मंदसौर गोलीकांड और नर्मदा किनारे वृक्षारोपण घोटाले पर सरकार का रूख स्पष्ट, दोषियों पर होगी कड़ी कार्यवाही: शोभा ओझा

राजनीति Feb 19, 2019

खबरनेशन/Khabarnation  

भोपाल, प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने मीडिया में प्रकाशित एवं प्रसारित गृह मंत्री बाला बच्चन और वन मंत्री उमंग सिंघार के बयानों के संबंध में स्पष्ट किया है कि दोनों ही मंत्रियों ने पत्रकार-वार्ता के माध्यम से पार्टी व सरकार का रूख स्पष्ट करते हुए यह साफ कर दिया है कि कहीं कोई भ्रम की स्थिति नहीं है और सरकार अपने उद्देश्यों और रूख के प्रति पूरी दृढ़ता से कायम रहते हुए जांच उपरांत दोषियों पर कठोर कार्यवाही करने के लिये पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। 

ओझा ने गृह मंत्री बाला बच्चन के बयान के संबंध में स्पष्ट किया है कि बच्चन ने आज 19 फरवरी को प्रेसवार्ता के माध्यम से साफ कर दिया है कि 6 जून 2017 को मंदसौर के पिप्लियामंडी में जो गोली कांड हुआ था और जिसमें 6 किसानों की मौत हुई थी, उसमें जांच रिपोर्ट के परीक्षण के उपरांत ही विधिसम्मत कार्यवाही की जायेगी। इस मामले में कांग्रेस के वचनपत्र में भी साफ है कि उक्त गोलीकांड की जांच में जितने भी सरकारी अधिकारी एवं पुलिसकर्मी दोषी पाये जायेंगे उन सब पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने के लिए प्रदेश की कमलनाथ सरकार वचनबद्ध है। विधानसभा के पटल पर भी रखे गये गृहमंत्री बच्चन के बयान में यह साफ अंकित है कि जैन आयोग की जांच रिपोर्ट के परीक्षण उपरांत ही विधि सम्मत कार्यवाही की जायेगी। इसलिए कहीं कोई भ्रम की स्थिति नहीं है और सरकार अपने रूख पर पूरी तरह दृढ़ता से कायम है। 

दूसरी तरफ नर्मदा किनारे किये गये वृृक्षारोपण में किये गये व्यय की जांच के संबंध में वन मंत्री उमंग सिंघार द्वारा विधानसभा में जो जवाब प्रस्तुत किया गया है, उस संबंध में भी मीडिया में जो खबरें प्रकाशित एवं प्रसारित हुई हैं, वे भी पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यविहीन हैं। असल तथ्य यह है कि उपर्युक्त संदर्भ में पूछे गये प्रश्न पर वन मंत्री सिंघार ने विधानसभा में जो जवाब प्रस्तुत किया है, उसका केवल एक अंश ही प्रकाशित एवं प्रसारित हुआ है, जो पूरी तरह से भ्रामक है और संपूर्ण तथ्य एवं वास्तविकता को प्रस्तुत नहीं करता है। मीडिया में वनमंत्री का जो जवाब प्रकाशित-प्रसारित हुआ है वह उनका संपूर्ण जवाब नहीं है, क्योंकि उसी जबाव में उन्होंने आगे कहा है कि ‘‘विभाग द्वारा 2 जुलाई 2017 को कराये गये वृक्षारोपण की जीवितता के मूल्यांकन के पुनः परीक्षण हेतु प्रधान वन संरक्षक, मप्र एवं वन बल प्रमुख के पत्र क्रमांक 376 दिनांक 8 फरवरी 2019 द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है।’’ 

इस जवाब से स्पष्ट है कि वृक्षारोपण की जीवितता का मूल्यांकन 2 जुलाई 2017 के मूल्यांकन के आधार पर किया गया है और ज्ञात रहे कि तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और इस महाघोटाले को छिपाना चाहती थी। वन मंत्री ने स्पष्ट रूप से 2 जुलाई 2017 के मूल्यांकन के आधार पर 16 जनवरी 2019 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक के द्वारा प्रस्तुत जवाब के प्रत्युत्तर में वृक्षारोपण के संबंध में पूरे मामले की पुनः जांच के निर्देश दिनांक 8 फरवरी 2019 को दे दिये हैं। अतः अब पूरे मामले की जांच होगी और जब उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत होगी तब यह साफ हो जायेगा कि इस महाघोटाले में दरअसल कितना भ्रष्टाचार हुआ है। ओझा ने कहा कि उपरोक्त दोनों ही मामलों में सरकार दोषियों को चिन्हित कर, उनपर कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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