पुलिस को हरभजन सिंह के विरुद्ध बलात्कार का प्रकरण दर्ज करना था । अन्य साथी अपराधी महिलाओं के विरुद्ध धारा 366 एवं प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फार्म फेक्चुअल अफेंसेज एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया जाना था । जो पलासिया पुलिस ने प्रभावशाली अपराधियों को बचाने की गरज से दर्ज नहीं किया एवं साक्ष्य नष्ट किए जाने का प्रयास किया जा सकता है । क्योंकि इस प्रकरण में विभिन्न स्थानों पर अपराध घटित हुआ है एवं विभिन्न लोगों के साथ यह अपराध घटित हुआ है । इसलिए इस मामले में व्यापम प्रकरण की तरह अलग-अलग प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए और इसकी जांच हाईकोर्ट की निगरानी में की जाना चाहिए । गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश भाजपा सरकार के पूर्व मंत्रियों पर देह शोषण का आरोप भी लगाया है जो काफी गंभीर है ।