फर्जी लोन एप के जरिए क्रिप्टो करंसी चाइना भेजने वाले सर्वाधिक खाते गुजरात में
मध्य प्रदेश पुलिस की जांच में खुलासा, ज्यादातर कोरोना काल में बेरोजगार हुए युवा जुड़े हैं इस धंधे से,,,
मध्यप्रदेश पुलिस की जांच में सामने आए तथ्य
TV 9 भारतवर्ष के मकरंद काले की विशेष रिपोर्ट
खबर नेशन / Khabar Nation
मध्यप्रदेश में साइबर अपराधों में लगातार बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। लोन एप के जरिए लगातार आम लोगों को ठगा जा रहा है। इतना ही नहीं, गेमिंग एप, एनी डेस्क और दूसरे माध्यमों से भोले भाले लोगों को परेशान किया जा रहा है। साइबर सेल की अब तक की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल इस ठगी से आने वाला करोड़ों रुपया देश के बाहर जा रहा है। मध्यप्रदेश साइबर पुलिस की पड़ताल बताती है कि हर महीने देश का करोड़ों रुपया देश के बाहर क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से भेजा रहा है। जिन अकाउंट्स में ये पैसा गया है उसमें से अधिकांश बैंक अकाउंट चाइना के हैं, यानि ये कहना गलत नहीं होगा कि देश की इकॉनोमी पर परोक्ष रूप से चाइना हमला कर रहा है। पेश है एक रिपोर्ट---
भोपाल की रहने वाली फिज़ा खान हैं की बहन ने गूगल प्ले के ज़रिए लोन एप खोजकर 3000 रुपए का लोन अप्लाय किया। इस एप का नाम था 'यस क्रेडिट एप',,, इस एप से लोन लेते समय फिज़ा के नंबर से पैन कार्ड, आधार कार्ड और दूसरे डॉक्युमेंट अपलोड किए गए। इसके 7 दिन के बाद अचानक से फिज़ा के फोन पर इंटरनेशनल नंबर से कॉल आने लगे। ये नंबर थे +8801894227679 और +62838633822062 ... इन नंबरों से अलग अलग लोगों ने पैसों की डिमांड की और पैसा नहीं देने की सूरत में फिज़ा को बदनाम करने की धमकी दी। फिज़ा की कॉन्टैक्ट लिस्ट इस साइबर ठग के पास मौजूद थी, जिसके बाद उसने कुछ परिचितों को अश्लील फोटो भेजकर फिज़ा का नंबर दिया और उसे कॉलगर्ल बताने लगा। फिज़ा के एक रिश्तेदार के पास जब ये फोटो पहुंची तो उन्होंने फौरन फिज़ा को सूचना दी, जिसके बाद फिज़ा भोपाल के साइबर सेल पहुंची और खुद के साथ हो रही इस ब्लैकमेलिंग की जानकारी उसने पुलिस को दी।
साइबर सेल के डिप्टी कमिश्नर अमित कुमार से चर्चा
मामले में साइबर सेल के डिप्टी कमिश्नर अमित कुमार से हमने चर्चा की। अमित कुमार ने जानकारी दी कि हाल के दिनों में इस तरह के मामलों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। इस तरह के केसेस की जब पड़ताल की गई तो चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ज़्यादातर मामलों में पीड़ित अगर पैसा दे देता है तो वो पैसा क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से चाइना भेजा जा रहा है। बीते 8 महीने के भीतर करीब 2500 से ज़्यादा शिकायतें लोन एप के माध्यम से फ्रॉड की सामने आ रही हैं, जिसमें से अब तक की पड़ताल में 50 से ज्यादा मामलों में पैसा चाइना के रहने वाले शख्स के अकाउंट में गया है। एक और चौंकाने वाली बात ये है कि रोज़ाना करोड़ों रुपया क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से चाइना के अलावा सिंगापुर, थाइलैंड के विदेशी अकाउंट्स में जा रहा है। अमित कुमार ने तफ्सील से इन फ्रॉड केसेस के बारे में हमसे चर्चा की।
आइए आपको समझाते हैं कि स्टेप बाय स्टेप ये फ्रॉड कैसे अंजाम दिया जाता है और कैसे इस पैसे को दूसरे देश में भेज दिया जाता है।
