अपरा एकादशी व्रत 2026: श्रीहरि की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पारण का सही समय

Uncategorized May 12, 2026

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है, और इन्हीं में से एक है अपरा एकादशी व्रत। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 2026 में अपरा एकादशी और भी खास बन रही है क्योंकि इस बार यह सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रही है, जो व्रत के फल को कई गुना बढ़ा देता है।

आज के समय में जब लोग मानसिक तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी से परेशान हैं, ऐसे व्रत और पूजा-पाठ आत्मिक शांति देने का काम करते हैं। अपरा एकादशी व्रत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन और सकारात्मकता लाने का भी माध्यम माना जाता है। आइए जानते हैं इस व्रत की पूरी विधि, शुभ मुहूर्त और पारण का सही समय आसान भाषा में।

अपरा एकादशी 2026 कब है? तिथि और महत्व

इस व्रत को अपरा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति के पापों को समाप्त कर अपार पुण्य प्रदान करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत रखने से झूठ, पाप और नकारात्मक कर्मों का नाश होता है।

अपरा एकादशी 2026 का शुभ मुहूर्त

इस दिन पूजा और ध्यान के लिए कई शुभ मुहूर्त माने गए हैं। इनमें ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:08 बजे से 04:50 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 02:33 बजे से 03:27 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 07:02 बजे से 07:23 बजे तक और निशिता मुहूर्त रात 11:56 बजे से 12:38 बजे तक बताया गया है।

ब्रह्म मुहूर्त को सबसे श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि इस समय वातावरण शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है। अगर कोई व्यक्ति इस समय पूजा करता है तो उसका मन अधिक स्थिर और एकाग्र रहता है।

 अपरा एकादशी व्रत की सरल पूजा विधि

अपरा एकादशी व्रत की पूजा विधि बहुत कठिन नहीं है, इसे कोई भी व्यक्ति घर पर आसानी से कर सकता है।

 1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। स्वच्छ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु का ध्यान करें।

2. व्रत का संकल्प लें
हाथ में जल और फूल लेकर यह संकल्प लें कि आप पूरे नियम से व्रत करेंगे।

 3. सूर्य देव को अर्घ्य दें
तांबे के लोटे में जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। इससे जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता आती है।

 4. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की स्थापना करें
घर के पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

 5. स्नान और पूजा सामग्री अर्पित करें
भगवान विष्णु को पंचामृत, गंगाजल, फूल, पीला चंदन, अक्षत, फल और वस्त्र अर्पित करें।

6. भोग और आरती
भगवान को खीर, मिठाई और फल का भोग लगाएं। दीपक जलाकर विष्णु चालीसा और मंत्रों का जाप करें।

7. व्रत कथा सुनें
अपरा एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है।

 

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