छेड़छाड़ से तंग छात्रा ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट छोड़ा
खबर नेशन / Khabar Nation
भोपाल, । ‘दो मामलों में स्वतः संज्ञान’
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष श्री मनोहर ममतानी ने ’दो मामलों में स्वतः संज्ञान’ लेकर संबंधितों से जवाब मांगा है।
विदिशा जिले में पुलिस के समय पर एक्शन नहीं लेने पर फिर एक छात्रा को मौत को अपने गले लगाना पड़ा। गल्र्स काॅलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा एक युवक की प्रताड़ना से इतना त्रस्त हो गई थी कि उसे आत्महत्या करने के अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आया। छात्रा ने आत्महत्या के पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उसने अपने ही गांव के रहने वाले युवक पर छेड़छाड़ का प्रताड़ना का आरोप लगाया है। जबकि छात्रा ने पूर्व में अपने साथ हुई छेड़छाड़ की शिकायत थाने में दर्ज भी करायी थी। लेकिन इस पूरे मामले में पुलिस का रवैया लापरवाहीपूर्वक रहा। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने पुलिस अधीक्षक, विदिशा से प्रकरण की जांच कराकर की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन तीन सप्ताह में मांगा है।
किसान को कागजों ने नहीं मिल रही जिंदगी
नीमच जिले में एक किसान लंबे समय से हाथ में कागजों का पुलिंदा लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, वह भी सिर्फ यह बताने के लिए कि वह जिंदा है। असल में सरकारी रिकाॅर्ड में किसान को मृत बता दिया गया है। किसान सम्मान निधि नहीं मिलने पर पड़ताल हुई तो पता चला कि किसान को कागजो में मृत घोषित किया है। मामला पिपल्या नथावात गांव का है। आरोप है कि पटवारी ने किसान को रिकाॅर्ड में मृत घोषित कर दिया है, जबकि वह जीवित है। मई 2021 से उसे मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि भी प्राप्त नहीं हो रही है। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर, नीमच से प्रकरण की जांच कराकर पीड़ित व्यक्ति की समस्या का शीघ्र समाधान कर प्रतिवेदन 15 दिवस में मांगा है।
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गौरव चतुर्वेदी
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