एक उधोगपति की गुहार: मजदूरों को जीवनभर के लिए पुख्ता काम दे या बालाघाट कलेक्टर को सस्पेंड करें
शिवराज कमलनाथ के राज में यूँ बंद हुए उधोग
300 मजदूर हुए बेघर और सरकार नहीं सुन रही फैक्ट्री मालिक की गुहार
खबर नेशन / Khabar Nation
पैंसठ लाख रुपये लगाकर सयंत्र में बीस करोड़ रुपये की मजदूरी बांटने वाले उधोगपति को दर दर भटकने पर मजबूर होना पढ़ता है | उधोगपति का गुनाह सिर्फ इतना है कि वो कारखाने को चलाना चाहता है और सरकार एवं उसके कारकून उधोग को चलने देना नहीं चाहते हैं | वजह सरकार का विजन ना होना और अफसरों की पेट पूजा ना हो पाना है | मध्यप्रदेश का एक ऐसा ही उधोगपति शासन प्रशासन को अल्टीमेटम देकर सड़क की लड़ाई लड़ रहा है | यह हालात सिर्फ शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के हों ऐसा नहीं है पन्द्रह साल बाद बनी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के दौरान भी उधोगपति की बात अनसुनी ही रही |
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में अंग्रेजी कवेलू का निर्माण करने वाले सूरज टाइल्स प्रा.लि. के उधोगपति शैलेष वैध की मट्टी की खदान की लीज निरस्त कर दी गई है | उक्त उधोगपति के पास बालाघाट जिले के धनसुआ ग्राम की 1.4 हेक्टेयर भूमि वर्ष 2009 से मार्च 2019 तक के लिए स्वीकृत थी | 16-01-2019 को श्री वैध ने नवीनीकरण के लिए आवेदन कर दिया | उक्त खनिज पट्टा श्री वैद की निजी भूमि पर जारी किया गया था |
मध्यप्रदेश की अड़ंगे लगाने वाली नौकरशाही ने मनवांक्षित इच्छा की पूर्ति ना होने पर उक्त लीज निरस्त कर दी | उक्त उधोगपति शैलेष वैध काफी लंबे समय से मध्यप्रदेश के राजनेताओं और अफसरों से अंग्रेजी कवेलू उधोग को प्रोत्साहन देने के लिए प्रयासरत है | पर मध्यप्रदेश की सरकार इसकी बजाय सीमेंट उधोग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्यरत हैं | इस मामले को लेकर वे गौरीशंकर बिसेन से लेकर तत्कालीन खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ( जो भाजपा सरकार में खनिज विकास निगम के अध्यक्ष भी हैं) सहित तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी मिले हैं लेकिन नतीजा सिफर ही रहा |
सोशल मीडिया पर सरकार और बालाघाट जिला प्रशासन की कार्यशैली के खिलाफ मोर्चारत शैलेष वैध ने बताया कि विगत पांच साल पहले मेरे ऊपर किसी भी प्रकार का कर्जा नहीं था | आज मैं तीन करोड़ के कर्जे में हूँ और अपना प्लांट बेचने पर मजबूर हो गया हूँ | सरकार ने 200 मजदूरों को बेघर करने का काम किया है | चलते कारखाने को बंद करना पड़ रहा है | शैलेष वैध ने बताया कि मैंने खदान की लीज नवीनीकरण के लिए समय पर आवेदन दिया था| ना माइनिंग आफीसर सुनने तैयार है और ना ही कलेक्टर| उन्होंने कहा कि पांच दिन पूर्व मैंने अल्टीमेटम दे दिया है | या तो इन मजदूरों को जीवनभर के लिए पुख्ता काम दे या कलेक्टर को सस्पेंड करें |