स्टेप 1 इस तरह के फ्रॉड्स में सबसे पहला स्टेप बैंक अकाउंट खुलवाने से शुरु होता है जिसमें सबसे बड़ा रोल टेलीग्राम नाम के एक चैटिंग एप का है। पुलिस की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि हाल के दिनों में कई युवा सोशल मीडिया पर पैसा कमाने का आसान रास्ता खोजते हैं। इस टेलीग्राम एप के ज़रिए साइबर ठग ऐसे युवाओं को खोजते हैं और उनसे फर्ज़ी बैंक अकाउंट्स खुलवाया जाता हैं। इस बैंक अकाउंट को खोलने औऱ इसके राइट्स (बैंक अकाउंट ऑपरेट करने के अधिकार) साइबर ठग को बेचने के एवज में उन्हें क्रिप्टो या बिटक्वाइन के ज़रिए पैसा पहुंचाया जाता है। पैसों के लालच में ये लोग फर्ज़ी केवायसी बनाकर अकाउंट खोलते हैं। इन लोगों को भी जानकारी नहीं होती कि इन बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल कैसे और किसलिए किया जाएगा।
स्टेप 2 हिंदुस्तान या उसके पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, पाकिस्तान, चाइना में कॉल सेंटर्स में बैठे ये ठग शिकार फंसाना शुरू करते हैं। लोन एप के जरिए लोन लेने वाले, गेमिंग एप के ज़रिए जानकारी देने वाले, अनजाने में ओटीपी शेयर करने वाले, ऐसे लोगों को धमकाना शुरू किया जाता और पैसे की डिमांड की जाती है। ये पैसा उसी फर्ज़ी बैंक अकाउंट में भिजवाया जाता है जो उसने टेलीग्राम एप पर फंसाए गए किसी युवा से खरीदा है।
स्टेप 3 अब इस अकाउंट में पैसा आते ही उस अकाउंट से बिट क्वाइन या क्रिप्टो करेंसी खरीद ली जाती है। जब तक पुलिस और साइबर सेल इस अकाउंट का पता लगाकर उसे सीज़ करवाते हैं उसमें डाले गए पैसे से क्रिप्टो खरीदा जा चुका होता है। ये क्रिप्टो करेंसी देश के बाहर दूसरे मुल्क के किसी भी बैंक अकाउंट में भेज दी जाती है और हिंदुस्तान की पुलिस के हाथ में कुछ भी नहीं रह जाता। जांच में ये भी सामने आया है कि ज़्यादातर लोन अकाउंट गुजरात में पाए गए हैं। जिसके तार चाइना, थाइलैंड, सिंगापुर जाते हैं। सबसे ज़्यादा इसके लिए लार्क सॉफ्टवेटर का इस्तेमाल होता है। जिस का सर्वर सिंगापुर में है
साइबर सेल के उपायुक्त अमित कुमार बताते हैं कि जांच में सामने आया है कि अब तक सबसे ज़्यादा क्रिप्टो करेंगी चाइना के अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई है। करीब 50 से ज़्यादा मामलों में जांच चाइना के बैंक अकाउंट्स पर जाकर रुक गई। हमारी पुलिस सिर्फ उन फर्ज़ी बैंक अकाउंट्स बनाने वाले युवाओं तक पहुंच पाती है लेकिन उन्हें पकड़ने से कोई फायदा नहीं है।
आंकड़ों की मानें तो 2019 से अभी तक करीब 10 हज़ार से ज़्यादा साइबर फ्रॉड की शिकायतें आ चुकी हैं। अकेले साल 2022 के 8 महीनों में 2500 से ज़्यादा शिकायतें साइबर सेल को मिली हैं। जिसमें करीब 10 करोड़ रुपए से ज़्यादा का फ्रॉड क्लेम किया गया है। जिसमें से 50 मामलों में एफआईआर दर्ज करके करीब 70 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 30 एफआईआर ज़ीरो पर कायम करके अलग अलग थानों को भेजी जा चुकी हैं। 70 लाख रिफंड, 30 लाख रुपए सीज़ कराए गए हैं। इसी साल आए मामलों में 100 से ज़्यादा मामले लोन फ्रॉड के हैं। पैन कार्ड आधार कार्ड मॉर्फिंग की जाती है, इन साइबर फ्रॉड्स की वजह से कई सुसाइड भी हुए हैं। कोरोना काल में बेरोजगार हुए युवा जुड़े हैं इस धंधे से
साइबर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस तरह के फ्रॉड्स को अगर रोकना है तो लोगों को साइबर के मामलों में अवेयर होना होगा। लोगों में जानकारी का अभाव साइबर फ्रॉड की बड़ी वजह बनता है। गौरतलब है कि ज़्यादातर पकड़े गए लोग बेरोज़गार हैं जिन्हें कोरोनाकाल में नौकरी से हाथ धोना पड़ा या काम काज नहीं मिला। वहीं पीड़ित पक्ष 40 से 60 साल का है जो सोशल मीडिया और इंटरनेट को लेकर ज्यादा अवेयर नहीं है। इस साइबर फ्रॉड को रोकना एक बड़ी चुनौती है।