कैदियों के साथ भेदभाव , जेल डीजी जबाब दें

 

खबर नेशन/ Khabar Nation

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने प्रदेश में कैदियों के साथ भेदभाव होने और कड़ाके की ठंड में सिर्फ सेंट्रल जेलों के कैदियों को ही कैंटीन की सुविधा मुहैया होने संबंधी एक मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जिला जेलों एवं उपजेलों के कैदियों को कंबल, बीमारी में पौष्टिक खाने से लेकर तेल-साबुन के लिये तरसना पड़ रहा है। वह भी तब, जब जेल मैन्युअल में ही विचाराधीन कैदियों के लिये सुविधायें दी गई हैं। दरअसल भोपाल सेंट्रल जेल में सिमी आतंकियों की फरारी के बाद दिसम्बर 2016 में प्रदेशभर की जेलों के बाहर से कैदियों को मिलने वाले सामान सहित अन्य सभी सुविधाओं पर कड़ाई से रोक लगा दी गई थी। हालांकि बाद में अक्टूबर 2021 से प्रायोगिक तौर पर सिर्फ सेंट्रल जेलों में कैंटीन की सुविधा शुरू की गई है, जो कि जारी है। दूसरी ओर जिला एवं उप जेलों में कैंटीन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। वह भी तब, जब 50 हजार कैदियों में से करीब 70 प्रतिशत कैदी इन्हीं जेलों में है। मामले में आयोग ने पूछा है कि सेंट्रल जेल की घटना के कारण कैंटीन सुविधा दी गई थी। अब केवल सेंट्रल जेलों में ही यह सुविधा प्रारंभ की गई है, जबकि जिला जेलों एवं अन्य छोटे वर्ग की जेलों में इसे प्रारंभ करने में कोई बाधा पहले भी नहीं थी और अब भी नहीं है। तो फिर ऐसा क्यूं हो रहा है ? आयोग ने महानिदेशक, जेल मुख्यालय से उपरोक्त सुविधा का लाभ सभी श्रेणी की जेलों दिये जाने के संबंध में तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।

 

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