दिल को छू गई मेलोडिज़ ऑफ महेंद्र कपूर
जाल सभागृह पर महेंद्र कपूर पर केंद्रित स्वर श्रुति का हुआ सुरीला आयोजन
खबर नेशन / Khabar Nation
इंदौर। जिस तरह बारिश की बूंदों ने पूरे शहर को भिगो दिया, उसी तरह एक ऐसी नायाब संगीत महफ़िल सजी जिसने श्रोताओं को सुरों में भीगो दिया। मौका था स्वर श्रुति द्वारा आयोजित खुशनुमा संगीतमय शाम “ मेलोडिज़ ऑफ महेंद्र कपूर” का। जो कि ब्रह्मलीन दर्शनसिंह कनोजिया के जन्मदिवस एवं महेंद्र कपूर और मधुसूदन रेघे की पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया। यूँ तो आमतौर पर रोज़ ही शहर में संगीत कार्यक्रम हो रहे है लेकिन जाल सभागृह पर बहुत खास महफ़िल थी, मौसम भी खुशगवार और महफ़िल भी शानदार मयस्सर हो जाये तो मानों दिल की मुराद पूरी हो गयी। पहली बार पूरी तरह महेंद्र कपूर पर केंद्रित एक ऐसा बेजोड़ करिश्माई संगीत आयोजन था, जिसकी महक श्रोताओं को अरसे तक लुभाती रहेगी। महेंद्र कपूर साहब को जस का तस पेश करते हुए उसी अंदाज़े बयां के साथ फिल्मी गीतों को रियाज़ी गायक संदीप कनोजिया और असद ने पूरी तैयारी के साथ पेश किया। संदीप कनोजिया ने अपनी एक खास पहचान बनाते हुए फ़िल्म गुमराह से गीतकार साहिर लुधियानवी का नगमा आप आये तो ख़याले दिले नाशाद आया,
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया सुनाकर रंग जमा दिया । संदीप कनोजिया ने अरी ओ शोख कलियों मुस्कुरा देना वो जब आये, सुनो फूलों महक अपनी लुटा देना वो जब आये एवं आ जाओ आ भी जाओ गाकर महेंद्र कपूर साहब की ठहराव वाली गायकी को अपने सधे गले से पेश किया।असद खोखर ने महेंद्र कपूर साहब के रोमांटिक अंदाज़ को पकड़ते हुए मेरा प्यार वो है, आंखों में क़यामत के काजल, खो गया है मेरा प्यार गाकर श्रोताओं को आखिरी तक बांधे रखा। देवेंद्र पंडित ने भजन रूपी गीत ओ शंकर मेरे, रामचंद्र कह गए सिया को बहुत ही तल्लीनता से सुनाया। मुंबई और दुबई में अपनी गायकी की पहचान बनाने के बाद गायिका अनुश्री ने युगल गीतों में बख़ूबी साथ दिया। संदीप कनोजिया के साथ अनुश्री ने मेरी साँसों को जो महका रही है एवं तेरे संग प्यार में नही तोड़ना को बहुत ही सुरीले अंदाज़ में सुनाकर महफ़िल को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। सुषमा मण्डलोई एवं अनुश्री ने असद खोखर के साथ दिल की ये आरज़ू और हम जब सिमट के आपकी बाँहो में आ गए पेश करके संगीत क़द्रदानों की बहुत तारीफ बटोरीं। महेंद्र कपूर साहब के कार्यक्रम के प्रति श्रोताओं की दीवानगी इस कदर थी कि मुक़र्रर वक़्त से पहले ही हाल भर चुका था। देर रात तक महफ़िल जमी रही,श्रोताओ ने खड़े होकर फ़नकारों की हौसला अफजाई भी की। जो गीत बहुत उम्दा थे वह पसंद भी किए गए,जैसे - दुनिया मे तेरा है बड़ा नाम, न मुँह छुपा के जियो, ए जाने चमन तेरा गोरा बदन, नीले गगन के तले, दिल करता ओ यारा दिलदारा। कार्यक्रम का समापन देशभक्ति गीत है प्रीत जहाँ की रीत सदा से किया गया। अभिजीत गौड़ और साथियों ने लाजवाब संगीत प्रस्तुत किया। अलका सैनी में अपने शब्दों के जादू से श्रोताओं को महेंद्र कपूर साहब के किस्से और जीवन से जुड़ी बातें बताते हुए उम्दा मंच संचालन किया। कार्यक्रम के आयोजक किशोर कुमार रेघे ने श्रोताओ का आभार माना।